Old Testament
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रोमियों 10:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु मैं कहता हूँ, “क्या उन्होंने नहीं सुना?” सुना तो सही क्योंकि लिखा है, “उनके स्वर सारी पृथ्वी पर, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुँच गए हैं।” (भज. 19:4)
रोमियों 10:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 19:4 (HINIRV) »
फिर भी उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूँज गया है, और उनका वचन जगत की छोर तक पहुँच गया है। उनमें उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,

मत्ती 24:14 (HINIRV) »
और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार* किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जाएगा।

रोमियों 1:8 (HINIRV) »
पहले मैं तुम सब के लिये यीशु मसीह के द्वारा अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ, कि तुम्हारे विश्वास की चर्चा सारे जगत में हो रही है।
रोमियों 10:18 पर सूचितार्थ: सभी ने सुना है या नहीं?
मुख्य व्याख्या बिंदु: ईश्वर के वचन का सार्वभौमिक प्रसार एक सत्य है—पृथ्वी के सभी किनारों तक ईश्वर का संदेश पहुँचा है। रोमियों 10:18 में प्रेरित पॉल दर्शाते हैं कि अस्वीकार और अविश्वास के बावजूद प्रभु का घटक-ध्वनि सभी स्थानों तक पहुँच चुकी है, तथा लेख के संदर्भ में यह प्रश्न उठता है कि क्या इजराइल ने इसे सुना है। भज 19:4 के उद्धरण से स्पष्ट होता है कि प्राकृतिक साक्ष्य के द्वारा भी मानव को ईश्वर की महिमा स्मरण हो जाती है, क्योंकि “उनके स्वर सारी पृथ्वी पर, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुँच गए हैं।”
साहित्यिक संदर्भ
पॉल इस उद्धरण के माध्यम से यह बताने का प्रयास करते हैं कि ईश्वर का दयालु आह्वान सभी जातियों के लिए है—प्रेरितों के क्रम में यह एक व्यापक संदेश का अंग है। भज 19:4 में प्रकृति के महान संकेत पीछे नहीं रहते; आकाश और धरती Witness बनते हैं कि ईश्वर की वैज्ञानिकता और नैतिक कानून सभी स्थानों में यथार्थ रूप से उपस्थित है।
नीतिगत महत्व
यह वाक्य यह प्रमाण देता है कि अज्ञानता या चूक के कारण किसी की दोषपूर्ण निर्भरता नहीं बनती; प्रकृति के माध्यम से भी ईश्वर मानवीय विवेक पर प्रत्यक्ष सत्य की पुकार पहुँचाती है। इसलिए सुसमाचार के लिए उत्तरदायित्व विश्वव्यापी है—ऐसे संदेश का प्रसार केवल यह नहीं कि एक क्षेत्र या समुदाय तक सीमित हो।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संयोग
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से तात्पर्य यह है कि ईश्वर का साक्षात्कार, चाहे सीधे वचन से आए या प्राकृतिक साक्ष्यों से, मनुष्य के हृदय को उत्तर देने के लिए प्रेरित करता है।
आध्यात्मिक प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 10:18 यह स्मरण कराता है कि ईश्वर का संदेश सार्वभौमिक है और मानव इतिहास में उसके संकेत हर दिशा में फैलते हैं। फिर भी उत्तरदायित्व यह है कि हम इसे सुनें, समझें और जीवित विश्वास के रूप में ग्रहण करें। यह केवल एक ऐतिहासिक दावा नहीं है, बल्कि आज भी प्रेरित करता है कि हर जगह के लोग ईश्वर के साक्षात्कार को पाएं और प्रभु यीशु में जीवन पाएँ।
महत्वपूर्ण उद्धरण (सार):
“उनके स्वर सारी पृथ्वी पर, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुँच गए हैं।” यह स्पष्ट करता है कि प्रकृति के माध्यम से भी ईश्वर की महिमा और न्याय की चर्चा संभव है, तथा मानवता को सच्चाई तक पहुँचाने के लिए विश्वव्यापी संदेश आवश्यक है।
सूक्ष्म संवाद के लिए चयनित उद्धरण (केवल पठन-उद्धरण के लिए)
यदि आप Henry, Barnes, Clarke में से किसी से संक्षेप उद्धरण देखते हैं, तो ध्यान दें: यह तीनों सार्वजनिक-डॉमेन टिप्पणीकार इस तरह के वाक्यों की दृढ़ता के साथ प्रकृति-आधारित प्रमाण को मानते हैं कि ईश्वर का संदेश इतिहास के हर काल में आवाज देता है—परन्तु वे इसे व्यक्तिगत परिवर्तन के साथ जोड़ते हैं।