आमोस 5:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तुम जो कंगालों को लताड़ा करते, और भेंट कहकर उनसे अन्न हर लेते हो, इसलिए जो घर तुम ने गढ़े हुए पत्थरों के बनाए हैं, उनमें रहने न पाओगे; और जो मनभावनी दाख की बारियाँ तुम ने लगाई हैं, उनका दाखमधु न पीने पाओगे।

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आमोस 5:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

अमोच 5:11 का सारगर्भित अर्थ

इस पद में भोलापन से कहा गया है कि जो कष्ट वंचितों को ताने देता है और भूखों से असत्यभरे तरीके से अन्न छीन लेता है, वह उस व्यवसायिक-भवनों और दाख की बारियों के सच्चे लाभ नहीं पाएगा, जिन्हें उसने अपनी शक्ति से बनवाया है। परमेश्वर न्यायप्रिय है; विश्‍वासयोग्य न्याय की दिशा वही है जो गरीबों के अधिकार और ईमानदारी को संरक्षित करे।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

Amos के समय इस्राइल साम्राज्य में आर्थिक सम्पन्नता जोर पकड़ चुकी थी, पर गरीब लोग दयनीय दशा में थे। सामाजिक-धार्मिक जीवन केवल दिखावे तक सीमित हो गया था: अन्न-दान के नाम पर अधर्म, कर-चुंगी के बहाने दोष और गरीबों के हक पर कब्जा। अतः नबी Amos देव-निष्कर्ष के साथ सचेत करते हैं कि धार्मिक आडंबर के भीतर व्याप्त अनीति परमेश्वर को अस्वीकार्य है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

- जो लोग कंगालों को लताड़ते हैं और उन्हें भेंट कहकर अन्न लेते हैं, वे सचमुच की पवित्रता के बजाय लालच का प्रदर्शन करते हैं।
- उनका बनाया गया घर पत्थरों का हो या दाख की बारियाँ, वह सब तब तक सुरक्षित नहीं माने जाते जब तक उनका आधार न्याय और दया के सिद्धांतों पर टिका हो।
- परमेश्वर के पास वास्तविक आशीर्वाद वही है जो लोगों के साथ उचित व्यवहार, दानशीलता और सामाजिक-न्याय पर खड़ा हो।

तीन प्रमुख विचार

  • कथा का दिल: शासक-नीतियाँ और धार्मिक प्रतिरूपता, परन्तु आंतरिक अधर्म।
  • व्यवहार का परीक्षण: यथार्थ संपत्ति के पीछे की नीयत और श्रम-न्याय का संरक्षण।
  • आत्म-साक्षात्कार: गरीबों के साथ अन्याय करने वालों के लिए इन्तजार-काल और दायित्व-प्रणाली।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनसे मिलने वाले संकेत

1) यशायाह 3:14–15 — अत्याचार और अन्याय कोधारणा से देखने पर परमेश्वर का प्रतिकार।
2) मत्ती 7:12 — जो उचित व्यवहार सत्कर्म की कुंजी है, वही सचमुच धर्म है।
3) इफिसियों 4:28 — जो चुराता है उसे अब चोरी छोड़कर परिश्रम से प्राप्त करना चाहिए—न्याय का व्यवहार।

इन संदर्भों में दिखता है कि धार्मिक दिखावे से परे, व्यवहार की सत्यता और गरीबों के हित की रक्षा परमेश्वर की इच्छा है।

कथन-प्रस्तावित सार

कथन: गरीबों के अधिकार का उल्लंघन और अनैतिक धन कमाने से बने अपने-अपने संपन्न घर परमेश्वर के यहाँ टिकाऊ नहीं रहते; असली आशीर्वाद न्याय-परक जीवन में है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

आप अपने समुदाय में उन प्रवृत्तियों की समीक्षा करें जो दिखावे के लिए भेंट देती हैं, पर भीतर से अन्याय करती हैं। अपने धन-स्त्रोत और आचरण को पारदर्शी बनाइए; जो दूसरे कमजोरों के अधिकार के साथ खिलवाड़ करते हैं, वे परमिश्वर के फैसले से बच नहीं पाते।

पूर्व-भावणा से तोड़कर एक संक्षिप्त निष्कर्ष

धर्म-संस्थाओं और व्यक्तियों के लिए घंटे-भेंट से नहीं, बल्कि न्याय और करुणा से परखना चाहिए कि आपका जीवन किस दिशा में जा रहा है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (व्याख्यात्मक संदर्भ के लिए): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से आई संधानिक धारणा इस पर कसती है कि वास्तविक आशीर्वाद वह है जो सामाजिक न्याय और सत्य-प्रेम को बढ़ावा दे।

अलंकारणीय निष्कर्ष: प्रभु का न्याय भीतर और बाहर दोनों जगह चमकता है; यदि आप इसnitt से दूर भागते हैं, तो जीवन-आकर्षण नहीं, बल्कि आत्म-नियमन और न्याय का मार्ग अपनाइए.

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

आमोस 5:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मीका 6:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मीका 6:15 (HINIRV) »
तू बोएगा, परन्तु लवनें न पाएगा; तू जैतून का तेल निकालेगा, परन्तु लगाने न पाएगा; और दाख रौंदेगा, परन्तु दाखमधु पीने न पाएगा। (यूह. 4:37, आमोस. 5:11, व्य. 28:38-40)

व्यवस्थाविवरण 28:30 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 28:30 (HINIRV) »
तू स्त्री से ब्याह की बात लगाएगा, परन्तु दूसरा पुरुष उसको भ्रष्ट करेगा; घर तू बनाएगा, परन्तु उसमें बसने न पाएगा; दाख की बारी तू लगाएगा, परन्तु उसके फल खाने न पाएगा।

सपन्याह 1:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
सपन्याह 1:13 (HINIRV) »
तब उनकी धन सम्पत्ति लूटी जाएगी, और उनके घर उजाड़ होंगे; वे घर तो बनाएँगे, परन्तु उनमें रहने न पाएँगे; और वे दाख की बारियाँ लगाएँगे, परन्तु उनसे दाखमधु न पीने पाएँगे।”

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