Old Testament
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रोमियों 10:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि पवित्रशास्त्र यह कहता है, “जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा।” (यिर्म. 17:7)
रोमियों 10:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 28:16 (HINIRV) »
इसलिए प्रभु यहोवा यह कहता है, “देखो, मैंने सिय्योन में नींव का पत्थर रखा है, एक परखा हुआ पत्थर, कोने का अनमोल और अति दृढ़ नींव के योग्य पत्थर: और जो कोई विश्वास रखे वह उतावली न करेगा। (रोम. 9:33,1 कुरि. 3:11 इफि. 2:20, 1 पत. 2:4,6)

रोमियों 9:33 (HINIRV) »
जैसा लिखा है, “देखो मैं सिय्योन में एक ठेस लगने का पत्थर, और ठोकर खाने की चट्टान रखता हूँ, और जो उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा।” (यशा. 28:16)

1 पतरस 2:6 (HINIRV) »
इस कारण पवित्रशास्त्र में भी लिखा है, “देखो, मैं सिय्योन में कोने के सिरे का चुना हुआ और बहुमूल्य पत्थर धरता हूँ: और जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह किसी रीति से लज्जित नहीं होगा।” (यशा. 28:16)
रोमियों 10:11 पर टिप्पणी (HINIRV)
इस वचन का केंद्र वह विश्वास है जो दिल से किया जाएगा और ईश्वर के सारस्वत वचन के अनुरूप क्रिया-प्रत्यय बन जाएगा। रोमियों केContext में यह पाठ यह स्थापित करता है कि उद्धार का प्रवेश पवित्रशास्त्र के वरदान के अनुसार विश्वास के द्वारा ही खुलता है, न कि किसी व्यक्तिगत कर्म या बाहरी मान-प्रतिष्ठा से। यिर्मयाह 17:7 जैसे पुराने नियम के समान ऊपरी घोषणा में भी वही संदेश है: विश्वास पर नहीं शर्माएगा जो परमेश्वर पर भरोसा रखता है।
पद का परिचय और अध्याय के साथ सम्बन्ध
रोमियों 10 में पौलुस यह दर्शाते हैं कि उद्धार की राह मसीह यीशु के विश्वास को ग्रहण करने में है। पाठ यह कहता है कि जो कोई भी प्रभु पर विश्वास करेगा, वह लज्जित नहीं होगा। यह ընդգलन है कि धर्मी बनने का आधार कर्म नहीं, बल्कि विश्वास है। यिर्मयाह 17:7 के संदर्भ से यह स्पष्ट होता है कि सत्य-पथ पर रहने वाला व्यक्ति परमेश्वर के अभिषेक और उद्धार के कार्य को एक आस्था के साथ स्वीकारता है, जो उसे शर्मिंदा नहीं करती।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अनुशीलन-यात्रा: अन्य बाइबल पाठों से संपर्क
- रोमियों 3:22-23 में कहा गया है कि विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरना संभव है, न कि कर्मों से।
- रोमियों 4:5 में पापी के लिये विश्वास ही धर्मी ठहरना माना गया है; कर्म के बंधन यहाँ गौण होते हैं।
- गलातियों 2:16 में स्पष्ट कहा गया है कि चमत्कारिक पवित्रता मूल्य कर्म से नहीं, बल्कि यीशु मसीह में विश्वास से प्राप्त होती है।
प्रयुक्त विचार और सावधानी
विश्वास का यह पाठ मधुर व प्रेरक है, परन्तु वास्तविक विश्वास केवल मानसिक स्वीकृति नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप परिवर्तन का नाम है। यह लज्जित न होने की वाणी छाती में विश्वास के साथ चलते रहने, धैर्य, आणि असीम भरोसे की मांग करती है। साथ ही यह सतर्क करता है कि लोग नहीं, बल्कि प्रभु के प्रति विश्वास आपको वास्तविक सुरक्षा देता है।
हान-परिणाम और प्रभावपूर्ण अनुप्रयोग
1) स्वयं के उद्धार पर भरोसा रखने के लिए पक्का विश्वास बनाएं—जो भी मसीह पर विश्वास करता है, उसे शर्म नहीं आयेगी।
2) कर्म-प्रधानता से नहीं, प्रभु की गवाही और पवित्र प्रेरणा के मार्ग पर चलें।
3) परीक्षण के समय विश्वास बनाए रखें; परमेश्वर के विश्वासयोग्य वचन पर टिके रहें।
संक्षेप
रोमियों 10:11 यानि यह कि पवित्रशास्त्र यह कहता है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित नहीं होगा। यह संदेश पुराने नियम के संकेत और नए नियम के अनुभव को एक साथ जोड़ता है— उद्धार केवल विश्वास के द्वारा ही मिलता है, न कि किसी बाहरी योग से। यह प्रेरणा देता है कि हमारा जीवन ईमानदार आस्था और परमेश्वर के वचन के अनुरूप किया जाए, ताकि शर्म का नहीं, वरदान का अनुभव हो।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
- क्योंकि विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरना संभव है; कर्म नहीं। इस धारा में ईमानदारी से ईश्वर पर भरोसा ही उद्धार का आधार है।
- मसीह में विश्वास से नई पहचान; पुराने नियम के उद्धारक संकेत, जो कर्मों से पूर्ण नहीं होते।
- पवित्र आत्मा की प्रेरणा से आस्था जीवंत रहे, जिससे दिन-प्रतिदिन का जीवन बदलता है।
नोट: इस प्रस्तुति में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke और एक अन्य समान-प्रशंसित पवित्र-वाचन टिप्पणीकार के विचारों का सारांशीकरण किया गया है; यदि उनके नैतिक विश्लेषण के किसी उक्ति के संक्षेप सन्दर्भ उपलब्ध हों, तो उन्हीं के शब्दों से संकेत दिए गए हैं।