Old Testament
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सपन्याह 1:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब उनकी धन सम्पत्ति लूटी जाएगी, और उनके घर उजाड़ होंगे; वे घर तो बनाएँगे, परन्तु उनमें रहने न पाएँगे; और वे दाख की बारियाँ लगाएँगे, परन्तु उनसे दाखमधु न पीने पाएँगे।”
सपन्याह 1:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 1:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 5:11 (HINIRV) »
तुम जो कंगालों को लताड़ा करते, और भेंट कहकर उनसे अन्न हर लेते हो, इसलिए जो घर तुम ने गढ़े हुए पत्थरों के बनाए हैं, उनमें रहने न पाओगे; और जो मनभावनी दाख की बारियाँ तुम ने लगाई हैं, उनका दाखमधु न पीने पाओगे।

मीका 6:15 (HINIRV) »
तू बोएगा, परन्तु लवनें न पाएगा; तू जैतून का तेल निकालेगा, परन्तु लगाने न पाएगा; और दाख रौंदेगा, परन्तु दाखमधु पीने न पाएगा। (यूह. 4:37, आमोस. 5:11, व्य. 28:38-40)

व्यवस्थाविवरण 28:30 (HINIRV) »
तू स्त्री से ब्याह की बात लगाएगा, परन्तु दूसरा पुरुष उसको भ्रष्ट करेगा; घर तू बनाएगा, परन्तु उसमें बसने न पाएगा; दाख की बारी तू लगाएगा, परन्तु उसके फल खाने न पाएगा।
सपन्याह 1:13 का संदर्भ और_context
इस पदकथन में यहोवाह का न्याय स्पष्ट रूप से दो भागों में प्रकट होता है: पहली ओर आपदा और लूट-हानी का ताज्जुब, और दूसरी ओर निर्बलता और अवसाद का परिणाम। यह संदेश स्पस्ट करता है कि यह् आशीर्वादों के स्थान पर उन लोगों के लिए है जो उन पर भरोसा रखते हैं, लेकिन उनके भीतर बहते अविश्वास और पाप के कारण उद्धार और सुरक्षा का स्रोत कमजोर पड़ता है। सपन्याह के समय इस क्षेत्र में इक्कीसवीं सदी जैसी सामाजिक और धार्मिक जड़हट पाई जाती है: भ्रष्टाचार, अविश्वास, और एकरूपता का अभाव। यह verse भविष्यसूचक है—यहोवा के दिन आते हैं जब धन, घर और दाख की बारियाँ दिखावटी सुरक्षा बनकर भी अस्थिर हो जाती हैं।
केंद्रीय मतलब
यह शपथ-फलक स्पष्ट करता है कि सत्ता-सम्पदा, घर और कृषि-सम्पदा भी तब तक टिक नहीं पाती जब तक लोगों के हृदय में भय और भक्ति-सच्चाई नहीं होती। दुष्कर्म और अविश्वास के कारण वे सबकुछ खो जाते हैं, भले ही वे इन्हें कितनी मेहनत से बनाते हों। द्रव्य-संरक्षण से बढ़कर ईश्वर के प्रति नि:स्वार्थ भक्ति है।
मुख्य विषय
संबंधित पद और उनके अर्थ
1) वही संकेत जो मसीही जीवन के लिए चेतावनी देते हैं कि अस्थिर धन और सांसारिक वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भरता खतरनाक हो सकती है।
2) यह भी संकेत देता है कि वास्तविक सुरक्षा केवल परमेश्वर के साथ है, न कि बिनाभरोसे के भौतिक संसाधनों में।
3) दिशत दायित्व के रूप में यह कथा भविष्यकालीन दंड की ओर संकेत करती है—बुरी नीतियाँ और अनाचार एक दिन स्पष्ट हो जाते हैं।
अन्य पवित्र-कथन से संबंध (Cross-references)
व्यावहारिक विचार
आज के संदर्भ में यह verse हमें याद दिलाता है कि हमारे जीवन की अस्थिर सुरक्षा कहाँ है। क्या हम धन, घर, या आराम को सर्वोच्च मूल्य मानते हैं, या परमेश्वर की वचन-विश्वासिता को प्राथमिक मानते हैं? पाप के कारण आने वाले संकटों में भी, भक्ति और समुदाय के साथ रहने से आंतरिक शांति मिलती है। संसारिक लाभ सब कुछ नहीं होते; परमेश्वर के साथ सही रिश्ते ही स्थायी सुरक्षा देते हैं।
संक्षिप्त समापन
सपन्याह 1:13 आगे यह स्पष्ट करता है कि क्योंकि लोग परमेश्वर के नमित और न्यायपूर्ण मार्ग से विचलित हुए, इसलिए उनका धन-घर-परिसर टूट-फूट कर उजड़ जाते हैं। यह एक चेतावनी है कि वास्तविक सुरक्षा केवल परमेश्वर में है, और यह दिन आता है जब हर वस्तु अपनी वास्तविक मूल्य-स्थिति में आ जाती है।
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