सपन्याह 1:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

आमोन के पुत्र यहूदा के राजा योशिय्याह के दिनों में, सपन्याह के पास जो हिजकिय्याह के पुत्र अमर्याह का परपोता और गदल्याह का पोता और कूशी का पुत्र था, यहोवा का यह वचन पहुँचा

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सपन्याह 1:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

वचन का संछेप और पृष्ठभूमि

योशियाह के शासन के दहलीज़ पर सपन्याह नामक नबी से ईश्वर का वचन पहुंचा। यहोहूदा के राजा अम्मरीयाह के पुत्र अमर्याह के परपोते, गदल्याह के पोते और कूशी के पुत्र सपन्याह की ओर आया—यानी एक ऐसे समय में जब यरूशलेम के आस-पास के राज्यों में धार्मिक अवहेलना, पाप और सामाजिक कुत्सितता बढ़ रही थी। इस वचन का संदर्भ यह है कि परमेश्वर अपने लोगों से और उनके समाज से जुड़ा रहता है, और जब वे आत्म-ग़लती में डूबते हैं, तब न्याय का दिन निकट आता है।

मुख्य अर्थ

यहोवा की ओर से सपन्याह को दिया गया यह संदेश यह बताता है कि परमेश्वर कोण-कोण से सत्ता और प्रशासन पर निगाह रखता है, और संदिग्ध आचरण, पापपूर्ण आचरण, और आस्था के फंदों में फंसे समाज के लिए ऊँचा संकेत है कि दिव्य न्याय आने वाला है। यह वचन राजा-यश से नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और सामाजिक न्याय के अनुरोध से जुड़ा है।

मुख्य विषय

  • धार्मिक और सामाजिक भ्रष्टाचार पर नारायणी चेतावनी: यहूदा और उसके आस-पास के राज्यों में परमेश्वर की महिमा और आदर्श से विचलन दिखना।
  • न्याय का दिन निकट: पाप के परिणामस्वरूप आने वाला दंड और सतर्कता की आवश्यकता।
  • दया और बुलाहट की संभावना: निष्क्रियता के बजाय पथ परिवर्तन के लिए भगवान का आह्वान।

संबंधित बाइबिल पाठ

1) मत्ती 3:12 और समय-समय पर अन्य प्रोफेटिक संदेश जहां न्याय के दिन की चर्चा मिलती है — ये याद दिलाते हैं कि परमेश्वर का क्रोध पाप के विरुद्ध है, परन्तु उद्धार की आशा भी साथ है।

2) जोशया 1 और मन्ना 2 के संदर्भ जहां सामाजिक-अनुशासन और धर्म के वास्तविक अभ्यास की मांग स्पष्ट है।

3) यह सबसे पहले भविष्यवाणी के रूप में यहूदियों के हृदय परिवर्तन के बारे में संकेत देता है, जो नए नियम की भी प्रेरणा बनती है।

व्यावहारिक विचार

अपने जीवन में हमें यह समझना चाहिए कि बाह्य ऐश्वर्य या राजसी प्रतिष्ठा के पीछे नहीं, परमेश्वर के सामर्थ्य और सत्य के अनुरूप आचरण का मूल्य है। समाज में अन्याय, पाप और असत्य के प्रति चुप रहने से भविष्य के दंड को रोकना संभव नहीं। आत्म-चेतना, सत्य-पालन और गरीबों के प्रति दया का अभ्यास ही हमारे दिन-प्रतिदिन के व्यवहार का मूल हो सकता है।

पुनरावलोकन और समापन

sumpन्याह 1:1 का यह प्रवेशक वचन हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर की दृष्टि समाज के छोटे-छोटे कर्म तक जाती है—जहाँ पाप है वहाँ न्याय का दिन भी निकट है। एक सच्ची भक्ति और सामाजिक न्याय के साथ रहने की प्रेरणा נתपा करती है कि हम सहज विश्वास के साथ ईश्वर के पथ पर रहें और समाज में ईमानदार, दयालु आचरण बनाए रखें।

संदर्भ उद्धृत विचार

यहां Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कुछ संक्षिप्त, सार्वजनिक-डोमेन विचार हैं जिनसे पाठ की समझ में मदद मिलती है:

• "God will not overlook the sins of Judah and Jerusalem; His word comes to expose, rebuke, and call to repentance." (एंथोलॉजी संदर्भ)

• "Prophecy often begins with denunciation, but it moves toward repentance and restoration." (ए. क्लार्क)

नोट: नीचे दिये गए उद्धरण पूर्ण वाक्य नहीं हैं; केवल संदर्भ के लिए उल्लेखित हैं और पूर्ण पाठ सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से लिया गया संकलन है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

सपन्याह 1:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 1:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 1:2 (HINIRV) »
यहोवा का वचन उसके पास आमोन के पुत्र यहूदा के राजा योशिय्याह के दिनों में उसके राज्य के तेरहवें वर्ष में पहुँचा।

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2 इतिहास 34:1 (HINIRV) »
जब योशिय्याह राज्य करने लगा, तब वह आठ वर्ष का था, और यरूशलेम में इकतीस वर्ष तक राज्य करता रहा।

2 राजाओं 22:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 राजाओं 22:1 (HINIRV) »
जब योशिय्याह राज्य करने लगा, तब वह आठ वर्ष का था, और यरूशलेम में इकतीस वर्ष तक राज्य करता रहा। और उसकी माता का नाम यदीदा था जो बोस्कतवासी अदायाह की बेटी थी।

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