Old Testament
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आमोस 5:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
बेतेल की खोज में न लगो, न गिलगाल में प्रवेश करो, और न बेर्शेबा को जाओ; क्योंकि गिलगाल निश्चय बँधुआई में जाएगा, और बेतेल सूना पड़ेगा।
आमोस 5:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
आमोस 5:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 8:14 (HINIRV) »
जो लोग सामरिया के दोष देवता की शपथ खाते हैं, और जो कहते हैं, 'दान के देवता के जीवन की शपथ,' और बेर्शेबा के पन्थ की शपथ, वे सब गिर पड़ेंगे, और फिर न उठेंगे।”

आमोस 4:4 (HINIRV) »
“बेतेल में आकर अपराध करो, और गिलगाल में आकर बहुत से अपराध करो; अपने चढ़ावे भोर को, और अपने दशमांश हर तीसरे दिन ले आया करो;

होशे 4:15 (HINIRV) »
हे इस्राएल, यद्यपि तू छिनाला करता है, तो भी यहूदा दोषी न बने। गिलगाल को न आओ; और न बेतावेन को चढ़ जाओ; और यहोवा के जीवन की सौगन्ध कहकर शपथ न खाओ।
आमोस 5:5 पर व्याख्या का संक्षेप
सीधी बात: यह वचन धार्मिक ठिकानों से मिथ्या भरोसे और प्रदर्शन की जीवनतत्व से दूर रहने की चेतावनी है; परमेश्वर के लाभ के लिए धार्मिक स्थल-आडंबर से नहीं, नीति-न्याय और सच्ची भक्ति से जीवन बिताने की बात है।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
Amos नबियों में से एक है जिसने उत्तर-राजाओं के समय इजरायल के सामाजिक अन्याय और धार्मिक आडंबर को उष्मा से उकसाया। उनका संदेश यह है कि स्थल-केंद्रित पूजा और धार्मिक यात्राएँ तभी तक सार्थक हैं जब ये नैतिकता, उपेक्षा-न्याय और दयाहीन रीति-रिवाजों के विरुद्ध सचेत हों। इस छंद में स्थानीय दर्शनों—बेतेल, गिलगाल, और बेर्शेबा—की यात्राओं की चेतावनी है, ताकि लोग समझ लें कि परमेश्वर भौतिक स्थलों से नहीं,तः हृदय की सच्ची भक्ति और न्याय से आते हैं।
मुख्य विचारणीय बिंदु
विशिष्ट छंद-परिप्रेक्ष्य (संश्लेषित मार्गदर्शन)
यह छंद बताता है कि गिलगाल और बेतेल जैसी जगहें केवल प्रतीक नहीं हैं, बल्कि धार्मिक श्रद्धा के बाहरी रूपों पर प्रश्न उठाते हैं। यह संदेश बताता है कि परमेश्वर के सामने वास्तविक भक्ति क्या होनी चाहिए: अन्याय से मुक्ति, दया, और सत्य का व्यवहार।
खुद को समझाने के लिए हल्की संगठनबद्ध सूची
अन्य प्रासंगिक आयतन
1) Amos के अन्य भाग—धन-दौलत की बौद्धिकता से उबरकर सामाजिक न्याय पर बल; 2) अन्य नबियों के संदेश—यद्यपि स्थलों की पवित्रता है, परंतु हृदय में विश्वास और न्याय भी आवश्यक है; 3) पुरानी व्यवस्था के फैलाव में आडंबर के विरुद्ध सत्य की मांग।
संक्षिप्त निष्कर्ष — व्यवहारिक takeaway
हम यह समझें कि पूजा और विश्वास एक साथ तभी प्रकट होते हैं जब हम वास्तविक न्याय, दया और सत्य के जीवन में उतार लाते हैं। बाहरी धार्मिक यात्रा चाहे कितनी भी हो, यदि हृदय में अन्याय है, तो वह ईश्वर के मन को दुखाता है।
Cross-references (संदर्भ-संयोजन)
किंचित दूरी वाले लेकिन संवेदनशील संबंध:
नोट: नीचे दिये गए उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं; विस्तृत पाठ नहीं दिया गया है।
Note: यह पाठ HINIRV संरेखण में समाहित किया गया है; इन उद्धरणों के संरक्षित अर्थ नबियों के संदेश को समकालीन नैतिकता के साथ जोड़ते हैं ताकि पाठक यह समझ सकें कि ईश्वर के सामने वास्तविक भक्ति जीवन-व्यवहार से प्रमाणित होती है, न कि सिर्फ स्थलों के नाम से।
उद्धृत विचारक (संक्षिप्त): मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट विचारों के छोटे उद्धरण यदि मिलें, तो वे यहाँ संकलित किये जाते हैं और उनके मौलिक अर्थ को पाठ के साथ मिलाकर प्रस्तुत किये जाते हैं।