Old Testament
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आमोस 8:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं तुम्हारे पर्वों के उत्सव को दूर करके विलाप कराऊँगा, और तुम्हारे सब गीतों को दूर करके विलाप के गीत गवाऊँगा; मैं तुम सब की कटि में टाट बँधाऊँगा, और तुम सब के सिरों को मुँड़ाऊँगा; और ऐसा विलाप कराऊँगा जैसा एकलौते के लिये होता है, और उसका अन्त कठिन दुःख के दिन का सा होगा।”
आमोस 8:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 8:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 6:26 (HINIRV) »
हे मेरी प्रजा कमर में टाट बाँध, और राख में लोट; जैसा एकलौते पुत्र के लिये विलाप होता है वैसा ही बड़ा शोकमय विलाप कर; क्योंकि नाश करनेवाला हम पर अचानक आ पड़ेगा।

जकर्याह 12:10 (HINIRV) »
“मैं दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियों पर अपना अनुग्रह करनेवाली** और प्रार्थना सिखानेवाली आत्मा उण्डेलूँगा, तब वे मुझे ताकेंगे अर्थात् जिसे उन्होंने बेधा है, और उसके लिये ऐसे रोएँगे जैसे एकलौते पुत्र के लिये रोते-पीटते हैं, और ऐसा भारी शोक करेंगे, जैसा पहलौठे के लिये करते हैं। (यूह. 19:37, मत्ती 24:30, प्रका. 1:7)

यिर्मयाह 48:37 (HINIRV) »
क्योंकि सबके सिर मुँड़े गए और सब की दाढ़ियाँ नोची गई; सबके हाथ चीरे हुए, और सब की कमरों में टाट बन्धा हुआ है।
Amos 8:10 पर टिप्पणी (HINIRV)
इस आयत मेंAMOS पुस्तक के प्रवचन का एक उग्र अंतर्देश है, जहाँ परमेश्वर के न्यायदर्शी निर्णयों की धमक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत है। भविष्यवक्ता आमोस ने उत्तर-दृष्टि से यह दिखाया कि इजराइल के समृद्ध और उल्लासपूर्ण समय के बावजूद परमेश्वर उनकी आडम्बरीताओं, अन्यायी व्यवस्था और धार्मिक दिखावे के पीछे के असली दिल को नहीं भूलेंगे। यह वाक्य विशेषकर त्योहारों और गीतों के उत्सवों के पीछे एक गहरा विलाप लाता है—यानी आनंद के रूप में दिख रहे धार्मिक संस्कारों के भीतर भी आंतरिक अविश्वास और निष्क्रियता की जड़ है।
केंद्रीय अर्थ
परमेश्वर इजराइल के उन त्योहारों और गीतों को विलाप से बदलना चाहते हैं; इसका मतलब तब होता है जब उपवास और उत्सव केवल बाहरी कर्मकांड बन जाएं, और दिल की ईमानदारी, पक्ष-पसलापन, और प्राणी की जरूरतें नजरअंदाज हो जाएँ। टाट बँधना और सिर मूँड़ना—ये संकेत हैं कि पाप के कारण सामाजिक-आर्थिक अन्याय और आध्यात्मिक कठोरता दोनों प्रतिक्रिया में आ सकते हैं। अंततः यह विलाप एक सज़ा-रूप नहीं, बल्कि पथ परिवर्तन की चेतावनी है ताकि लोग परमेश्वर के साथ सही सम्बन्ध की ओर लौटें।
दो तीन प्रमुख विषय
संदर्भ-चर्चा और cross-references
1) जैसे दिखाता है: अन्याय और धार्मिक दिखावे के बीच टकराव—यशायाह 1:11-17 के तहत बाह्य अनुष्ठानों के साथ अंतर्मन की पवित्रता की आवश्यकता।
2) दया और न्याय की आह्वान: मीका 6:6-8 में परमेश्वर सही आचरण और करुणा की महत्ता पर जोर देते हैं; बाहरी कर्मकांड से अधिक दिल की न्यायपरकता आवश्यक है।
3) दर्दनाक परिणाम और परिवर्तन: दानिय्येल 9:27 जैसी चेतावनियाँ बताती हैं कि सांसारिक लालच के कारण सही समय पर सुधार संभव है जब लोग अपनी राह बदलते हैं।
व्यावहारिक विचार
व्यावहारिक रूप से, यह आयत हमें यह सीख देती है कि किसी भी धार्मिक अवसर के पीछे का उद्देश्य वास्तविक मन:स्थिति और सामाजिक-नैतिकता होनी चाहिए। यदि हम अपने जीवन में किसी समुदाय के साथ दया दिखाने, ज़रूरतमंदों की सहायता करने और न्यायपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने को अब तक भूलते रहे हैं, तो परमेश्वर हमें सुधार के अवसर दे सकता है—कभी-कभी कठिन अनुभवों के माध्यम से।
संक्षिप्त निष्कर्ष
AMOS 8:10 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर केवल धार्मिक रीति-रिवाज़ नहीं बल्कि दिलों की ईमानदारी और सामाजिक न्याय भी देखता है। बाहरी उल्लास और उत्सव तब तक मूल्यहीन हैं जब दिल से भक्ति नहीं और समाज में दरदों के प्रति संवेदना नहीं। विलाप का यह दिन-रंग शुद्ध परिवर्तन और सचेत परिशोधन की पुकार है।
छोटे उद्धरण Moż
कई प्राचीन टीकाकारों की सामान्य दृष्टि के अनुसार: “धर्म की बाहरी शिक्षा से अधिक आंतरिक परिवर्तन आवश्यक है।” (यह सार सामान्य चर्चित टिप्पणियों के अनुरूप है; नीचे के उद्धरण केवल संदर्भ के लिए शामिल हैं, पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण नहीं हैं।)
Cross-reference संकेतित विचार: यह आयत सीधे अन्याय-आडंबर-विरोधी प्रवचन से जुड़ती है और निष्कर्ष देती है कि ईमानदार भक्ति और दयाभावना ही सही उत्सव बनाते हैं।
उद्धृत विचार: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसी公-domain टीका-विश्वास—यदि उनके छोटे-छोटे कथन उपलब्ध हों, तो इन्हें विवेकपूर्ण रूप से मिलाकर एक समेकित निष्कर्ष दिया गया है।