Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीआमोस 2:6 बाइबल पद की व्याख्या
आमोस 2:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा यह कहता है: “इस्राएल के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण, मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि उन्होंने निर्दोष को रुपये के लिये और दरिद्र को एक जोड़ी जूतियों के लिये बेच डाला है।
आमोस 2:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 2:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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योएल 3:3 (HINIRV) »
उन्होंने तो मेरी प्रजा पर चिट्ठी डाली, और एक लड़का वेश्या के बदले में दे दिया, और एक लड़की बेचकर दाखमधु पीया है।

मीका 3:2 (HINIRV) »
तुम तो भलाई से बैर, और बुराई से प्रीति रखते हो*, मानो, तुम, लोगों पर से उनकी खाल उधेड़ लेते, और उनकी हड्डियों पर से उनका माँस नोच लेते हो;

आमोस 5:11 (HINIRV) »
तुम जो कंगालों को लताड़ा करते, और भेंट कहकर उनसे अन्न हर लेते हो, इसलिए जो घर तुम ने गढ़े हुए पत्थरों के बनाए हैं, उनमें रहने न पाओगे; और जो मनभावनी दाख की बारियाँ तुम ने लगाई हैं, उनका दाखमधु न पीने पाओगे।
आमोस 2:6 पर टिप्पणी — दण्ड और अन्याय का गम्भीर निष्कर्ष
मुख्य interpretive बिंदु: यहोवा यहोवा कहता है कि इस्राएल के तीन नहीं, वरन् चार अपराधों के कारण मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; अर्थात् असत्य, दास्य-व्यापार, दोषपूर्ण लेनदेन और निरीहों के लिए न्याय न करना—ये चारों अपराध मिलकर सामाजिक और नैतिक क्रूरता की गहरी परत बनाते हैं। प्राचीन इस्राएल में आर्थिक उद्धार के नाम पर निर्दोषों के शोषण की यह घृणित रवैया परमेश्वर के साथ उनके संबंधों के अंतःस्थल में विच्छेद पैदा करती है। यह वाणी—कथित "चार अपराध"—से यह स्पष्ट होता है कि न्याय के बिना धार्मिक आस्था ठोस नहीं रहती, और दुष्ट व्यवहार परमेश्वर के हृदय में गहन आघात पहुँचाते हैं।
पाठ-आयतन ( Literary Context )
आमोस की पुस्तक का केंद्र इस्राएल की सामाजिक-आर्थिक असमानता और राजनीतिक अनैतिकता का उद्धरण है। इस वक्त कथा में व्यापारी मानवीय गरिमा के बजाय लाभ-लाभ के लिए निर्दोषों को सजायुक्त कर रहे थे—यह न्याय के मौलिक सिद्धान्त के समान नहीं। यहाँ "तीन, वरन् चार" शैली, एक सामान्य अनुभव-आधारित कहावत है जो बिडम्बनापूर्ण समयों में भी गम्भीरता के साथ चेतावनी देती है: छोटे-छोटे दायित्वों का भी उल्लंघन परमेश्वर के सामने गम्भीर अपराध है।
तीन प्रमुख अपराधों के पीछे की परिघटना (Theological significance)
आध्यात्मिक और नैतिक संकेत
पवित्र चरित्र और न्याय के साथ यहुदा समाज की दूरी दर्शाता है: उपासना की बाहरीता और आचरण की सच्चाई में असंतुलन भयावह नतीजे लाता है। यह उद्धारक संदेश है कि भक्ति और व्यवहार एक साथ ठहरें—अन्याय पर चुप्पी, परमेश्वर के न्याय के विरुद्ध संक्रमण है।
पवित्र लेखन से सम्बन्ध (Cross-references)
इन संदर्भों से समझ आता है कि Amos का संदेश केवल पुरानी कहानी नहीं, बल्कि स्थायी नैतिक सिद्धांत है: समाज की समृद्धि में न्याय और करुणा का संतुलन आवश्यक है।
विचार के प्रश्न (Questions for Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
आमोस 2:6 यह स्मरण कराता है कि भगवान न्याय के बिना धर्म नहीं स्वीकारते। तीन-चार अपराध भी एक साथ मिलकर सामाजिक विघटन पैदा करते हैं: निर्दोष पर अत्याचार, आर्थिक लाभ के लिये मानव-स्तर के मानदंडों का उल्लंघन, और कमजोर वर्गों के साथ अन्याय। हर ईमानदार आस्था काMust है कि वह व्यवहार में भी न्याय, करुणा और सत्य के साथ चलें।
उद्धरण संकेत: इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे उद्धरण हमारे अनुवाद में समाहित नहीं हैं; यदि आवश्यक हो तो मंच पर उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारियों के विचारों का संक्षेप उपयोग किया गया है।