Old Testament
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आमोस 5:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण सेनाओं का परमेश्वर, प्रभु यहोवा यह कहता है: “सब चौकों में रोना-पीटना होगा; और सब सड़कों में लोग हाय, हाय, करेंगे! वे किसानों को शोक करने के लिये, और जो लोग विलाप करने में निपुण हैं, उन्हें रोने-पीटने को बुलाएँगे।
आमोस 5:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
आमोस 5:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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योएल 1:11 (HINIRV) »
हे किसानों, लज्जित हो, हे दाख की बारी के मालियो, गेहूँ और जौ के लिये हाय, हाय करो; क्योंकि खेती मारी गई है

यिर्मयाह 9:17 (HINIRV) »
सेनाओं का यहोवा यह कहता है, “सोचो, और विलाप करनेवालियों को बुलाओ; बुद्धिमान स्त्रियों को बुलवा भेजो;

यिर्मयाह 9:10 (HINIRV) »
“मैं पहाड़ों के लिये रो उठूँगा और शोक का गीत गाऊँगा, और जंगल की चराइयों के लिये विलाप का गीत गाऊँगा, क्योंकि वे ऐसे जल गए हैं कि कोई उनमें से होकर नहीं चलता, और उनमें पशुओं का शब्द भी नहीं सुनाई पड़ता; पशु-पक्षी सब भाग गए हैं।
अर्थ का सीधा परिचय
Amos 5:16 में परमेश्वर यहोवा कहता है कि कारण क्यों रोना-पीटना चाहिए: हर चौकों-चौराहे पर लोग विलाप करेंगे, किसान शोक करेंगे, जो विलाप करने में निपुण हैं, उन्हें रोने-पीटने के लिए बुलाया जाएगा। यहाँ शोक और विलाप एक सामाजिक चेतावनी है, जो अन्याय और समाजिक असमानताओं के विरुद्ध परमेश्वर की दृष्टि को बताता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ आह्वान है कि यहीं के युग के सामजिक दोषों के साथ परमेश्वर के निर्णय का समय है। आमोस एक धार्मिक-योद्धा-न्याय-नायक के रूप में न्याय की बुलाहट देता है: बाहरी पूजा के साथ-साथ आंतरिक और सामाजिक समानता का भी आग्रह। इस अंश में नगर-नगर के हर मार्ग पर गहरे वेदना और शोक की घोषणा है, क्योंकि असमानता, व्यभिचार और शत्रुदर्शी चालों पर परमेश्वर की क्रोध उभर रहा है।
व्याख्यात्मक विचार
- पूरे समुदाय के लिए शोक का निष्कर्ष: यहूदी समाज के बहिष्कृत और दबे-कुचले वर्ग के प्रति भी परमेश्वर की संवेदना है; शोक की यह पुकार केवल व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का आह्वान है।
- चौकों में रोना-पीटना: चौक-चौराहा सार्वजनिक स्थान हैं जहाँ लोग एक-दूसरे से मिलते हैं; यहाँ विरोध और न्याय की आवाजें एक साथ उभरती हैं।
- विलाप करने में निपुण व्यक्ति: यहाँ वे लोग हैं जो दुख और शोक के गीतों को समझते हैं—जिनके शब्द समाज की गड़बड़ स्थितियों को उजागर कर सकें।
संकेतित थीम का सूचीबद्ध संक्षेप
अन्य बाइबिल अंश के साथ संबद्धता
- उद्धार और न्याय के संदर्भ: अन्य जगहों पर भी धार्मिक अनुष्ठान के साथ समाजिक न्याय की मांग मिलती है; यह पाठ दिखाता है कि पूजात्मक कर्म के पीछे वास्तविक नैतिक प्रतिक्रिया आवश्यक है.
- शांति और न्याय के बीच संतुलन: शोक का संकेत केवल दुख व्यक्त नहीं, बल्कि परिवर्तन की शुरुआत है, ताकि असमानताएँ दूर हो सकें।
- सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी: हर मार्ग पर सच के शब्दों की जरूरत है ताकि सब मिलकर सुधार की दिशा में चलें।
रिज़ा निष्कर्ष (व्यावहारिक takeaway)
हमारे समय के सदस्य भी यह सोचें कि ईश्वर की दृष्टि में पूजा--अनुष्ठान समाज के वास्तविक कल्याण के साथ जुड़ना चाहिए। यदि हम बाहरी धर्म के अभ्यास से आगे बढ़कर आंतरिक न्याय और करुणा दिखाएं, तब ही धार्मिकता समाज में टिकेगी।
उद्धृत वस्त्र (ढांचे में आवश्यक उद्धरण)
यहां नीचे दिये गए चारित्रिक उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं; पूर्ण टेक्स्ट उद्धृत नहीं किया गया है: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे-छोटे सार तत्व यदि उपलब्ध हों तो संक्षेप में बताए गए हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेज़
- पुराने ताम्र के न्याय की पुकार: सामाजिक अन्याय के खिलाफ अधिक स्पष्ट मार्गदर्शन मिल सकता है।
- पूजास्थल के साथ जीवन का समन्वय: ईश्वर के सामने सही आचरण का महत्व बढ़ता है।
- व्यवसाय और शोक की पहचान: समुदाय में संवेदना और सहायता का पाठ पढ़ना चाहिए।
नोट: इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के यदि उपलब्ध छोटे कथन मिलते हैं, तो वे सीधे उद्धृत किए जाने के बजाय संकलन में शामिल हैं; आवश्यक स्पष्टता के लिए उनके विचारों का संक्षिप्त सार प्रस्तुत है।