Old Testament
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रोमियों 10:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे भाइयों, मेरे मन की अभिलाषा और उनके लिये परमेश्वर से मेरी प्रार्थना है, कि वे उद्धार पाएँ*।
रोमियों 10:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 9:20 (HINIRV) »
मैं यहूदियों के लिये यहूदी बना कि यहूदियों को खींच लाऊँ, जो लोग व्यवस्था के अधीन हैं उनके लिये मैं व्यवस्था के अधीन न होने पर भी व्यवस्था के अधीन बना, कि उन्हें जो व्यवस्था के अधीन हैं, खींच लाऊँ।

यूहन्ना 5:34 (HINIRV) »
परन्तु मैं अपने विषय में मनुष्य की गवाही नहीं चाहता*; फिर भी मैं ये बातें इसलिए कहता हूँ, कि तुम्हें उद्धार मिले।

रोमियों 9:1 (HINIRV) »
मैं मसीह में सच कहता हूँ, झूठ नहीं बोलता और मेरा विवेक भी पवित्र आत्मा में गवाही देता है।
पाठ का सीधा अर्थ
रोमियों 10:1 में पॉल कहते हैं: “हे भाइयों, मेरे मन की अभिलाषा और उनके लिये परमेश्वर से मेरी प्रार्थना है, कि वे उद्धार पाएँ।” यहां उद्धार की अभिलाषा व्यक्तिगत नहीं, वरन् समुदाय के प्यारे भाइयों के लिये है, जिन्हें ईसाई विश्वास के प्रकाश में परमेश्वर की कृपा से जीवन प्राप्त करने का आह्वान किया गया है।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
पॉल रोम के समुदाय के साथ एक सारभौतिक संवाद कर रहे हैं जहाँ वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस उद्धार का मार्ग विश्वास पर निर्भर है न कि सिर्फ आराधना, वंशावली या कानून का कायदा। रोमियों 9–11 के बीच उन्होंने यह दिखाया है कि परमेश्वर की योजना सभी जातियों के लिए है; फिर भी कुछ लोग नास्तिकता या अविश्वास के कारण उद्धार से विपन्न हैं। इस पंक्ति में उनका उद्देश्य है कि यह अभिलाषा एक sincere, प्रार्थनात्मक और ईमानदार दिल से है—क्योंकि उद्धार परमेश्वर की योजना और उसकी कृपा से होता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
सार-संक्षेप अनुभाग
यह पाठ हमें याद दिलाता है कि उद्धार का लक्ष्य परमेश्वर के प्रेम और करूणा के साथ है, और हमारी प्रार्थनाएँ उन लोगों के लिये हों जो ईश्वर की करुणा से लाभ पाएँ। पॉल का अभिमुखी उद्देश्य है कि जिज्ञासु और अविश्वासी भी ईश्वर के सत्य को समझें और उद्धार पाएं।
गाइडेड क्रॉस-रेफरेंसे
- एक संदर्भ: कभी-कभी पुराने नियम के अनुसार भी उद्धार की आशा थी, पर नया विधान कहता है कि विश्वास से उद्धार होता है। यह विचार 3:22–24 के साथ संगत है कि विश्वास ही उद्धार की कुंजी है।
- दूसरा संदर्भ: उद्धार के लिए विश्वास उपलब्ध है—याकूब 2:17 के अनुसार निष्क्रिय विश्वास भी वास्तविक नहीं माना जाता जब वह कार्य के बिना रहता है।
- तीसरा संदर्भ: रोमियों 11:26–27 में स्पष्ट है कि उद्धार की योजना सभी को संकेतित करती है—जब लोग विश्वास में लौटते हैं तो उद्धार आता है।
इतिहास से कुछ दृष्टिकोण (संक्षेप)
एलेबर्ट बार्न्स, मैथ्यू हेनरी और एडम क्लार्क जैसी सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों ने दिखाया है कि प्रार्थना और उद्धार की इच्छा केवल व्यक्तिगत फ्यूचर नहीं, बल्कि समुदाय की करुणा और सुसमाचार का प्रसार है। उनके विचारों में यह धारा स्पष्ट है कि यह उद्धार का लक्ष्य सारे विश्व के लिए है और विश्वास के माध्यम से ही इसे पाया जा सकता है।
कड़ियाँ: एक छोटी-सी थीमैटिक सूची
व्यावहारिक takeaway
हम भी स्मरण रखें: उद्धार की अभिलाषा न सिर्फ अपने लिए, बल्कि परिवार, मित्र और यहाँ तक कि उन लोगों के लिए भी है जो अभी अविश्वासी हैं। प्रार्थना के साथ कार्य की इच्छा बनाएं—यही विश्वास का सक्रिय रूप है।
उद्धृत टिप्पणीकारों के संकेत
यदि आप चाहें, तो नीचे के उद्धरणों से प्रेरणा लें (सार): मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से समर्थित विचार मिलते हैं कि उद्धार एक ईश्वर की कृपा है जिसे विश्वास में ढाला जाता है, और यह सभी के लिए खुला है।