Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीरोमियों 10:5 बाइबल पद की व्याख्या
रोमियों 10:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि मूसा व्यवस्था से प्राप्त धार्मिकता के विषय में यह लिखता है: “जो व्यक्ति उनका पालन करता है, वह उनसे जीवित रहेगा।” (लैव्य. 18:5)
रोमियों 10:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 10:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

लैव्यव्यवस्था 18:5 (HINIRV) »
इसलिए तुम मेरे नियमों और मेरी विधियों को* निरन्तर मानना; जो मनुष्य उनको माने वह उनके कारण जीवित रहेगा। मैं यहोवा हूँ। (मत्ती 19:17, लूका 10:28, रोम 7:10, रोम 10:5 गला 3:12)

नहेम्याह 9:29 (HINIRV) »
और उनको चिताता था कि उनको फिर अपनी व्यवस्था के अधीन कर दे। परन्तु वे अभिमान करते रहे और तेरी आज्ञाएँ नहीं मानते थे, और तेरे नियम, जिनको यदि मनुष्य माने, तो उनके कारण जीवित रहे, उनके विरुद्ध पाप करते, और हठ करके अपना कंधा हटाते और न सुनते थे।

यहेजकेल 20:13 (HINIRV) »
तो भी इस्राएल के घराने ने जंगल में मुझसे बलवा किया; वे मेरी विधियों पर न चले, और मेरे नियमों को तुच्छ जाना, जिन्हें यदि मनुष्य माने तो वह उनके कारण जीवित रहेगा; और उन्होंने मेरे विश्रामदिनों को अति अपवित्र किया*। “तब मैंने कहा, मैं जंगल में इन पर अपनी जलजलाहट भड़काकर इनका अन्त कर डालूँगा।
रोमियों 10:5 पर शोध का मुख्य बिंदु
मुख्य निष्कर्ष: शास्त्र के अनुसार धार्मिकता की राह वचन और निर्भरता पर निर्भर है। यहाँ मूसा अधिनियम से प्राप्त धार्मिकता की बात वर्णित है—जो कर्म-आधारित व्यवस्था को स्थिर बनाती है—और उसे न कि यीशु मसीह के द्वारा दी गई नई व्यवस्था से विच्छेदित मानना टूटे हुए नियमों का संकेत देता है। पवित्र शास्त्र यह दिखाता है कि धर्मी केवल विश्वास और कृपा पर टिके रहते हैं, न कि कर्म-आधारित व्यवस्था पर, ताकि उद्धार जीवन के साथ जुड़ सके।
साहित्यिक संदर्भ: साहित्यिक पथ और वजन
पद: रोमियों 10:5 उद्धृत करता है कि मूसा व्यवस्था से प्राप्त धार्मिकता के विषय में लिखा है—जो लोग उसका पालन करते हैं, वे जीवित रहते हैं (लेवि. 18:5)। यहाँ पवित्र लेखक यह स्पष्ट करता है कि व्यवस्था के अनुसार धार्मिकता वह है जिसे लोग कर्तव्यों के अनुसार पूरा करने से प्राप्त करते हैं। परंतु रोमियों 9–11 के बड़े सन्दर्भ में, लेखक यह बताता है कि यह व्यवस्था एक समग्र तस्वीर है जिसे पुरानी व्यवस्था के लोग उस समय समझ नहीं पाए थे, और उद्धार का मुख्य स्रोत विश्वास है।
आत्मिक और ठोस संदेश: हकीकत की तुलना
केवल कर्मों से धार्मिकता संभव नहीं है; लोग व्यवस्था के अनुसार कर्म कर भी अपने आप को perfect नहीं कर सकते। नए विवेक में, विश्वास से मिलन और यौन-निष्ठा से प्राप्त राहत मिलती है। यह पवित्रता का मार्ग है जिससे मसीही जीवन की नई वास्तविकता उभरती है।
पाठ्य-आध्यात्मिक अर्थ और चर्चित टिप्पणियाँ
यहाँ तीन प्राचीन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार मिलते हैं, जो इस पाठ को धार देते हैं:
Cross-References और उनके तात्पर्य
1) गलातियों 3:12–13: कर्म-आधारित नियमन के बजाय faith की वसूली का तत्व। संक्षेप में: धर्म की राह विश्वास पर टिकी है, बंधन पर नहीं।
2) रोमियों 3:28: न केवल नियम-पालन से नहीं, बल्कि विश्वास से धर्मी ठहरना।
3) जेम्स 2:24: कर्म विश्वास की पुष्टि करते हैं; अतः व्यावहारिक जीवन में विश्वास के प्रमाण दिखते हैं।
Reflection के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 10:5 हमें स्मरण कराता है कि व्यवस्था एक विशिष्ट धार्मिकता की परंपरा है जो कर्म पर निर्भर है, पर ईश्वर की उद्धारकारी योजना विश्वास और कृपा के माध्यम से पूर्ण होती है। यह पाठ पवित्र जीवन के लिए एक समृद्ध संतुलन प्रस्तुत करता है: कर्तव्यशीलता और विश्वास एक साथ चलें, ताकि उद्धार और दिव्य जीवन का वास्तविक अनुभव मिल सके।
शब्द-चयनित उद्धरण
शास्त्रीय टिप्पणियों के संक्षेप में, नीचे के विचार सीधे पाठ के प्रकाश में मिलते हैं:
“धर्म माँगता है कि मानिसक कर्म-पालन से धार्मिकता प्राप्त हो, परन्तु वास्तविक उद्धार विश्वास से ही आता है।” — संक्षेप में मानक टिप्पणी-रेखांकन