Old Testament
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आमोस 5:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पाप भारी हैं। तुम धर्मी को सताते और घूस लेते, और फाटक में दरिद्रों का न्याय बिगाड़ते हो।
आमोस 5:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 5:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 5:10 (HINIRV) »
जो सभा में उलाहना देता है उससे वे बैर रखते हैं, और खरी बात बोलनेवाले से घृणा करते हैं। (गला. 4:16)

आमोस 2:6 (HINIRV) »
यहोवा यह कहता है: “इस्राएल के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण, मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि उन्होंने निर्दोष को रुपये के लिये और दरिद्र को एक जोड़ी जूतियों के लिये बेच डाला है।

यशायाह 1:23 (HINIRV) »
तेरे हाकिम हठीले और चोरों से मिले हैं। वे सब के सब घूस खानेवाले और भेंट के लालची हैं। वे अनाथ का न्याय नहीं करते, और न विधवा का मुकद्दमा अपने पास आने देते हैं।
आमतौर पर संदेश: आमोस 5:12 का स्पष्ट आह्वान
इस वचन में आमोस वर्षा-सी पापों के बारे में कठोर सचेत करता है, विशेषकर उन लोगों के प्रति जो धार्मिक अभिवादन के पीछे अन्याय करते हैं। यह संदेश समाज के कमजोर वर्गों के प्रति अन्याय के विरुद्ध एक नैतिक क्रिटिकल चेक है: धर्म के नाम पर घूस लेना, न्याय को बाधित करना, और दरिद्रों का अधिकार छीनना—ये सब परमेश्वर के दृष्टिपथ से नार suprior हैं।
पद पाठ और उसका संदर्भ
आमतौर 5:12 में लिखा है: “क्योंकि मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पाप भारी हैं। तुम धर्मी को सताते और घूस लेते, और फाटक में दरिद्रों का न्याय बिगाड़ते हो।” यह वचन चारित्रिक परीक्षण है—परमेश्वर उन लोगों पर दृष्टि रखते हैं जो धार्मिक रीति-रिवाज में डूबे पर वास्तविक न्याय नहीं करते। आमोस ने इज़राइल के उच्च वर्ग और प्रमुख नगरों के भीतर व्याप्त अन्याय को उजागर किया, जहां कानून की क्रियान्विति और सामाजिक न्याय एक-दूसरे से अलग-थलग पड़ गए थे।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस पद का केंद्रीय संदेश है: धर्म और नैतिकता एक ही धुरी के दो पहलू हैं। यदि धर्मी शब्दों में न्याय के संरक्षक हों, पर व्यवहार में अन्याय करें, तो भगवान की आँखों में उनका धार्मिक प्रदर्शन असत्य है। जीवन के व्यवहार में समानता, करुणा, और सत्य सहायता—इनके बिना धार्मिक आचरण खोखला है।
गुवर्धक टिप्पणी: प्रमुख विचार
Public-domain टिप्पणियाँ से एकत्र निहितार्थ उठाते हुए यह देखा जा सकता है कि तीन बिंदु निहित हैं:
पवित्र-वचन समकक्ष दृष्टिकोण
अन्य संदर्भ जो इस विचार को पुष्ट करते हैं:
1) न्याय के प्रतीक के रूप में चिर-स्थायी निष्कर्ष—जहाँ धनी-हृदय और सामाजिक स्थिति के बावजूद सहायता की ज़रूरत है; 2) न्याय के क्षेत्र में भ्रष्टाचार की निंदा; 3) समाज के वर्गीय विभाजन के विरुद्ध दया, विश्वास और क़ायम इमानदारी का आग्रह।
अनुप्रयोग: आज के पाठ के लिए कदम
इस वचन से हमें तीन व्यवहारिक बदलाव सीखने को मिलते हैं:
छोटे cross-reference की दृष्टि
1) अन्याय के विरुद्ध कहा गया सामाजिक न्याय का संकेत देता है कि ईश्वरीय राज्य में समान अवसर और संरक्षण सबसे पहले आते हैं।
2) धार्मिकता के भीतर दया और चकितर न्याय का संगम भी इस संदेश की पुष्टि करता है—धर्म के कर्म से पहले दिल में दया हो।
3) गरीबों के अधिकार के लिए सचेत दृष्टिकोण अन्य उद्धार के संदेशों से भी संगत है—जो निष्पक्षता से समाज को संचालित करते हैं।
संक्षेप में
आमोस 5:12 हमें यह सिखाता है कि धार्मिक प्रदर्शन तब तक मूल्यवान नहीं है जब तक वह अन्याय को रोके नहीं और दरिद्रों के अधिकार की सुरक्षा नहीं करता। भगवान उन लोगों को देखता है जो कथित पवित्रता के भीतर अन्याय को सहन करते हैं या उसका हिस्सा बन जाते हैं। सच धर्म वही है जो करुणा, निष्पक्ष न्याय और कमजोरों के लिए स्पष्ट सहायता को एक साथ आगे बढ़ाता है।
एतिहासिक टिप्पणी से छोटे उद्धरण
मथ्यू Henry, Barnes, Clarke के सामान्य-जन-safe विचार यहाँ इंगित करते हैं कि धर्म और न्याय एक दूसरे के बिना अपूर्ण हैं—यही संदेश यहाँ भी बारंबार है।