Old Testament
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आमोस 5:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे लोगों, बुराई को नहीं, भलाई को ढूँढ़ो, ताकि तुम जीवित रहो; और तुम्हारा यह कहना सच ठहरे कि सेनाओं का परमेश्वर यहोवा तुम्हारे संग है।
आमोस 5:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 5:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 1:9 (HINIRV) »
क्या मैंने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बाँधकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहाँ-जहाँ तू जाएगा वहाँ-वहाँ तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।”

मीका 6:8 (HINIRV) »
हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले? (मत्ती 23:23, यशा. 1:17)

मीका 3:11 (HINIRV) »
उसके प्रधान घूस ले लेकर विचार करते, और याजक दाम ले लेकर व्यवस्था देते हैं, और भविष्यद्वक्ता रुपये के लिये भावी कहते हैं; तो भी वे यह कहकर यहोवा पर भरोसा रखते हैं, “यहोवा हमारे बीच में है, इसलिए कोई विपत्ति हम पर न आएगी।”
आ Amos 5:14 पर केंद्रित विचार
यह वचन बताता है कि परमेश्वर के लोग अपनी निष्ठा और आचरण को पुनः उन्नत करें—बुराई से दूर रह कर भलाई की खोज करें ताकि उनका जीवन जीवित रहे। यह संदेश संघर्ष के समय में प्रहरी की तरह है: सामाजिक असमानताओं, नीतिगत भ्रष्टाचार और आंतरिक भ्रम के बीच भी प्रभु के साथ सत्य खोजना जीवन का उद्देश्य बना रहता है।
मूल संदर्भ और पृष्ठभूमि
यह वाक्य Amos के समय के संदर्भ में है, जब इज़राइल शासित क्षेत्र में सामाजिक अन्याय, धार्मिक रीति-रिवाजों के ढाँचों के बाहर लोगों ने स्वार्थ और शक्की पतन को बढ़ावा दिया था। Amos प्रवक्ता के रूप में धार्मिक रीति-रिवाज और वास्तविक न्याय के बीच का अंतर उ imbalance किया करते थे। वे इस संदेश के माध्यम से कह रहे हैं कि परमेश्वर के सहभागी वही हैं जो भलाई तथा न्याय के लिए प्रयत्न करते हैं और दुष्कर्म के विरुद्ध खड़े रहते हैं।
मुख्य संदेश
खुद को प्रकट करने के बजाय अपने व्यवहार को सुधारिये—भलाई की खोज में लगे रहिये, ताकि आप जीवित रह सकें। यह जीवित रहने का नहीं केवल शारीरिक अर्थ है, बल्कि परमेश्वर की दृष्टि में जीवित रहने की स्थिति है: उसके सम्मुख पवित्र जीवन, सामाजिक न्याय और दयालुता से भरा जीवन। साथ ही यह भी कहा गया है कि आपके साथ परमेश्वर का समर्थक और यहोवा का वही साथ है जो भलाई में केंद्रित रहता है।
कथा-गठन और थीम
1) भलाई की तल्लीन खोज—असत्य, अन्याय और शत्रुता के बीच भी लोग परमेश्वर की इच्छा के अनुसार भलाई को प्राथमिकता दें।
2) जीवित रहने का आश्वासन—भलाई के मार्ग पर चलने से परमेश्वर के साथ सहचर्य बना रहता है।
3) परमेश्वर का साथ—यथार्थ उद्धार और सुरक्षा के लिए परमेश्वर के साथ संबंध बनाए रखना आवश्यक है।
संदर्भ-सहयोगी आयाम
- न्याय और दया पर बल देते हुए Amos यह स्पष्ट करते हैं कि धार्मिक भव्यता तब ठहर नहीं पाती जब समाज में अन्याय बना रहता है।
- परमेश्वर के साथ रहने का अनुभव प्रायः नैतिकतः ठोस जीवन के साथ जुड़ा होता है—भलाई के मार्ग पर चलना उसका अनुकरण है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) पत्ति 1:22— सत्य के साथ प्रेम और दिल से भलाई की अभिव्यक्ति; यह दिखाता है कि नैतिक जीवन और पवित्रता सीधे परमेश्वर से जुड़ते हैं।
2) मत्ती 7:12— दूसरों के साथ वही व्यवहार जो आप चाहते हैं की वे आपके साथ करें; भलाई का मार्ग आपसी नैतिकता से उभरता है।
3) यशायाह 1:17— साहचर्य, न्याय और दयालुता के कार्यों को अपनाने का आह्वान;समाज में सुधार की दिशा में एक प्रैक्टिकल मार्ग।
व्यावहारिक ध्यान–छोटी सूची
विशिष्ट उद्धरण संकेत
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की पूर्व-स्वतंत्र व्याख्याओं से सीधे टुकड़े नहीं उद्धृत किए गए, किन्तु उनके प्रवचनात्मक चिंतन मिश्रित रूप से इस सार को प्रस्तुत करते हैं: भलाई के मार्ग में चलने से व्यक्ति का जीवन समृद्ध होता है; सामाजिक न्याय और श्रद्धा दोनो साथ चलते हैं।
विदाई विचार
यह संदेश हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के साथ वास्तविक मित्रता तब बनती है जब हम भलाई को खोजते हैं और उसके प्रति faithfully रहते हैं। आराधनात्मक परंपराओं के बावजूद यदि हमारा आचरण अन्यायपूर्ण है, तो यहवाह नहीं बनती। वास्तविक सुरक्षा और जीवन वही है जो बुराई के विरुद्ध भलाई की खोज में मिलता है, क्योंकि परमेश्वर स्वयं सेनाओं का परमेश्वर है जो अपने लोगों के साथ है।