Old Testament
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आमोस 2:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा यह कहता है: “मोआब के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण, मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि उसने एदोम के राजा की हड्डियों को जलाकर चूना कर दिया।
आमोस 2:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 2:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सपन्याह 2:8 (HINIRV) »
“मोआब ने जो मेरी प्रजा की नामधराई और अम्मोनियों ने जो उसकी निन्दा करके उसके देश की सीमा पर चढ़ाई की, वह मेरे कानों तक पहुँची है।”

यहेजकेल 25:8 (HINIRV) »
“परमेश्वर यहोवा यह कहता है : मोआब और सेईर जो कहते हैं, देखो, यहूदा का घराना और सब जातियों के समान हो गया है।

यशायाह 15:1 (HINIRV) »
मोआब के विषय भारी भविष्यद्वाणी। निश्चय मोआब का आर नगर एक ही रात में उजाड़ और नाश हो गया है; निश्चय मोआब का कीर नगर एक ही रात में उजाड़ और नाश हो गया है।
आमोस 2:1 पर धारणा: न्याय और स्मरणीय अपराध
मुख्य interpretive बिंदु: यहोवा Moab के विषय में निर्णय सुनाते हुए कहता है कि उसके तीन, वरन् चार अपराधों के कारण मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि उसने एडोम के राजा की हड्डियों को जलाकर चूना कर दिया। यह वाक्य उस समय के सामरिक-राजनीतिक आचरण की निंदा है जिसमें परमेश्वर की न्याय-हकीकत और पड़ोसी राष्ट्रों के साथ व्यवहार की नैतिक परख उभरती है। Moab का पाप एक ऐसी श्रृंखला में शामिल है जिसे परमेश्वर अपने लोगों के विरुद्ध उठने वाले अन्याय के साथ जोडकर देखता है और अंततः क्रोध को न्यायोचित ठहराता है।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
आमोस की पुस्तक में प्रवक्ता यहवा के संदेश को उत्तर-दक्षिण देशों के विरुद्ध एक क्रमबद्ध तर्क के रूप में पढ़ना चाहिए। यहाँ Moab का अपराध, खड़ा होकर, पड़ोसी Edom के प्रति क्रूरता का इतिहास और आचरण का राजनीतिक-यंत्रणा पक्ष स्पष्ट करता है। यहा यह भी संकेत है कि परमेश्वर अपने राष्ट्रों के बीच एक नैतिक स्टेपलाइनों को बनाए रखता है: न केवल धार्मिक उल्लंघन, बल्कि लोगों के जीवन-आधार, दया और मानवीय गरिमा के विरुद्ध भी क्रियाएँ अपराध हैं।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
1) न्याय की सीमा: परमेश्वर हर गिरे हुए पाप के लिए दंड की मांग करता है, भले ही वह शक्तिशाली हो। Moab ने अतीत में Edom के राजा की हड्डियाँ जलाकर चूना किया, जो सामुदायिक स्मृति में एक अत्यंत अधर्मपूर्ण कृत्य के रूप में स्मरण रहता है। 2) दायित्व की स्मृति: यह वाक्य यह बताता है कि पड़ोसियों के प्रति क्रूर व्यवहार और घृणा का व्यवहार परमेश्वर के सर्वव्यापक न्याय के सामने अपराध है।
पाठ-आयाम से प्रेरित टिप्स
क्रास-रेफरेंसेस (संक्षेप उल्लेख)
1) न्याय के व्यापक सिद्धांत—यहूदियों के पापों के साथ अन्य राष्ट्रों के दुष्कर्म भी परमेश्वर के न्याय के दायरे में आते हैं।
2) पड़ोसियों के प्रति दया-निष्ठा—यहोवा कूटनीतिक और युध्दीय आचरण में भी नैतिकता की मांग करते हैं।
3) दण्ड की सीमा—तीसरे व चौथे अपराध का उल्लेख यह दर्शाता है कि परमेश्वर एक-एक गिनती करता है और अत्याचार के विरुद्ध कदम उठाता है।
विचार-विमर्श के प्रश्न
- हमारे अपने समाज में किन-किन परिस्थितियों में भय या दबाव के बावजूद न्याय और गरिमा को बनाए रखना संभव है?
- क्या हमारे समुदाय में ऐसे अपराध हैं जिनके कारण एक केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से दंडस्वरूप प्रतिक्रियाएं होती हैं?
संक्षिप्त निष्कर्ष
आमोस 2:1 यह याद दिलाता है कि परमेश्वर न्यायप्रिय है और वह अधर्म के खिलाफ निष्क्रिय नहीं रहता। Moab के अपराधों का उल्लेख एकीकृत नैतिक पाठ है कि पड़ोसियों के साथ दुर्व्यवहार, दमन और क्रूरता परमेश्वर के सामने अनाचार माने जाते हैं, और ऐसे पापों का दंड निश्चित होता है।
उद्धरण-उद्धरण: टिप्पणीकारों से संक्षेप
यहां Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शाब्दिक पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा रहे हैं, पर उनके विचारों के अनुसार: यह पाठ नैतिकता के उल्लंघन—दूसरों के विरुद्ध क्रूरता—पर परमेश्वर की तीखी प्रतिक्रिया को स्पष्ट करता है; न्याय और दया के संतुलन की मांग रखता है, ताकि समुदाय में गरिमा और सुरक्षा बनी रहे।