Old Testament
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आमोस 8:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो लोग सामरिया के दोष देवता की शपथ खाते हैं, और जो कहते हैं, 'दान के देवता के जीवन की शपथ,' और बेर्शेबा के पन्थ की शपथ, वे सब गिर पड़ेंगे, और फिर न उठेंगे।”
आमोस 8:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 8:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 5:5 (HINIRV) »
बेतेल की खोज में न लगो, न गिलगाल में प्रवेश करो, और न बेर्शेबा को जाओ; क्योंकि गिलगाल निश्चय बँधुआई में जाएगा, और बेतेल सूना पड़ेगा।

व्यवस्थाविवरण 9:21 (HINIRV) »
और मैंने वह बछड़ा जिसे बनाकर तुम पापी हो गए थे लेकर, आग में डालकर फूँक दिया; और फिर उसे पीस-पीसकर ऐसा चूर-चूरकर डाला कि वह धूल के समान जीर्ण हो गया; और उसकी उस राख को उस नदी में फेंक दिया जो पर्वत से निकलकर नीचे बहती थी।

1 राजाओं 12:28 (HINIRV) »
अतः राजा ने सम्मति लेकर सोने के दो बछड़े बनाए और लोगों से कहा, “यरूशलेम को जाना तुम्हारी शक्ति से बाहर है इसलिए हे इस्राएल अपने देवताओं को देखो, जो तुम्हें मिस्र देश से निकाल लाए हैं।”
आमोस 8:14 का संदर्भ और उसका संदेश
Immediate setting (कथानक का परिचय): इस पद के प्रभावी संदर्भ में Amos भविष्यवक्ता यह बताते हैं कि इस्राइल के लोग धार्मिक आस्थाओं में दिखावटी पाखंड की गहराई में फँस गए हैं। सामरिया के दोष देवता की शपथ, दान के देवता की शपथ, और बेर्शेबा के पन्थ की शपथ जैसे अहंकारपूर्ण और अराजक धार्मिक प्रतीकों की कड़वी दृष्टि उनके नैतिक पतन की ओर इशारा करती है। यह भाष्य उस समय के सामाजिक-धार्मिक ढांचे को उजागर करता है जिसमें लोग ईश्वर के प्रति सच्ची वफादारी नहीं, बल्कि तुष्टिकरण और बहानेबाजी के माध्यम से अपने हित साधते थे।
पाठ का मूल भाव और ईश्वर का वाचा
यह वाक्य ईश्वर की पवित्रता और एकनिष्ठता की मांग को स्पष्ट करता है। देव-प्रतिष्ठाओं पर शपथ लेना या धार्मिक प्रतीकों के नाम पर दुष्कामना करना, न केवल अदालतों में झूठे आचार-व्यवहार को प्रोत्साहित करता है, बल्कि यह बतौर सामाजिक व्यवहार ईश्वर के आदर्शों से टकराने जैसा है। ईश्वर के सामने हर सतह-धर्म का प्रहार असत्य है; वास्तविक विश्वास वह है जो ज़िंदगी के हर क्षेत्र—व्यवहार, न्याय, और दयालुता—में प्रकट हो।
मुख्य शब्दों और चित्र-विधान की व्याख्या
अन्य उद्धरणीय प्रासंगिक पाठ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
1) यहूदा-यहीआ का आग्रह कि ईश्वर के introduces केवल बाहरी धर्म से नहीं, बल्कि हृदय की निष्ठा से होता है।
2) मिसाल 16:6 में कर्म के साथ प्रेम और सच्चाई की महक का निर्देश; जो शपथ-करामात से नहीं, ईमानदार अनुसरण से सुधरता है।
3) होशे 4:6—ज्ञान की कमी से समाज के आचार-व्यवहार का ढहना; धर्म के बाहरी प्रदर्शन से भीतर की पवित्रता आवश्यक है।
नोट: उपरोक्त क्रॉस-रेफरेंसेस गीतात्मक रूप से पाठ से संबंध दिखाते हैं, बिना पूर्ण टेक्स्ट उद्धृत किए।
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
आज के समाज में भी कई बार भिन्न-भिन्न धार्मिक उपक्रम दिखावटी प्रतीत होते हैं—शपथ और प्रतिज्ञाएं बहाने बनकर बाहरी प्रतीकातों के माध्यम से विश्वास की जगह राजनीतिक-समाजिक हितों की पूर्ति करते हैं। इस पाठ से सीख यह है कि ईश्वर को आत्मा और सत्य से प्यार किया जाना चाहिए, न कि केवल नाम-धर्म या सामाजिक प्रमाणों से। व्यवहार में ईमानदारी, न्याय और दयालुता को प्रमुख बनाएं; जैसे Amos कहते हैं, बाहरी परिधान की पूजा से अधिक आंतरिक सच और नैतिकता महत्वपूर्ण है।
संरचना सार
- तत्काल संदर्भ: Amos की पदयात्रा में धार्मिक दिखावाद पर चोट।
- ध्येय: ईश्वर के साथ सच्ची वफादारी और आंतरिक परिवर्तन की आवश्यकता।
- शब्दार्थ संकेतक: सामरिया के देवताओं, दान के देवता, बेर्शेबा—तीनों प्रतीकात्मक चिह्न जो ढोंग के रास्ते खोलते हैं।
- क्रॉस-रेफरेंसेस: उपयुक्त संदर्भ जो आचरण और हृदय की निष्ठा पर बल देते हैं।
- आज का पाठ: बाहरी दिखावे के बजाय आंतरिक आध्यात्मिक ईमानदारी की जरूरत।