Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 8:1 रोमियों 8:2 रोमियों 8:3 रोमियों 8:4 रोमियों 8:5 रोमियों 8:6 रोमियों 8:7 रोमियों 8:8 रोमियों 8:9 रोमियों 8:10 रोमियों 8:11 रोमियों 8:12 रोमियों 8:13 रोमियों 8:14 रोमियों 8:15 रोमियों 8:16 रोमियों 8:17 रोमियों 8:18 रोमियों 8:19 रोमियों 8:20 रोमियों 8:21 रोमियों 8:22 रोमियों 8:23 रोमियों 8:24 रोमियों 8:25 रोमियों 8:26 रोमियों 8:27 रोमियों 8:28 रोमियों 8:29 रोमियों 8:30 रोमियों 8:31 रोमियों 8:32 रोमियों 8:33 रोमियों 8:34 रोमियों 8:35 रोमियों 8:36 रोमियों 8:37 रोमियों 8:38 रोमियों 8:39



मुख्य निहितार्थ: जिन्हें उसने पहले से जान लिया, उन्हें पहले से ठहराया भी है
रोमियों 8:29 का बल यह है कि ईश्वर उन लोगों के संबंध में पूर्वनियति का प्रयोजन रखता है जो विश्वास में हैं—ताकि वे यीशु मरुन के स्वरूप में हों और बहुवचनों में संभावित रूप से प्रमुख ठहरें। यह अध्याय स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ने पहले से जान लिया, पहले से ठहराया और फिर पवित्र आत्मा के द्वारा अपने पुत्र के समान बनाकर बदलने का धर्म निर्धारित किया है। यह सुरक्षा और गरिमा का मार्ग दर्शाता है: विश्वासियों की जीवनयात्रा उसकी योजना के अनुसार है, और वह उन्हें पवित्र बनाकर पुत्रवत अपनाने का काम कर रहा है।
साहित्यिक संदर्भ ( Literary Context )
पाठ रोमियों 8 में is् भगवान के उद्धार-कार्य की पूर्णता के लक्ष्य को उद्घाटित करता है: घोषणा से लेकर उद्धार के अंतिम दिन तक, प्रेरित पौलुस कहता है कि परमेश्वर ने जो पहले से जान लिया, उन्हें पहले से ठहराया भी है ताकि वे यीशु के स्वरूप में हों। यह पूर्व-ज्ञान और ठहराव के साथ कर्म का संयोजन दर्शाता है—कठिनाइयों के बीच भी परमेश्वर की योजना अंतिम परिणाम तक चलती है।
बैज्ञानिक-धार्मिक महत्व (Theological significance)
यह वाक्य बताता है कि उद्धार का स्रोत ईश्वर की स्वतंत्र योजना है, न कि मानव की कोशिशों पर आधारित। पहले जानना और फिर ठहराना—यही क्रम है जो धार्मिक विश्वासी जीवन की दिशा तय करता है। “स्वरूप में हों” से यीशु के समानता की प्रक्रिया और नयापन के बारे में संकेत मिलते हैं: विश्वासियों में पवित्र आत्मा के transformative कार्य से जीवन में परिवर्तन आता है, ताकि वे बहुवचनों में “पहलोंठे” हों।
पवित्र ग्रंथ के साथ संबंध (Cross-references)
व्याख्या: ये क्रॉस-रेफरेंसेस एक सतत मार्ग दिखाती हैं—भगवान ने जो प्रारम्भ किया है, वह उसे उत्कृष्ट रूप से पूर्ण करेगा और हमारा लक्ष्य यीशु के समान आचरण में ढलना है।
आत्म-चिंतन के लिए कुछ प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष (Conclusion)
रोमियों 8:29 हमें बताता है कि उद्धार केवल एक पल का घटना नहीं है, बल्कि एक पूर्ण, स्थिर योजना में है। जिन्हें उसने पहले से जान लिया, उन्हें पहले से ठहराया भी है ताकि वे उसके पुत्र के स्वरूप में हों—यही उद्देश्य है: परमेश्वर का परिवार बनना, उसकी महिमा में भागीदारी पाना और यीशु के समान बनना। यह विश्वासियों के लिए आश्वस्ति है कि उनका जीवन किसी अंजाने घटना की साक्ष्य नहीं, बल्कि एक परिकल्पित योजना का हिस्सा है जिसे ईश्वर ने प्रेम से निर्धारित किया है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke): यदि उपलब्ध हों, नीचे संक्षेप में उल्लेखित हैं—पंक्तियों को पूर्ण वाक्यों के रूप में उद्धृत नहीं किया गया है, केवल अर्थ-संदेश:
Matthew Henry: पहले से जानना और ठहराना—ईश्वर की संकल्प-योजना में विश्वासियों की नयापन-यात्रा को आरम्भ करना।
Albert Barnes: उद्धार का उद्देश्य—कुल मिलाकर मसीह के प्रतिरूप बनना ताकि बहुओं में प्रमुखता मिले।
Adam Clarke: पूर्व-ज्ञान के साथ ठहराव एक ठोस निश्चय है जो विश्वास की पुष्टि करता है कि परमेश्वर का सुखद उद्देश्य पूर्ण होगा।