Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीआमोस 8:6 बाइबल पद की व्याख्या
आमोस 8:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कि हम कंगालों को रुपया देकर, और दरिद्रों को एक जोड़ी जूतियाँ देकर मोल लें, और निकम्मा अन्न बेचें?”
आमोस 8:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
आमोस 8:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

आमोस 2:6 (HINIRV) »
यहोवा यह कहता है: “इस्राएल के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण, मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि उन्होंने निर्दोष को रुपये के लिये और दरिद्र को एक जोड़ी जूतियों के लिये बेच डाला है।

लैव्यव्यवस्था 25:39 (HINIRV) »
“फिर यदि तेरा कोई भाईबन्धु तेरे सामने कंगाल होकर अपने आप को तेरे हाथ बेच डाले, तो उससे दास के समान सेवा न करवाना।

नहेम्याह 5:1 (HINIRV) »
तब लोग और उनकी स्त्रियों की ओर से उनके भाई यहूदियों के विरुद्ध बड़ी चिल्लाहट मची।
आमोस 8:6 का हिन्दी व्यंग्यात्मक विचार
सीधे अर्थ की स्पष्ट व्याख्या: इस पद में परमेश्वर के नीतिगत आह्वान में उन लोगों की निंदा है जो गरीबों को दाम के बदले खरीदना चाहेंगे—कंगालों को रुपया देकर, दरिद्रों को एक जोड़ी जूतियाँ देकर मोल लेना चाहते हैं—यानी मनुष्यों के जिये हुए जीवन के मूल्य को ठेठ व्यापार-सामग्री के रूप में आँकना। यह दुरभावना, आर्थिक दूषित मूल्य-निर्धारण, और दबे-कुचलों के अधिकारों का उल्लंघन है। परमेश्वर के न्याय में ऐसा शोषण अस्वीकार्य है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
आमोस पुस्तक उत्तराद्र्ध के काल के समाज-व्यवस्था की असमानताओं को उजागर करती है। बीच के दशकों में समृद्ध और गरीब के बीच फासला बढ़ रहा था; धार्मिक औचित्य के नाम पर भी बहाने थे, पर नैतिकता टूट रही थी। Amos स्पष्ट रूप से कहता है कि आस्था और विधान, दोनों के नाम पर यदि बाजार-आचरण चलता रहे, तो परमेश्वर का न्याय समय पर टूट पड़ेगा।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीमात्मक सूची
अनुबंधित क्रॉस-रेफरेंसेस
- यशायाह 1:23-24: सामाजिक न्याय और अपमानितों के प्रति ईश्वर की शांति की मांग। कृप्या ध्यान दें कि यहाँ भी बाह्य रिवाज के पीछे असली व्यवहार का मूल्य है।
- मीका 6:11: अगर पैसों के कारण निष्पक्षता टूटे, तो न तो नमक की भूमिका रहती है न सत्य का मार्ग।
- मत्ती 23:23: धार्मिक नियमों के भीतर के अन्याय के विरुद्ध चेतावनी—वचेन्द्रित दिखावे से असल न्याय पीछे नहीं छूट सकता।
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि पवित्र विधान में सत्यता और प्रेम का मेल अनिवार्य है; धन-लिप्सा से कमजोरों के अधिकार खत्म नहीं होने चाहिए।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हममें से प्रत्येक को चाहिए कि आर्थिक लाभ के पीछे नैतिक सीमाओं को न खोएं। विश्वास-व्यवहार और समाज-उद्धार के लिए प्रेरित रहें: जरूरतमंदों के अधिकारों के लिए साहचर्य और सहायता का व्यवहार, धर्म के नाम पर शोषण से बचना, और समुदाय में निष्पक्ष-न्याय का वातावरण बनाना।
महत्वपूर्ण टिप्पणी
यह पाठ क्रूस-आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के नैतिक दायित्व पर केंद्रित है। प्रकाशित चर्चित टिप्पणीकार Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के संक्षिप्त संकेत समय-समय पर पाठक को प्रेरित करते हैं। यदि आप उनमें से किसी की विशिष्ट उद्धरण देखना चाहें, तो वे धार्मिक नैतिकता और समाज-न्याय के संबंध को उच्चारित करते हैं—परन्तु इसे यहां संक्षेप में स्मरणीय रखा गया है, ताकि मूल संदेश स्पष्ट रहे।