Old Testament
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आमोस 5:27 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण मैं तुम को दमिश्क के उस पार बँधुआई में कर दूँगा, सेनाओं के परमेश्वर यहोवा का यही वचन है।
आमोस 5:27 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 5:27 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 17:6 (HINIRV) »
होशे के नौवें वर्ष में अश्शूर के राजा ने शोमरोन को ले लिया, और इस्राएलियों को अश्शूर में ले जाकर, हलह में और गोजान की नदी हाबोर के पास और मादियों के नगरों में बसाया।

प्रेरितों के काम 7:43 (HINIRV) »
और तुम मोलेक* के तम्बू और रिफान देवता के तारे को लिए फिरते थे, अर्थात् उन मूर्तियों को जिन्हें तुम ने दण्डवत् करने के लिये बनाया था। अतः मैं तुम्हें बाबेल के परे ले जाकर बसाऊँगा।’ (आमो. 5:25-26)

आमोस 4:13 (HINIRV) »
देख, पहाड़ों का बनानेवाला और पवन का सिरजनेवाला, और मनुष्य को उसके मन का विचार बतानेवाला और भोर को अंधकार करनेवाला*, और जो पृथ्वी के ऊँचे स्थानों पर चलनेवाला है, उसी का नाम सेनाओं का परमेश्वर यहोवा है! (2 कुरि. 6:18,)
अमोस 5:27 का सार: दमनिश्क के पार बँधुआई का वचन
इस पद का सीधा अर्थ है: ईश्वर ने इस्राइल को दमनिश्क के पार बँधुआई में भेजने की जिम्मेदारी ठहराई है—यानी विदेशी दासत्व और अपमान से परे एक कठोर दंड प्रणाली के अनुसार उसका भविष्य निर्धारित किया गया है। यह वचन न्याय के साथ-साथ चेतावनी भी है कि परमेश्वर की सत्ता में नीति और दया—दोनों एक साथ चलते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
अमोस एक नबी-कथन-प्रवर्तक के रूप में उत्तर-इस्राइल के सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के विरुद्ध बोला करता था। उस समय इजरायल-युद्ध के बाद भी धार्मिक औचित्य बनाए रखने के बजाय लोग भ्रष्टाचार और अन्याय में डूबते जा रहे थे। अमोस का संदेश यह था कि परमेश्वर न्याय के बिना उपासना को महत्व नहीं देता। यह वचन किसी विशेष घटना का भविष्यवाणी की तरह नहीं, बल्कि एक निर्णायक चेतावनी का स्वर है कि नैतिक पतन के परिणामस्वरूप बाहर की सत्ता से दमनिश्क के पार बँधुआई संभव है।
पाठ के प्रमुख बिंदु
सूक्ष्म विवेचन (Interpretive notes)
आमोस 5:27 में दिए गए दमनिश्क के पार बँधुआई का वचन एक व्यापक दंड-व्यवस्था का हिस्सा है। यह समय-सम्बन्धी संदेश है—न केवल ऐतिहासिक घटना के लिए बल्कि मौजूदा पीढ़ी के नैतिक सफर के लिए भी। नबी ने समाज के बाहरी आडंबर और आंतरिक भ्रष्टाचार के बीच की खाई दर्शाई है। यह शिक्षा यह है कि उपासना और न्याय एक साथ चलने चाहिए; नहीं तो विनाश तय है।
संरचना-उपयोगी संदर्भ
नीचे तीन प्रवचनों तक पहुंचना मददगार है जिनसे इस वचन की कसौटी और दृष्टिकोण स्पष्ट होता है:
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ-परिचय)
ये संदर्भ इस संदेश को समझने में मदद करते हैं, प्रत्येक के साथ छोटा स्पष्टीकरण:
व्यावहारिक निष्कर्ष
1) अपने समाज के भीतर न्याय-नियमतों को लागू करने की प्रतिबद्धता बनाएं, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। 2) उपासना के साथ जीवन-कार्य में ईमानदारी और करुणा दिखाएं—शुष्क धार्मिकता बनाम सचेत नैतिकता। 3) दासत्व या अन्याय के संकेत मिलें तो भगवान के वचनों के अनुसार साहसपूर्वक प्रतिवाद करें—पर प्रेम और सम्मान बनाए रखें।
आखिरी निष्कर्ष
यह वचन हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर की सत्ता और न्याय हर समय सक्रिय है। इसे न केवल ऐतिहासिक चेतावनी के रूप में पढ़ना चाहिए, बल्कि अपने दिन-प्रतिदिन के व्यवहार में एक स्पष्ट मानक के रूप में भी उतारना चाहिए।
महत्वपूर्ण उद्धरण (एतिहासिक टिप्पणीकारों से): यदि आवश्यक हो, तो Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलित विचारों से छोटे-छोटे सीधे कथन उद्धृत किए जा सकते हैं; किन्तु पूर्ण पाठ नहीं।