Old Testament
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रोमियों 10:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु सब ने उस सुसमाचार पर कान न लगाया। यशायाह कहता है, “हे प्रभु, किस ने हमारे समाचार पर विश्वास किया है?” (यशा. 53:1)
रोमियों 10:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 53:1 (HINIRV) »
जो समाचार हमें दिया गया, उसका किसने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ*? (यूह. 12:38, रोमि 10:16)

यूहन्ना 12:38 (HINIRV) »
ताकि यशायाह भविष्यद्वक्ता का वचन पूरा हो जो उसने कहा: “हे प्रभु, हमारे समाचार पर किस ने विश्वास किया है? और प्रभु का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?” (यशा. 53:1)

रोमियों 3:3 (HINIRV) »
यदि कुछ विश्वासघाती निकले भी तो क्या हुआ? क्या उनके विश्वासघाती होने से परमेश्वर की सच्चाई व्यर्थ ठहरेगी?
रोमियों 10:16 का संदेश और संदर्भ
पद का मुख्य विचार यह है कि प्रभुसत्ता के भीतर यीशु की सुसमाचारता तक पहुँचना आसान नहीं रहा। रोमियों के पाठ में पवित्र आत्मा के प्रभाव और विश्वास के लिए प्रेरणा है, परन्तु जन सामान्य ने इस संदेश को मान नहीं दिया। यहाँ यशायाह के उद्धरण के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि यह निश्चय ही भविष्यवाणी के अनुरूप था कि प्रभु के समाचार पर मनुष्य का विश्वास कम रहा है।
केन्द्रित अर्थ
यहूदी समाज में यहूदियों और गैर-यहोदियों दोनों के लिए सुसमाचार का आकर्षण है, परन्तु निष्ठापूर्ण विश्वास की कमी एक सार्वजनिक समस्या बनी रही। “यशायाह कहता है” से उद्धृत संदेश, विश्वास की कमी को एक सामूहिक समस्या के रूप में पेश करता है, न कि केवल व्यक्तिगत असफलता के रूप में। यह संकेत देता है कि उद्धार की योजना ईश्वर की कृपा के साथ आई है, परन्तु लोगों के हृदय उसे ग्रहण नहीं कर पाए।
मुख्य विषय (two to three themes)
संबंधित पाठ (Cross-references) और उनका संक्षिप्त उल्लेख
इन संदर्भों में क्रमशः उद्धार की योजना और विश्वास की प्रकृति का पुनः परीक्षण मिलता है: 53:1 में भविष्यवाणी के समय से जुड़ा अविश्वास, रोमियों में निष्कर्ष जो मानते हैं कि विश्वास ईश्वर की कृपा से आना है, और यीशु के समय की प्रतिक्रिया जो विश्वासी/अविश्वासी समूह को दिखाती है।
व्यावहारिक विचार
हम अपने समय में कैसे प्रतिक्रिया दें? सुसमाचार के प्रति प्रतिक्रियाएँ विभाजित हो सकती हैं, पर हमें आत्म-निरीक्षण करना चाहिए: क्या हमारे हृदय में ईश्वर की कृपा के लिए खुलापन है? क्या हम प्रचार के संदेश को अपने जीवन का मार्गदर्शक मानते हैं? विश्वास के लिए खुला पूर्वाग्रह रखना, और कृपाशीलता से दूसरों के लिए मार्ग बनना वास्तव में उद्धार के पालन का भाग है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह के उद्धरण के आलोक में रोमियों 10:16 यह याद दिलाता है कि समाचार का प्रचार हुआ है, पर बहुधा मानव हृदय उसे स्वीकार नहीं करता। यह हमारे लिए चुनौती है कि कैसे हम विश्वास को अपना जीवन केन्द्र बनाएं और दूसरों के लिये भी रास्ता बनें, ताकि उद्धार की कृपा उन तक पहुँचे जो इसे मानते हैं।
नोट: इस लेख के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विश्लेषण से प्रेरणा मिलती है। उनके दृष्टिकोण का संक्षेप इन बिंदुओं में समाहित है—परोपकार, विश्वास और उद्धार की सार्वभौमिकता। “Faith comes by hearing” जैसे मूल विचार पर वे अक्सर चर्चा करते हैं, किन्तु यहाँ उद्धरण पूर्ण पाठ के बजाय उनका प्रभावीय सार लिया गया है।