Old Testament
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आमोस 5:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“मैं तुम्हारे पर्वों से बैर रखता, और उन्हें निकम्मा जानता हूँ, और तुम्हारी महासभाओं से मैं प्रसन्न नहीं।
आमोस 5:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
आमोस 5:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 26:31 (HINIRV) »
और मैं तुम्हारे नगरों को उजाड़ दूँगा, और तुम्हारे पवित्र स्थानों को उजाड़ दूँगा, और तुम्हारा सुखदायक सुगन्ध ग्रहण न करूँगा।

यशायाह 66:3 (HINIRV) »
“बैल का बलि करनेवाला मनुष्य के मार डालनेवाले के समान है; जो भेड़ का चढ़ानेवाला है वह उसके समान है जो कुत्ते का गला काटता है; जो अन्नबलि चढ़ाता है वह मानो सूअर का लहू चढ़ानेवाले के समान है; और जो लोबान जलाता है, वह उसके समान है जो मूरत को धन्य कहता है। इन सभी ने अपना-अपना मार्ग चुन लिया है, और घिनौनी वस्तुओं से उनके मन प्रसन्न होते हैं।

यशायाह 1:11 (HINIRV) »
यहोवा यह कहता है, “तुम्हारे बहुत से मेलबलि मेरे किस काम के हैं? मैं तो मेढ़ों के होमबलियों से और पाले हुए पशुओं की चर्बी से अघा गया हूँ; मैं बछड़ों या भेड़ के बच्चों या बकरों के लहू से प्रसन्न नहीं होता।
आमोश 5:21 — Immediate Setting
पद 21 से ही अमोस बताता है कि ईश्वर इस्राइल के धार्मिक आचार-व्यवहार को केवल सतही पर्व-उत्सवों से नहीं मापते। वह पर्व उत्सवों, महासभाओं, और धार्मिक आदतों को महत्वहीन नहीं मानते, पर वे इन सब चीजों पर नियंत्रण रखते हैं जब उनका हृदय और आत्मा समाज के भीतर न्याय, सच्चाई और करूणा के बिना आक्रामक या दोहरे बने रहते हैं। यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि भले ही लोग धार्मिक कर्मों को नियमित करें, तो भी ईश्वर उनसे परमात्मीय संबंध, नीति-निष्ठा और मानव-समकित व्यवहार की मांग करते हैं।
ईश्वर का मूल विचार और विश्वास की कसौटी
यह वचन बताता है कि परमेश्वर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ आंतरिक न्याय और सत्य की मांग करते हैं। पर्व-उत्सवों का औचित्य तब है, जब वे समाज के दोहन, अन्याय या निर्दयता पर पर्दा नहीं डालते। यदि धार्मिक आचरण बाहर से पूजनीय है परन्तु भीतर असत्य, भ्रष्टाचार या विकृति है, तो भगवान उसे अस्वीकार कर देते हैं।
मुख्य शब्दों और चित्रों की व्याख्या
- “पर्वों से बैर रखना”: धार्मिक आयोजनों पर ईश्वर की नाराज़गी यह दर्शाती है कि रेत-सी पवित्रता और उद्धार का संदेश कार्य-व्यवहार से मेल नहीं खाता, तब इन आयोजनों का औचित्य नहीं रहता।
- “महासभाएं”: समाज के सामूहिक सम्मेलनों के स्वभाव को दर्शाती हैं; लेकिन यदि इन मंचों पर न्याय-घटित हो, तो ईश्वर प्रसन्न नहीं होते।
- “निकम्मा जानना”: कर्मकांड और धार्मिक बाह्यता को महत्वहीन मानना नहीं, परन्तु उनके पीछे के वास्तविक जीवन-उद्देश्य और नैतिकता पर प्रश्न उठाता है।
संबद्ध पाठ और समझ
यह संदेश न्याय-समत्ता के साथ धार्मिक परंपराओं की संतुलित भूमिका पर जोर देता है। अन्य टेक्स्ट जो इस चुनौती की पुष्टि करते हैं—भविष्य के दिनों में धर्मी के कर्म और हृदय के सच्चे परिवर्तन की अपेक्षा, और किसी भी धार्मिक गतिविधि के साथ समान न्याय-प्रेम का एकीकरण।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसे
आज के जीवन में निहित अनुप्रयोग
1) धार्मिकता को सामाजिक न्याय के साथ जोड़ें—जो समुदाय में शोषण बनाम सेवा को नहीं मानते, वे ईश्वर के साथ सच्चे संबंध को बनाते हैं।
2) आंतरिक परिवर्तन की ज़रूरत: विश्वास केवल बाहरी पोंछ-धोकर नहीं, बल्कि दिल की ईमानदारी और न्यायप्रिय जीवन से प्रमाणित होता है।
3) मंचों के प्रति आस्था के साथ वास्तविक करुणा—व्यक्ति, परिवार और समुदाय के लिए सही तरीका अपनाएं; जहाँ प्रतिफल नहीं, वहां भी सत्य और प्रेम का मार्ग न छोड़ें।
मूल पाठक-नोट
नीति-सत्य और भक्तिपूर्ण जीवन के बीच संतुलन चापलूसी नहीं, बल्कि ईश्वर के हृदय की मर्जी है। परमेश्वर चाहते हैं कि हमारी पूजा और हमारे काम एक-दूसरे के साथ संगत हों—ताकि सामाजिक दायित्व निभाने में भी हमारी आस्था उजागर हो।