Old Testament
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सपन्याह 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जो यहोवा के पीछे चलने से लौट गए हैं, और जिन्होंने न तो यहोवा को ढूँढ़ा, और न उसकी खोज में लगे, उनको भी मैं सत्यानाश कर डालूँगा।”
सपन्याह 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 1:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 2:13 (HINIRV) »
क्योंकि मेरी प्रजा ने दो बुराइयाँ की हैं*: उन्होंने मुझ जीवन के जल के सोते को त्याग दिया है, और, उन्होंने हौद बना लिए, वरन् ऐसे हौद जो टूट गए हैं, और जिनमें जल नहीं रह सकता। (यिर्म. 17:13)

यशायाह 1:4 (HINIRV) »
हाय, यह जाति पाप से कैसी भरी है! यह समाज अधर्म से कैसा लदा हुआ है! इस वंश के लोग कैसे कुकर्मी हैं, ये बाल-बच्चे कैसे बिगड़े हुए हैं! उन्होंने यहोवा को छोड़ दिया, उन्होंने इस्राएल के पवित्र को तुच्छ जाना है! वे पराए बनकर दूर हो गए हैं।

यिर्मयाह 2:17 (HINIRV) »
क्या यह तेरी ही करनी का फल नहीं, जो तूने अपने परमेश्वर यहोवा को छोड़ दिया जो तुझे मार्ग में लिए चला?
सपन्याह 1:6 का उद्देश्य और पाठ-परिप्रेक्ष्य
पंक्ति दिखाती है कि यहोवा उन लोगों पर कड़ाई से एक्शन लेता है जो यहोवा के पीछे लौट कर नहीं आते, न उसे खोजते हैं, न उसकी खोज में लगे रहते हैं। यह पाठ एक निर्णायक पठन प्रस्तुत करता है: परमेश्वर के साथ विश्वसनीय सन्धि-बन्धन से भटका हुआ जीवन संहार के डर को आमंत्रित करता है। यह बोध न केवल ऐतिहासिक जातीय संदर्भ का वार्तालाप है, बल्कि हर आयु के विश्वासियों के लिए चेतावनी है कि ईश्वर के पीछे न लौटना प्रगति नहीं, बल्कि पतन का संकेत है।
पाठ-संदेह और साहित्यिक संदर्भ
सपन्याह पुस्तक में क्रोधित ईश्वर का दिन, न्याय-सूचना और प्रतीक्षा की अवधि एक साथ मिलकर नीतिशास्त्र का वह भाग बनाती है जिसमें इशारा है—क्या यहोवा के पथ से हटना एक आंतरिक गिरावट है या सामाजिक-नैतिक अपमान? यहाँ लेखक यह स्पष्ट करता है कि जो यहोवा के पीछे नहीं चलते, न उसे ढूंढ़ते हैं, उनके लिए विनाश अपरिहार्य है। यह विचार पुराने नियम के दायरे में कट्टर चेतावनी के रूप में आता है, जिसमें भक्ति-व्यवस्था से विमुख रहने के परिणाम उजागर होते हैं।
ईश्वर-गुण और प्रेरित संकेत
यहाँ एक बड़े दृश्य में एक पाठक ग्रहण करता है कि परमेश्वर का खोज-कार्य एक सतत जीवनशैली है—इनकी खोज में लगे रहना, उनकी पथ पर चलना; न कि आराम से भटकना। यहोहवा के पीछे लौटना, उसका क्रम-भंग, पुर्नस्थापना के मार्ग को बंद कर देता है। यह संदेश यह भी सशक्त बनाता है कि Θεός के लोग—चाहे वे एक समुदाय हों या व्यक्तिगत निर्णय—की प्राथमिकता उसी के आत्म-आशीर्वाद और ध्वनि निर्देशों की होनी चाहिए।
पवित्र उद्धरण-आधार से अनुभागी विचार
यह श्लोक हल्के-फुल्के शब्दों में नहीं, बल्कि चेतावनी और स्मरण की गूंज के साथ प्रस्तुत है। पहले से tira के साथ संहिता बनती है: जो यहोवा के पीछे चलना छोड़ देता है, वह अपने जीवन के उद्देश्य और सुरक्षा से कट जाता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनसे जुड़े विचार
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के साथ जुड़ाव बनाए रखना जीवन-उद्देश्य है और दूरी बनाना खतरे में डाल देता है।
आत्म-चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस श्लोक के माध्यम से स्पष्टरूप से कहा गया है: यहोवा के पीछे लौटना और उसकी खोज से विमुख रहना एक चेतावनी है—जिस दिशा में जीवन चल रहा है, उसी के परिणाम स्वरूप सत्यानाश या पुनःस्थापना संभव है। विश्वासियों के लिए यह एक स्मरण- पत्र है कि परमेश्वर की राह पर सचेत और सतत कदम बढ़ाते रहना आवश्यक है।
एतिहासिक-प्रेरक विचार: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समेकित विचारों से स्पष्ट होता है कि यहोवा का दंड और उद्धार दोनों क्रमशः न्याय और करूण के साथ चलते हैं। यहूदी-खण्ड के पंक्तियों में उनका यह उक्ति-संकेत मिलता है कि परमेश्वर की खोज में निरंतरता बनाये रखना ही जीवन-यात्रा की कुंजी है।
टीका-सार: यह श्लोक केवल एक दंड की घोषणा नहीं, बल्कि जीवन-निर्देशन भी देता है—यहोवा के पीछे चलना, उनकी खोज में लगा रहना, निश्चय ही जीवन का सुरक्षा-तंत्र है।
नोट: किसी भी प्रत्यक्ष उद्धरण में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण वाक्य पूरे नहीं दिये गये; केवल उनके विचारों के संदर्भ-आधार के रूप में संक्षेप में निहित है।