Old Testament
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आमोस 5:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो कचपचिया और मृगशिरा का बनानेवाला है, जो घोर अंधकार को भोर का प्रकाश बनाता है, जो दिन को अंधकार करके रात बना देता है, और समुद्र का जल स्थल के ऊपर बहा देता है, उसका नाम यहोवा है।
आमोस 5:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 5:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 4:13 (HINIRV) »
देख, पहाड़ों का बनानेवाला और पवन का सिरजनेवाला, और मनुष्य को उसके मन का विचार बतानेवाला और भोर को अंधकार करनेवाला*, और जो पृथ्वी के ऊँचे स्थानों पर चलनेवाला है, उसी का नाम सेनाओं का परमेश्वर यहोवा है! (2 कुरि. 6:18,)

आमोस 9:6 (HINIRV) »
जो आकाश में अपनी कोठरियाँ बनाता, और अपने आकाशमण्डल की नींव पृथ्वी पर डालता, और समुद्र का जल धरती पर बहा देता है, उसी का नाम यहोवा है।

आमोस 5:8 — तत्कालीन संदर्भ में देखते हुए
यह आयत उन लोगों से बातचीत करती है जो उन्नत सामाजिक और धार्मिक ढाँचों के भीतर अपने दायित्वों से भटक चुके थे। कचपचिया और मृगशिरा का बनावटी या समृद्धिदायक चित्रण यहाँ एक बार फिर दिखाता है कि परमेश्वर के सामने दिखावा और बाहरी पवित्रता नहीं, बल्कि न्याय और सत्य की धारणा मायने रखती है। परमेश्वर वही है जो अंधकार को प्रकाश बनाकर दिन और रात के क्रम को स्थापित करता है; वही समुद्र के जल को नियंत्रण में रखने वाला है—यही उसकी ऐतिहासिक और नैतिक शक्ति का संकेत है। इस आयत के साथ जुड़ा मूल संदेश यह है: ईमानदार जीवन वही है जो परमेश्वर के प्रकाश में न्याय और करुणा को उन्नत करे।
आयत के भीतर का अर्थ और शब्दों की clarification
इस विषय से जुड़े प्रमुख संदर्भ
संख्या 16:5 और यूह 1:5 जैसे पाठ यह स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर अँधकार पर प्रकाश डालने और अठखेलियाँ करने वाले लोगों के बीच न्याय की आवश्यकता पर जोर देते हैं। अन्य प्रेषित लेखों में भी यह विचार उभरते हैं कि परमेश्वर की नैतिक शासन और दया एकसाथ चलते हैं।
सम्बन्धी बाइबली उद्धरण (Cross-references)
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
- आंतरिक नैतिकता बनाम दिखावा: सामूहिक शक्ति और सामाजिक प्रतिष्ठा के बजाय, आध्यात्मिक वास्तविकता पर टिके रहें। परमेश्वर वह है जो वास्तविक न्याय और करुणा दिखाने वालों को पहचानता है।
- अंधकार से प्रकाश की ओर लौटना: जीवन के कठिन समय में ईश्वर के प्रकाश को ढूंढना और उसे अपने व्यवहार में उतारना—वह विवेक, सही निर्णय और निष्पक्षता की ओर प्रेरित करता है।
- प्रभुत्व का सही उपयोग: सत्ता और संप्रभुता केवल स्वयं के लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के कमजोरों के उद्धार के लिए हो—यही परमेश्वर की इच्छा है।
दो संवादात्मक निष्कर्ष
यह आयत एक रूपरेखा देती है कि कैसे विश्वासी व्यक्ति, अपने जीवन के हर क्षेत्र—राजनीति, सामाजिक कार्य, और व्यक्तिगत आचरण—में God-ward झुकाव और सत्य की कसौटी बनाए रखें। साथ ही यह याद दिलाती है कि परमेश्वर का नियंत्रण हर प्रकार के अंधकार पर प्रकाश डाल सकता है, और वही सही निर्णय की आख़िरी सत्ता है।
नोट: इस पाठ से संबंधित विधिवत उद्धरण यदि उपलब्ध हों, वे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के कालजयी व्याख्यान-संदर्भ से लिए जा सकते हैं; नीचे दिए गए स्रोत-उद्धरणों को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है।