Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 8:1 रोमियों 8:2 रोमियों 8:3 रोमियों 8:4 रोमियों 8:5 रोमियों 8:6 रोमियों 8:7 रोमियों 8:8 रोमियों 8:9 रोमियों 8:10 रोमियों 8:11 रोमियों 8:12 रोमियों 8:13 रोमियों 8:14 रोमियों 8:15 रोमियों 8:16 रोमियों 8:17 रोमियों 8:18 रोमियों 8:19 रोमियों 8:20 रोमियों 8:21 रोमियों 8:22 रोमियों 8:23 रोमियों 8:24 रोमियों 8:25 रोमियों 8:26 रोमियों 8:27 रोमियों 8:28 रोमियों 8:29 रोमियों 8:30 रोमियों 8:31 रोमियों 8:32 रोमियों 8:33 रोमियों 8:34 रोमियों 8:35 रोमियों 8:36 रोमियों 8:37 रोमियों 8:38 रोमियों 8:39



रोमियों 8:22 का सरल अर्थ
इस व verse में कहा गया है कि पूरी सृष्टि एक समान पीड़ा में है; प्रकृति, मनुष्य और सारी सृष्टि एक विस्तृत कराह और प्रतीक्षा में लगी है। यह बताता है कि प्रगति और विविध सुख-सुविधाओं के बावजूद दुनिया अभी पूर्ण नहीं है; वहाँ एक शारीरिक-आत्मिक विक्षोभ है जो परमेश्वर की योजना के पूर्ण पूर्णत्व तक चलता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
रोमियों 8 अध्याय में पौलुस विश्वासी जीवन के नवीनीकरण और प्रेम में स्थिरता पर केंद्रित है। 8:22 उन परेशानियों के मूल कारण को दर्शाता है— उद्धार की तैयारी और परमेश्वर की महिमा के लक्ष्य के प्रकाश में। यह 'पकड़े हुए धरती का कराह' चित्र देता है, जहाँ प्रकृति अभी भी पाप के परिणाम और उद्धार के समाधान की प्रतीक्षा कर रही है।
व्याख्यात्मक बिंदु
संदर्भगत विचार
यह विचार मार्मिक रूप से दर्शाता है कि हमारे दुख केवल व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि सृष्टि के बड़े दर्शन का भाग हैं। नीचे के पड़ोसियों पाठों में इस विचार की पैठ मिलती है:
थीमेटिक सारांश
संबद्ध स्पष्टीकरण और उद्धरण
प्रसिद्ध पवित्र-ग्रंथ व्याख्याकारों की चोटियां एक साथ मिलकर हमें यह बताती हैं कि पूरी सृष्टि अभी पूर्ण नहीं हुई है, पर परमेश्वर की महिमा के उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रही है।
मैथ्यू हेनरी से कुछ संकेत: वे लिखते हैं कि दुष्कर स्थितियाँ ताकि हम परमेश्वर की सहायता पर अधिक निर्भर हों।
ऐल्बर्ट बार्न्स के अनुसार, यह कराह ईश्वर के उद्धारक्रम के भीतर एक प्राकृतिक चरण है जो विश्वासियों के लिए भी अनुभवजनित है।
एडम क्लार्क वर्णन करते हैं कि समस्त सृष्टि के लिए अंतिम लक्षित रूप से उद्धार और पुनर्सृजन की अभिलाषा है, जो मसीही महिमा के समय प्रकट होगी।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
अगर हम वर्तमान दर्द में भी परमेश्वर के जन्म-प्रावधानों पर भरोसा रखें, तो हमारे भीतर और समुदाय में धैर्य और आशा बढ़ती है। कठिनाइयाँ आते समयorte: - परमेश्वर की योजना के लिए धैर्य बनाकर रखें, - अपनी दृष्टि को पृथ्वी की पीड़ा से ऊपर उठाकर ईश्वर की महिमा की प्रतीक्षा करें, - एक दूसरे के साथ सहनशील और मददगार बनें, ताकि पूरी निर्माण-प्रभुता में एक साथ जयकार कर सकें।