Old Testament
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रोमियों 10:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर यशायाह बड़े साहस के साथ कहता है, “जो मुझे नहीं ढूँढ़ते थे, उन्होंने मुझे पा लिया; और जो मुझे पूछते भी न थे, उन पर मैं प्रगट हो गया।”
रोमियों 10:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 65:1 (HINIRV) »
जो मुझको पूछते भी न थे वे मेरे खोजी हैं; जो मुझे ढूँढ़ते भी न थे उन्होंने मुझे पा लिया, और जो जाति मेरी नहीं कहलाई थी, उससे भी मैं कहता हूँ, “देख, मैं उपस्थित हूँ।”

रोमियों 9:30 (HINIRV) »
तो हम क्या कहें? यह कि अन्यजातियों ने जो धार्मिकता की खोज नहीं करते थे, धार्मिकता प्राप्त की अर्थात् उस धार्मिकता को जो विश्वास से है;

मत्ती 22:9 (HINIRV) »
इसलिए चौराहों में जाओ, और जितने लोग तुम्हें मिलें, सब को विवाह के भोज में बुला लाओ।’
रोमियों 10:20 पर विवेचनात्मक टिप्पणी
पृष्ठभूमि: रोमियों 9–11 पैत्रिक चुनाव और गैर-यहोदा के लिए भी गियह मानवीय परमेश्वर की कृपा का उद्देश्य स्पष्ट करते हैं। 罗马书 10 अध्याय में यह दर्शाया गया है कि विश्वास के विषय में कर्तव्य और स्मरणीयता कैसे पूरी तरह परमेश्वर के उद्धारकारी योजना के साथ जुड़ते हैं। रोमियों 10:20 में यशायाह के उद्धरण के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर बारंबार ऐसे लोगों के लिए खुला है जो पहले चुप रहे या जिन्हे लोग समझ नहीं पाते थे, वे भी उसके समक्ष पहुँचे।
मुख्य विचार
यह पद एक विरोधाभास को उजागर करता है: परमेश्वर ने उन पर भी अपना प्रकाश डाला जो उसे ढूँढ़ते नहीं थे, और जिन्होंने उसे खोजने का प्रयत्न नहीं किया, वे भी उसके सामने पहुंचे। इसका आशय यह है कि उद्धार की योजना सभी के लिए खुली है, भले ही यह खोज मानवीय प्रयासों के प्रति रूढ़ हो या पूर्व धारणाओं से परे हो।
दो प्रमुख थीम
संबद्ध पाठ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
कथनात्मक विश्लेषण
यशायाह के उद्धरण का प्रयोग रोमियों में यह बताने के लिए किया गया है कि गैर-यहोदा भी उसने पाया है जो उन्हें नहीं ढूँढ़ते थे। इससे पुरानी अपेक्षाओं के बाहर भी परमेश्वर की कृपा बनावट साधारण नहीं रहती; उद्धार के प्रसंग में मानव की प्रतिक्रिया से अधिक परमेश्वर की योजना की व्यापकता महत्व रखती है।
व्यावहारिक विचार
संक्षिप्त समरी
रोमियों 10:20 यह याद दिलाता है कि परमेश्वर की कृपा व्यापक है और उसे ढूँढ़ न पाने पर भी वह दिखाई देता है। यह दोनों दिशाओं से उद्धार की सार्वभौमिकता का संकेत है—जो लोग उसे पूछते हैं वे पाते हैं, और वे जो नहीं पूछते भी उसके प्रकाश से चकित होते हैं।
ऐतिहासिक रूप से उद्धरणों का संकलन
नीचे Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरणों के छोटे-छोटे अंश आवश्यकतानुसार उल्लेखित हैं:
“जो मुझे नहीं ढूँढ़ते थे, उन्होंने मुझे पा लिया; और जो मुझे पूछते भी न थे, उन पर मैं प्रगट हो गया।” — मूल भाव यही है कि उद्धार की निशुल्क कृपा और खोज दोनों के लिए खुली है।
नोट: उपरोक्त उद्धरण केवल सारांशित रूप में उद्धृत हैं; पूर्ण पाठ के लिए डेवलपर-स्तर पर सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संकलन देखें।