Old Testament
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रोमियों 10:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कि यदि तू अपने मुँह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। (प्रेरि. 16:31)
रोमियों 10:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 12:8 (HINIRV) »
“मैं तुम से कहता हूँ जो कोई मनुष्यों के सामने मुझे मान लेगा उसे मनुष्य का पुत्र भी परमेश्वर के स्वर्गदूतों के सामने मान लेगा।

प्रेरितों के काम 16:31 (HINIRV) »
उन्होंने कहा, “प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।”

फिलिप्पियों 2:11 (HINIRV) »
और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।
रोमियों 10:9 परिप्रेक्ष्य में व्याख्या
उस समय रोम के ईसाई समुदाय को प्रेरित करने के लिए पॉल ने यह स्पष्ट निर्देश दिए कि उद्धार व्यक्तिगत विश्वास और मुख से ईसा को प्रभु स्वीकार करने के ठोस कदम से आता है। verse में बताया गया है कि यदि कोई अपने मुँह से यीशु को प्रभु मानकर अंगीकार करे और अपने दिल से परमेश्वर पर विश्वास करे कि ईसा मरे हुओं में से जिलाया गया है, तो उद्धार निश्चित है। प्रेरित से प्रेरित शास्त्र, विशेषकर प्रेरितों के काम 16:31, एक समान सार देता है कि विश्वास के साथ उद्धार की राह सरल और स्पष्ट है।
मुख्य अर्थ
यह पंक्ति उद्धार की आवश्यक शर्तों को सुस्पष्ट करती है: विश्वास का हृदय-निष्ठ और मौखिक अभिवादन। दिल से विश्वास और मुख से अभिवेदन—दोनों एक साथ काम करते हैं। परमेश्वर के उद्धार की योजना के अनुसार यीशु को प्रभु मानना, और यह मान्यता वह है जो मानव को धार्मिक कर्मों से ऊपर उठाकर व्यक्तिगत क्षमा और नई जीवन की ओर ले जाती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पद-आख्यान
— प्रेरितों 16:31: “यही विश्वास का सार्वजनिक उद्घोष है, जो उद्धार की राह खोल देता है।” यह संदर्भ बताता है कि निजी विश्वास के साथ सार्वजनिक सत्यापन भी उद्धार का हिस्सा है।
— तीतुस 3:5: इस बात की पुष्टि कि उद्धार कृपा से आता है, कर्मों से नहीं—परन्तु विश्वास के परिणामस्वरूप नई जीवनशैली बनती है।
प्रायोगिक विचार
1) अपने जीवन के निर्णयों में यीशु को प्रभु मानना एक स्पष्ट परिचित कदम है जो दैनिक व्यवहार और विचारधारा को बदल सकता है।
2) उद्धार की पुष्टि व्यक्तिगत अंगीकार से शुरू होकर समुदाय-जीवन में बाँटने तक जाती है—पब्लीकProfession, प्रेरणा, और सेवाभाव बढ़ती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
• रोम 3:28 — उद्धार का कारण केवल विश्वास है, कर्म नहीं; यह पंक्ति इसे समृद्ध करती है कि मुँह से प्रभु स्वीकारना विश्वास का प्रकटन है।
• 1 कुरिन्थ 12:3 — यीशु को प्रभु कहकर बुलाने से मार्गदर्शन और प्रेरणा मिलती है; आत्मा से प्रेरित उद्घोष उद्धार की दिशा देता है।
• एफिसियों 2:8-9 — उद्धार अनुग्रह द्वारा होता है, ताकि हम अपनेadur न कर सकें; यह विश्वास का परिणाम है, न कर्मों का।
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 10:9 हमें यह बताता है कि उद्धार एक जीवन-घटना है जिसमें दिल का विश्वास और मुख से उद्घोष संयुक्त होते हैं। यीशु को प्रभु मानकर उसका मरे हुओं में से जिलाया जाना मानना, परमेश्वर की शक्ति पर विश्वास प्रकट करता है और उद्धार का स्थिर रास्ता खोलता है।
ईतिहासिक टीका संदर्भ से संकेत:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण: “यदि तू अपने मुँह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे...” जैसी पंक्ति के अनुरोध पर, नीचे मुख्य विचार प्रस्तुत हैं: Henry कहते हैं कि विश्वास का उद्घोष और प्रतिज्ञा संघर्षों में भी दृढ़ रहता है; Barnes उद्धार के लायक बनने के लिए कर्मों के बजाय विश्वास को महत्व देते हैं; Clarke इसे निजी परिवर्तन और उद्धार की स्पष्ट बात के रूप में देखते हैं।