Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीआमोस 8:8 बाइबल पद की व्याख्या
आमोस 8:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्या इस कारण भूमि न काँपेगी? क्या उन पर के सब रहनेवाले विलाप न करेंगे? यह देश सब का सब मिस्र की नील नदी के समान होगा, जो बढ़ती है, फिर लहरें मारती, और घट जाती है।”
आमोस 8:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
आमोस 8:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

आमोस 9:5 (HINIRV) »
सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के स्पर्श करने से पृथ्वी पिघलती है, और उसके सारे रहनेवाले विलाप करते हैं; और वह सब की सब मिस्र की नदी के समान हो जाती हैं, जो बढ़ती है फिर लहरें मारती, और घट जाती है।

होशे 4:3 (HINIRV) »
इस कारण यह देश विलाप करेगा, और मैदान के जीव-जन्तुओं, और आकाश के पक्षियों समेत उसके सब निवासी कुम्हला जाएँगे; और समुद्र की मछलियाँ भी नाश हो जाएँगी।

भजन संहिता 18:7 (HINIRV) »
तब पृथ्वी हिल गई, और काँप उठी और पहाड़ों की नींव कँपित होकर हिल गई क्योंकि वह अति क्रोधित हुआ था।
मुख्य विचार: भूमि की काँपन और शोक– Amos 8:8
आमोस 8:8 में धरती के अशांत और अस्थिर रहन-सहन के दृश्य के साथ एक अवरोधपूर्ण चेतावनी है: भूमि कैसे काँपेगी, भारी विलाप कैसे उठेंगे, और मिस्र-नील नदी के जैसे उफनते लेकिन अंततः घटते मोड़ की प्रतीक्षा होगी। यह पंक्ति विमर्श करती है कि धार्मिक अवहेलना और सामाजिक अन्याय के कारण परमेश्वर की सन्तानें कहाँ टिकेंगी। यह मिस्र की प्रसिद्ध उथल-पुथल का चित्र प्रस्तुत कर जीवन-निरीक्षण करवाती है कि वस्त्र-आकर्षणों और बेरहमी के बीच इन्सान का प्रभु-निष्ठा कितना टिक सकता है।
पाठ की साहित्यिक संदर्भ-आधार
आमोस के लेखन में भूख, उपहास और न्याय के मुद्दे बारंबार उठते हैं; यहाँ भी व्यवस्था-केन्द्रित असमानताओं के विरुद्ध जनता के विक्षोभ पर संकेत है। भूमि के काँपने का चित्र प्रतीक है किसी भी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था के क्षय-युग की। यह शास्त्र में बार-बार देखा गया है कि जब सामाजिक न्याय से विधान-निष्ठा टूटती है, तब प्रकृति भी अपने विनाशकारी संदेश के साथ बोल उठती है।
विश्वासिक-तत्व और सिद्धान्तिक महत्व
1) न्याय की मांग: यह उद्घोषण करता है कि अनाचार के कारण समाज में असामनता गढ़ी जाती है और परमेश्वर न्याय चाहता है। 2) प्रकृति-प्रतीक: भूमि की काँपन और तरंग-सी नदियों की उफान-घटना एक चेतावनी है कि सांसारिक संपन्नता क्षणिक है, यदि धार्मिक जीवनी और सामाजिक व्यवहार एकरूप नहीं है। 3) दया और विनय की माँग: केवल औपचारिक पूजा से नहीं, बल्कि अत्याचार से मुक्त समाज बनता है।
Cross references और उनसे जुड़ी संक्षिप्त व्याख्या
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि Amos 8:8 का संदेश केवल भावनात्मक भय नहीं, बल्कि समुदाय-न्याय की अवसथा है जो अंततः पृथ्वी तक पहुँचेगी।
पढ़ने हेतु प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
आमोस का संदेश बताता है कि परमेश्वर की नज़र में सामाजिक-आर्थिक असमानता और मानव-जोखिम के बीच अस्थिरता है। भूमि का काँपना, विलाप और समुद्र-सी उफान एक चेतावनी है कि परमेश्वर न्याय के दिन सभी के deeds का हिसाब मांगेंगे। साधना के साथ सत्य-जीवन ही स्थिरता देता है और समुदाय को दयालु, न्यायप्रिय और सत्य के अनुरूप बनाता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण ( Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से जो सीधा उद्धरण उपलब्ध हो):
“अर्थात् देश-समाज तब तितर-बितर हो जाएगा जब दुष्टों के कारण न्याय-हिंसा उठती है।”
नोट: यहां ऊपर दिए गए स्पष्ट उद्धरण पवित्र-ग्रंथ के लेखक Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण पाठ से सीधे उद्धृत नहीं हैं; ये पाठ-विश्लेषण उनके विचारों के सार के अनुरूप परंतु संक्षिप्त सारावली के रूप में प्रस्तुत हैं ताकि पाठ्य-परिप्रेक्ष्य स्पष्ट रहें।