Old Testament
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रोमियों 10:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है।
रोमियों 10:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 3:2 (HINIRV) »
मैं तुम से केवल यह जानना चाहता हूँ, कि तुम ने पवित्र आत्मा को, क्या व्यवस्था के कामों से, या विश्वास के समाचार से पाया? (गला. 3:5, प्रेरि. 15:8-10)

गलातियों 3:5 (HINIRV) »
इसलिए जो तुम्हें आत्मा दान करता और तुम में सामर्थ्य के काम करता है, वह क्या व्यवस्था के कामों से या विश्वास के सुसमाचार से ऐसा करता है?

कुलुस्सियों 3:16 (HINIRV) »
मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने-अपने मन में कृतज्ञता के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
रोमियों 10:17 पर केंद्रित व्याख्या
मुख्य interpretive बिंदु: विश्वास का उत्पन्न होना सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है। इसका तात्पर्य है कि उद्धार का मार्ग दिल में विश्वास के प्रचंड घटक के रूप में तब खुलता है जब परमेश्वर का सुसमाचार कानों तक पहुँचकर हमारे विवेक और इच्छा को जागृत करता है। सुनना यहाँ केवल शब्दों को कान से छूना नहीं है, बल्कि मसीह के संदेश को स्वीकार कर आस्था की दिशा अपनाना है।
साहित्यिक संदर्भ ( Literary Context )
पदểnRomans के अध्याय 9–11 में पॉल यह स्पष्ट करते हैं कि विश्वासी होने के लिए परमेश्वर का क्रम और यहूदी-जातीयता का भेद प्रमुख बाधाएँ कैसे विफल होती हैं। 10:17 का बयान दर्शाता है कि विश्वास का क्रिया-प्रणालिक स्रोत सुना जाना है—यही कारण है कि ईश्वर की ओर से भेजा गया सुसमाचार पुराने नियम के भावनात्मक और भविष्यसूचक पथ को पूरा करता है। नीचे के épisodes में पॉल दिखाते हैं कि कैसे “सुनना” द्वार है जिसने विश्वास को जन्म दिया और उसे क्रियात्मक रूप से कार्यान्वित किया।
धर्मशास्त्रीय महत्व (Theological significance)
यह वाक्य प्रकाश डालता है कि विश्वास मानव प्रतीक्षा नहीं, बल्कि पवित्र कृपा का परिणाम है जिसे शब्द-प्रकाशन के माध्यम से प्रेषित किया गया। मसीह के वचन—जो शास्त्रों में पूर्णता पाते हैं—विश्वास की पूर्व-उत्पत्ति बनते हैं। इसलिए उद्धार के लिए मानवीय प्रतिक्रिया—विश्वास—केलिये सुनना आवश्यक है, क्योंकि ग्रहणशील हृदय बिना सुने भी कुछ नहीं बन सकता।
पूर्ववर्ती टिप्पणियाँ (Cross-references) और उनका संक्षेप व्याख्या
पाठ के लिए कुछ प्रमुख प्रश्न (Questions for reflection)
पुराने देनों से नवीन संदर्भ (Integrated insights)
— मैथ्यू हैनरी और एल्बर्ट बार्न्स के टिप्पणीकारक सूत्रों के अनुसार, विश्वास एक क्रिया है जो ईश्वर के वचन के प्रभाव से उभरता है, यह व्यक्ति की अंतरात्मा में नया जन्म देता है। एक प्रमुख कथनयह है कि सुसमाचार की सरलता और स्पष्टता विश्वास को उत्पन्न करने में समर्थ है।
— एडम क्लार्क ने भी दिखाया है कि सुनना एक सक्रिय receptive प्रक्रिया है जो धर्मी निर्णय तक पहुँचाती है; जब हृदय खुला होता है, तब परमेश्वर का संदेश विश्वास में परिणत होता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष (Conclusion)
रोमियों 10:17 हमें याद दिलाता है कि उद्धार का रास्ता स्पष्ट है: ईश्वर के सुसमाचार को सुना जाए, फिर आस्था जन्मे। सुनना, वही प्रवेशद्वार है जो मसीह के वचन को हमारे जीवन-शैली और निर्णयों में परिणत कर देता है। हमारी विश्वास यात्रा तब मजबूत होती है जब शब्द, हृदय और आचरण एक साथ चलते हैं।
नोट: नीचे उद्धृत सीधे पाठ से जुड़ी सटीक पंक्तियाँ केवल उन टिप्पणीकारों से सीधे उद्धरण के तौर पर शामिल हैं जिनके सार्वजनिक-डोमेन आलेख उपलब्ध हैं। जहां संभव हो, हमने उनके सार को संदर्भित किया है, परन्तु पूर्ण पाठ का पुनरुत्पादन नहीं किया गया है।