Old Testament
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सपन्याह 1:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा का भयानक दिन निकट है, वह बहुत वेग से समीप चला आता है; यहोवा के दिन का शब्द सुन पड़ता है, वहाँ वीर दुःख के मारे चिल्लाता है। (प्रका. 6:17)
सपन्याह 1:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 1:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 30:3 (HINIRV) »
क्योंकि वह दिन अर्थात् यहोवा का दिन निकट है; वह बादलों का दिन, और जातियों के दण्ड का समय होगा।

योएल 2:11 (HINIRV) »
यहोवा अपने उस दल के आगे अपना शब्द सुनाता है, क्योंकि उसकी सेना बहुत ही बड़ी है; जो अपना वचन पूरा करनेवाला है, वह सामर्थी है। क्योंकि यहोवा का दिन बड़ा और अति भयानक है; उसको कौन सह सकेगा? (प्रका. 6:17)

सपन्याह 1:7 (HINIRV) »
परमेश्वर यहोवा के सामने शान्त रहो! क्योंकि यहोवा का दिन निकट है; यहोवा ने यज्ञ सिद्ध किया है, और अपने पाहुनों को पवित्र किया है।
सपन्याह 1:14 — तत्काल और भयावह दिन का उद्घोष
यह पाठ सपन्याह की पुस्तक के शीर्षक और संदर्भ के भीतर उस समय के नीयमित न्याय के दृश्य को उद्घाटित करता है जब यहोवा का दिन निकट है। पवित्र शास्त्र यह बताता है कि वह दिन तेजी से आता है और हर शत्रु-स्थिति को चौंका कर ले जाएगा; बड़े संकट, धीर-गर्व और पाप पर कठोर दंड के साथ यह दिन आयेगा।
ईश्वर के मामले में यह दिन क्या बताता है?
यहोवा का दिन एक ऐसी महान तड़प है जो पापियों के लिए न्याय को स्पष्ट करता है—एक उद्घोष, जिसमें प्रभु के पवित्र न्याय की मांग और उसकी त्वरित क्रिया दोनों सामने आते हैं। यह संदेश केवल दंड का नहीं, बल्कि विश्वास और पवित्रता के लिए एक चेतावनी भी है: वे जो धर्म-मूलक चुप्पी व वैतरणी की चढ़ाई के बीच जीते हैं, वे इस दिन चिल्लाहट सुनेंगे।
शब्दार्थ और चित्रण पर स्पष्टता
“यहोवा का दिन” एक बहुवचन नहीं, बल्कि एक एकीकृत दिन है जो पूरे समय-काल और व्यवस्था को समेटता है। “निकट है” संकेत देता है कि क्रोध और उद्धार के क्रम में समय का आकरण हो चुका है। “वीर दुःख के मारे चिल्लाता है” से उद्धार के साथ असहायता, भय और पश्चात्ताप के गहन स्वर उभरते हैं—जो पाप के परिणामों की गंभीरता को दर्शाते हैं।
संबंधित पाठ और विचार
1) दानियेल 12:1-2 — एक समय की सूचनाओं के साथ जीते लोगों के लिए उत्थान और दण्ड का संकेत।
2) मत्ती 24:44 — तैयारी की महत्ता; हर दिन जागरूकता बनाए रखना।
3) प्रकाशितवाक्य 6:17 — उस दिन का भयावह स्वरूप और उद्धार की आवश्यकता का पुनरुक्ति चयन।
इन संदर्भों में यह स्पष्ट होता है कि विश्वासियों के लिए यह दिन एक चेतावनी ही नहीं, बल्कि परमेश्वर के सामर्थ्य और विकल्पों के बीच एक निर्णायक क्षण है: शांति या न्याय के चयन पर निर्भर।
आज के लिए आवेदन
हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में यह पाठ ध्वनि बनकर आता है: पाप के परिणामों से सचेत रहना और विश्वास के क्षेत्र में सतर्क बने रहना। जीवन के आपातकालीन क्षणों में भी परमेश्वर की सत्य-नीति पर टिके रहने का आग्रह है। यदि हम अपने हृदय को इसोझित तरीके से जागृत रखेंगे, तो उस महान दिन के भय के बीच भी उसकी दया और उद्धार के द्वार खुलते दिखाई देंगे।
सूक्ष्म उद्धरण (Public-domain commentators)
हेन्री, बार्न्स, और क्लार्क के विचारों का संकलन हमें यह समझाता है कि यह दिन एक चेतावनी और क्रिया-न्याय का संयोजन है—ना केवल भय, बल्कि पवित्र जीवन के लिए प्रेरणा भी। विशेष रूप से:
• Matthew Henry ने लिखा प्रतीत होता है कि यहोवा के दिन का आना न केवल प्रकट निंदा है, बल्कि पथभ्रष्टों के लिए एक अलार्म है ताकि वे फिर लौटें और परमेश्वर के साथ मेल खाना सीखें।
• Albert Barnes ने यह दिखाया कि “दिन” का भयावह स्वरूप उनकी दुनिया में व्यवहार-परक स्पष्टता को स्थापित करता है—जो लोग परमेश्वर से दूरी बनाए रखते हैं, उन्हें इसका भारी परिणाम भुगतना होगा।
• Adam Clarke ने संकेत किया कि यह समय-चिह्न न केवल कॉस्मिक व्यवस्था की चोट की ओर संकेत करता है, बल्कि संयमित धार्मिक-जीवन की आवश्यकताओं को भी रेखांकित करता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप): दानियेल 12:1-2; मत्ती 24:44; प्रकाशितवाक्य 6:17।