Old Testament
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रोमियों 10:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि मैं उनकी गवाही देता हूँ, कि उनको परमेश्वर के लिये धुन रहती है, परन्तु बुद्धिमानी के साथ नहीं।
रोमियों 10:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 21:20 (HINIRV) »
उन्होंने यह सुनकर परमेश्वर की महिमा की, फिर उससे कहा, “हे भाई, तू देखता है, कि यहूदियों में से कई हजार ने विश्वास किया है; और सब व्यवस्था के लिये धुन लगाए हैं।

रोमियों 9:31 (HINIRV) »
परन्तु इस्राएली; जो धार्मिकता की व्यवस्था की खोज करते हुए उस व्यवस्था तक नहीं पहुँचे।

रोमियों 10:3 (HINIRV) »
क्योंकि वे परमेश्वर की धार्मिकता* से अनजान होकर, अपनी धार्मिकता स्थापित करने का यत्न करके, परमेश्वर की धार्मिकता के अधीन न हुए।
रोमियों 10:2 का मतलब
यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि परमेश्वर अपने लोगों के बारे में “धुन” या उत्साह रखते हैं, पर यह धुन मानव बुद्धि के तरीके से नहीं है। अर्थात् वे सत्य को पाना चाहते हैं, पर उनका तात्कालिक जोर बाहरी दिखावे, परिशुद्धता या परंपरागत मान्यताओं पर अधिक है — दिल से नहीं, बल्कि बुद्धिमानी के एक अलग मानक से।
संदर्भभूमि
रोमियों की चिट्ठी में परमेश्वर का धर्मशास्त्र और उद्धार का संदेश वर्णित है। यहाँ पॉल यह दर्शाते हैं कि यहूदी तथा गैर-यहूदी—दोनों प्रकार के लोग ईमान में अक्सर ठहरते हैं: वे उच्च धारणाओं के साथ “धुन” रखते हैं, लेकिन परमेश्वर के उद्धार के मार्ग को स्वीकारने के लिए उचित आशीर्वाद, विश्वास और उद्धार के मानक से परे रहते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार
संकेतक क्रॉस-रेफरंसेस
1) रोमियों 9:31–32 में पॉल यह दर्शाते हैं कि वे जो नियमानुसार धांधली करते हैं वे अपने मार्ग पर भरोसा रखते हैं; इसका विपरीत सत्य है कि उद्धार विश्वास से आता है।
2) 1 कुरिन्थियों 1:22–25 में कहा गया है कि बुद्धिमान लोग परमेश्वर की विद्या को तुच्छ समझते हैं, पर पीछे हटकर भी उद्धार का मार्ग सहज रूप से दिखता है।
3) याकूब 1:22 में कहा गया है कि केवल शब्दों को न मानो, वरन् उन्हें व्यवहार में लाओ; तभी धुन सही दिशा लेती है।
छोटा अनुशासनात्मक निष्कर्ष
हम कैसे प्रतिक्रिया दें?
एक संक्षेप निष्कर्ष
रोमियों 10:2 हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर अपनी गवाही से सच में प्रभावित होते हैं, पर यह प्रभाविती उसकी धुन बुद्धिमानी के पारंपरिक मापदंडों से नहीं, बल्कि विश्वास की सच्ची प्रार्थना और उद्धार के मार्ग को ग्रहण करने से आता है।
मूल उद्धरणों के संकेत
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के किसी सीधे उद्धरण को जानते हैं, तो उन्हें संक्षेप में प्रस्तुत किया जा सकता है, पर यहाँ उनके उद्धरण पूर्ण वाक्यों के रूप में शामिल नहीं हैं। नीचे उनके प्रवचनों से मिली सामान्य समझ इस विचार को मजबूत करती है कि धुन किसी बाहरी प्रदर्शन पर नहीं, वरन् परमेश्वर के हृदय परिवर्तन पर निर्भर है।