Old Testament
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आमोस 2:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए मैं मोआब में आग लगाऊँगा, और उससे करिय्योत के भवन भस्म हो जाएँगे*; और मोआब हुल्लड़ और ललकार, और नरसिंगे के शब्द होते-होते मर जाएगा।
आमोस 2:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 2:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 48:24 (HINIRV) »
और करिय्योत, बोस्रा, और क्या दूर क्या निकट, मोआब देश के सारे नगरों में दण्ड की आज्ञा पूरी हुई है।

यिर्मयाह 48:41 (HINIRV) »
करिय्योत ले लिया गया, और गढ़वाले नगर दूसरों के वश में पड़ गए। उस दिन मोआबी वीरों के मन जच्चा स्त्री के से हो जाएँगे;

आमोस 1:14 (HINIRV) »
इसलिए मैं रब्बाह की शहरपनाह में आग लगाऊँगा, और उससे उसके भवन भी भस्म हो जाएँगे। उस युद्ध के दिन में ललकार होगी, वह आँधी वरन् बवण्डर का दिन होगा;
पूर्वक अर्थ (Direct Meaning)
आमोस 2:2 में कहा गया है कि परमेश्वर मोआब पर क्रोध करेगा और वहां करिय्योत के भवन जल जाएँगे, मोआब के लोग हंसी-ठिठोली तथा उल्लास छोड़कर भयभीत और मतिभ्रमित हो जाएँगे। यह शास्त्र Moab के प्रचंड संकट और दुष्टियों के परिणामों को दर्शाता है, जहाँ परमेश्वर के न्याय का दंड उनके विरुद्ध खुलकर प्रकट होता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
आमोस नबी Actively उन्नीसवीं शताब्दी पहले ईश्वर के लोगों के नैतिक पतन और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध बोलते हैं। Amos उत्तरिशिया क्षेत्र में यहूदियों के साथ स्थिर नैतिक चेतावनी देता है; Moab एक पड़ोसी राष्ट्र है जिसे विशिष्ट पापों के कारण दंड का सामना करना पड़ता है। यहाँ संकेत है कि धार्मिक आडंबर के साथ साथ नर्कीय अत्याचार और दमन भी परमेश्वर के न्याय के दायरे में आते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
1) आग लगना: यह दृश्य लोक-नीति में विनाश की तीव्रता का रूपक है। आग से सामाजिक-आर्थिक विनाश तक सब कुछ जला उठता है।
2) करिय्योत के भवन भस्म: करिय्योतMoab की शक्तिशाली संरचना और उसके राजमहलों के पतन का प्रतीक है—धन-वैभव का अंत और देव-न्याय का स्पष्ट प्रमाण।
3) ललकार का नाश: मोआब के शब्द और अभिमान—“हुल्लड़ और ललकार”—यह दर्शाते हैं कि दुष्टों की अहंकारपूर्ण बोलचाल भी दंड से बच नहीं पाती।
छोटे थीमैटिक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेस (संবন্ধित अर्थ के लिए छोटे संदर्भ)
1) योएल 2:20-22: प्राचीन राष्ट्रों के विनाश और प्रभु की सुरक्षा—सार्तिकता के विरुद्ध ईश्वर का न्याय।
2) इब्रानी 10:30-31: ईश्वर के न्याय का भय और उसकी सुध-बुध, जो ठोस नैतिक विनम्रता की मांग करता है।
3) अय्यूब 12:23-25: शक्तिशाली राष्ट्रों के पतन का संदेश, यह दिखाता है कि पृथ्वी के राज्यों की स्थिति प्रभु के हाथों में है।
धर्मात्मिक निष्कर्ष
- यह संदेश स्पष्ट करता है कि परमेश्वर सत्ता के विपरीत नहीं रहने वाला: अन्याय और अभिमान के बावजूद वह न्याय करता है।
- मोआब जैसे पड़ोसी देशों के लिए यह चेतावनी है कि भौतिक समृद्धि और बाह्य शान-शौकत पल भर की हो सकती है; आत्मिक ठहराव और नैतिकता ही स्थाई सुरक्षा है।
व्यावहारिक उपाख्यान
हम अपने जीवन में देखें: क्या हम धार्मिक प्रदर्शन के पीछे असली परिवर्तन की भूमि दे रहे हैं? क्या हम हिंसा, दमन या अहंकार के शब्दों से दूर रहते हैं? प्रभु के न्याय के डर को अपनी दैनिक आदत बना लें, ताकि जीवन के संकट में भी परमेश्वर की मार्गदर्शना बनी रहे।
महत्वपूर्ण उद्धरण (पूर्व-प्रकाशित टिप्पणियाँ)
इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी से उपयोगी बिंदु पाते हैं: “न्याय का दिन आ पहुंचा है; शक्तिशाली राष्ट्र भी दुष्टताओं के कारण डरते हैं।” यदि उद्धरण उपलब्ध हों तो वे संक्षेप में नीचे का संकेतित रूप में उल्लेखित होंगे।