Old Testament
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आमोस 8:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, “देखो, ऐसे दिन आते हैं, जब मैं इस देश में अकाल करूँगा; उसमें न तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी।
आमोस 8:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 8:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 74:9 (HINIRV) »
हमको अब परमेश्वर के कोई अद्भुत चिन्ह दिखाई नहीं देते; अब कोई नबी नहीं रहा, न हमारे बीच कोई जानता है कि कब तक यह दशा रहेगी।

1 शमूएल 3:1 (HINIRV) »
वह बालक शमूएल एली के सामने यहोवा की सेवा टहल करता था। उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था; और दर्शन कम मिलता था।

2 इतिहास 15:3 (HINIRV) »
बहुत दिन इस्राएल बिना सत्य परमेश्वर के और बिना सिखानेवाले याजक के और बिना व्यवस्था के रहा।
आमोस 8:11 का संदर्भ और उद्देश्य
उत्पत्ति-पत्र वाले समय के भीतर यह योम-परिस्थितियों का उद्घाटन करता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के सामने एक आंतरिक अकाल को लाता है—एक ऐसा समय जब भौतिक आहार और जल का अभाव नहीं होगा, परन्तु आत्मिक भूख भयावह होगी। Amos के दिनों में इज़राइल के व्यापारिक और धार्मिक भ्रष्टाचार को देखते हुए यह वाणी यह बताती है कि ईश्वर के वचनों की आवश्यकता लोगों के जीवन का वास्तविक भोजन है। यह आकाश से नहीं गिरती, बल्कि वह चेतावनी है कि परमेश्वर के कथन सुनना और उसकी व्यवस्था मानना वह पहला और अंतिम दान हो जाएगा जो शांति और नैतिकता के लिए अनिवार्य है.
मध्य स्थित अर्थ
यह वाणी एक चेतावनी है कि असल अकाल भौतिक आहार के बजाय आत्मिक भूख में है। जितना अधिक लोग परमेश्वर की सेवार्थ शब्द सुनने से और उसकी न्याय-कथा स्वीकार करने से दूर रहते हैं, उतना ही वे आध्यात्मिक जीवन से निर्जला हो जाते हैं। ईश्वर अपने तवनित न्याय और वचनों के माध्यम से समाज की गड़बड़ी को उजागर करते हैं ताकि लोग फिर से चिरंजीवी जीवन के लिए रूटीन बनाएं—यानी परमेश्वर के शब्दों के अनुसार रीति-रिवाज और न्यायपूर्ण व्यवहार।
तीन प्रमुख थीम
अनुसंगीय पाठ
यशाय, मत्ती, और विभागों की वाणी में समान विचार उभरते हैं: आत्मिक भूख वह सत्य है जिसकी कमी से समुदाय पतन की ओर बढ़ता है; परन्तु परमेश्वर की वाणी से प्रवृत्ति और नीति सुधरती है।
व्यावहारिक चिंतन
संक्षिप्त समाप्यान
आमोस 8:11 एक स्पष्ट चेतावनी है: परमेश्वर अपनी वाणी से आत्मा के भूख को भरते हैं, न कि केवल भौतिक कमी के कारण। यह वचन याद दिलाता है कि धार्मिक आडंबर नहीं, परिशुद्ध औरerecht जीवन परमेश्वर के साथ सही संबंध की कुंजी है.
क्रॉस-रेफरेंस
यशाय 55:2-3—आत्म-भोजन की खोज और परमेश्वर की वाणी से तृप्ति का महत्व बतलाती है; यह भी दर्शाती है कि आध्यात्मिक आहार ही जीवन की वास्तविक आवश्यकता है।
मतयी 4:4—मनुष्य केवल अन्न से नहीं जीता, पर पुरे शब्द से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है; वचनों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल देता है।
यूहन्ना 4:13-14—यीशु ने जल से अधिक, पृर्थी पर आने वाले जल की आवश्यकता बताई; आत्मिक जीवण के लिए ईश्वर के वचन के अनुसार जीवन धारा चाहिए।
नोट्स: पुराने टिप्पणीकारों के संकल्प
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के पुराने टिप्पणीकारों के साथ, यह पाठ यह सार देता है कि परमेश्वर के न्याय और वाक्यों से ही समाज और व्यक्ति की वास्तविक स्थिरता मिलती है। यदि इन दार्शनिक प्रवचनों के छोटे उद्धरण उपलब्ध हों, वे स्पष्ट रूप से संकेत करेंगे कि आत्मिक भूख ही अकाल की वास्तविक पहचान है, और वचनों को सुनना ही उद्धार की दिशा है।