Old Testament
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आमोस 5:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
चाहे तुम मेरे लिये होमबलि और अन्नबलि चढ़ाओ, तो भी मैं प्रसन्न न होऊँगा, और तुम्हारे पाले हुए पशुओं के मेलबलियों की ओर न ताकूँगा।
आमोस 5:22 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 5:22 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मीका 6:6 (HINIRV) »
“मैं क्या लेकर यहोवा के सम्मुख आऊँ, और ऊपर रहनेवाले परमेश्वर के सामने झुकूँ? क्या मैं होमबलि के लिये एक-एक वर्ष के बछड़े लेकर उसके सम्मुख आऊँ?

यशायाह 66:3 (HINIRV) »
“बैल का बलि करनेवाला मनुष्य के मार डालनेवाले के समान है; जो भेड़ का चढ़ानेवाला है वह उसके समान है जो कुत्ते का गला काटता है; जो अन्नबलि चढ़ाता है वह मानो सूअर का लहू चढ़ानेवाले के समान है; और जो लोबान जलाता है, वह उसके समान है जो मूरत को धन्य कहता है। इन सभी ने अपना-अपना मार्ग चुन लिया है, और घिनौनी वस्तुओं से उनके मन प्रसन्न होते हैं।

आमोस 4:4 (HINIRV) »
“बेतेल में आकर अपराध करो, और गिलगाल में आकर बहुत से अपराध करो; अपने चढ़ावे भोर को, और अपने दशमांश हर तीसरे दिन ले आया करो;
मुख्य व्याख्या बिंदु
आमोस 5:22 का मूल संदेश है कि परमोपकार के बाह्य कर्म, जैसे होमबलि और अन्नबलि चढ़ाना, तब भी परमेश्वर की कृपा और नैतिक वातावरण के साथ संगत नहीं होते जब हृदय, व्यवहार और सामाजिक न्याय से पृथक हो। असली उपासना वह है जो ईमानदारी, दयालुता और न्याय के साथ जुड़ी हो; जब धर्म के कर्म’ins से समाज में अन्याय और दमन बढ़े, तब परमेश्वर संतुष्ट नहीं होते। इस पद का तात्पर्य यह है कि पूजा-अर्चना के साथ-साथ आचरण, हृदय की निष्ठा और समाजिक न्याय भी अनिवार्य हैं।
साहित्यिक संदर्भ
Amos की पुस्तक में विरोधाभासों भरा एक ओजपूर्ण संदेश है: लोग पवित्र मंदिर में अर्पण करते हैं पर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में असफल रहते हैं। वाचा-न्याय और त्याग-आभार के बिना धार्मिक कर्म स-essential hollow ritual बन जाते हैं। यह उद्धारकर्ता-प्रेम से परे एक नियम-संयम का आह्वान है—कि ईश्वर के दर्शनों के साथ व्यवहार, वचन और न्याय की प्रतिज्ञा भी चाहिए।
theological significance
1) पूजा की सही परिभाषा: धार्मिक कर्मों के साथ आंतरिकता और नैतिक चरित्र का मेल।
2) सामाजिक न्याय के आवश्यक संदेश: गरीब-पीड़ित के प्रति संवेदना और उनके अधिकारों की रक्षा के बिना धार्मिक समारोह अधूरा है।
3) ईश्वर की प्रसन्नता बनाम मानव-आराधना: परमेश्वर तब ही प्रसन्न होते when हृदय की सच्चाई और न्याय का जीवन साथ रहे।
Cross-references (संक्षिप्त व्याख्या)
प्रश्न विचारण के लिए
संक्षिप्त निष्कर्ष
आमोस 5:22 स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की प्रशंसा केवल बाहरी क्रिया द्वारा नहीं होती; वह चाहतें हैं कि हमारे प्रेम, न्याय और दया वास्तविक हों। पूजा और न्याय एक साथ चलते हैं। यदि संस्थागत धर्म अपने समाज-न्याय से दूर है, तो परमेश्वर की प्रसन्नता स्थिर नहीं रहती।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मूल विचारों के अद्यतन, सार्वजनिक-डोमेन स्रोतों के आधार पर संक्षेपण किया गया है। यदि उपलब्ध हो, उनके कथनों के छोटे उद्धरण नीचे बताए गए हैं:
उद्धरण संकेत: "..." (Matthew Henry), "..." (Albert Barnes), "..." (Adam Clarke)।