Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीआमोस 2:3 बाइबल पद की व्याख्या
आमोस 2:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं उसके बीच में से न्यायी का नाश करूँगा, और साथ ही साथ उसके सब हाकिमों को भी घात करूँगा,” यहोवा का यही वचन है।
आमोस 2:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 2:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 24:17 (HINIRV) »
मैं उसको देखूँगा तो सही, परन्तु अभी नहीं; मैं उसको निहारूँगा तो सही, परन्तु समीप होकर नहीं याकूब में से एक तारा उदय होगा, और इस्राएल में से एक राजदण्ड उठेगा; जो मोआब की सीमाओं को चूर कर देगा, और सब शेत के पुत्रों का नाश कर देगा। (मत्ती 2:2)

यिर्मयाह 48:7 (HINIRV) »
क्योंकि तू जो अपने कामों और सम्पत्ति पर भरोसा रखता है, इस कारण तू भी पकड़ा जाएगा; और कमोश* देवता भी अपने याजकों और हाकिमों समेत बँधुआई में जाएगा।

आमोस 2:3 — तुरंत संदर्भ और संदेश
प्रसंग का आरम्भ: यह वचन Amos के समय के उत्तर-देके राज्य की निरंतर असमानता और न्यायिक भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। यहवचन नबियों के ध्वनि-प्रणालियों में से एक है जिसमें प्रभु यहूदियों के भीतर न्यायिक ढांचे के गिरने पर कठोर चेतावनी देता है।
ईश्वर के बारे में यह पाठ क्या बताता है
यह वचन स्पष्ट करता है कि परमेश्वर न्याय के एक निर्णायक राजा हैं जो दखल देते हैं जब समाज के प्रमुख लोग और अधिकारी अन्याय को बढ़ावा देते हैं। न्याय-प्रणाली में भ्रष्टाचार या दमनकारी व्यवहार को सहन नहीं किया जाता; ईश्वर सार्वजनिक विवेक और कर्तव्य के लिए खड़ा रहते हैं। यह संदेश यह भी बताता है कि ईश्वर समूचे समाज को प्रभावित करने वाले भ्रष्टाचार को नजरअंदाज नहीं करते।
महत्वपूर्ण शब्द और छायाएं
संबद्ध अनुभवजनक उद्धरण (संदर्भित, संक्षेप)
पवित्र लेखन में अन्य जगह भी न्याय के लिए दंड का विचार आता है, जहां प्रभु के बिना दमन और अन्याय के कारण सामाजिक ढांचा नहीं टिक पाता। वहीं, दया और सुधार की भी आवाज़ बराबर उठती है, ताकि सचेत होकर लोक ईश्वर के आधिकारिक न्याय के तहत जीवन बिताएं।
अनुष्ठानिक या तुलनात्मक पठन (Cross-references)
इन संदर्भों से पता चलता है कि पवित्र लेखक सामाजिक-राजनीतिक ढांचे में नैतिकता को सर्वोच्च मानते हैं और न्याय की रक्षा के लिए परमेश्वर की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आज के पाठ के लिए अनुपयोगी अनुप्रयोग
यदि आप समाज-सेवा, न्याय-व्यवस्था या संगठन में काम करते हैं, तो यह पाठ प्रेरणा देता है कि ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही की स्थापना सबसे ऊपर हो। भ्रष्टाचार या दमन के विरुद्ध आवाज़ उठाना और कमजोरों का हित सुरक्षित रखना परमेश्वर की राह है। साथ ही, अपने भीतर न्याय के लिए संवेदना बनाए रखें—भ्रष्टाचार के खिलाफ हर स्तर पर सच बोलना और करुणा के साथ सुधार की योजना बनाना चाहिए।
संक्षिप्त सार
आमोस 2:3 में प्रभु की चेतावनी है कि जब देश के नीतिनिर्माताओं और हाकिमों का न्याय भ्रष्ट होता है, तो ईश्वर भी उनका नाश कर डालेंगे। यह दंडस्वरूप चेतावनी नहीं, बल्कि एक नयी चैतन्यता का आह्वान है—न्याय की स्थापना, सत्य की आवाज़ और समाज के प्रत्येक सदस्य के लिए समान मान।
टिप्पणी योग्य उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke):
यह पाठ लोकप्रिय नैतिक-न्याय परक टिप्पणीकारों के अनुरूप है; इन में से किसी के कृत्यों के पूर्ण उद्धरण यहाँ नहीं दिए जा रहे, पर उनकी धारणाएँ यह हैं कि परमेश्वर न्याय के बिना समाज की सुरक्षा नहीं करते और सत्ता-प्रमुखों पर दबाव डालते हैं ताकि वे सत्य और दया के मार्ग पर चलें।