Old Testament
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आमोस 5:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा की खोज करो, तब जीवित रहोगे, नहीं तो वह यूसुफ के घराने पर आग के समान भड़केगा, और वह उसे भस्म करेगी, और बेतेल में कोई उसका बुझानेवाला न होगा।
आमोस 5:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
आमोस 5:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 5:14 (HINIRV) »
हे लोगों, बुराई को नहीं, भलाई को ढूँढ़ो, ताकि तुम जीवित रहो; और तुम्हारा यह कहना सच ठहरे कि सेनाओं का परमेश्वर यहोवा तुम्हारे संग है।

मरकुस 9:43 (HINIRV) »
यदि तेरा हाथ तुझे ठोकर खिलाएँ तो उसे काट डाल टुण्डा होकर जीवन में प्रवेश करना, तेरे लिये इससे भला है कि दो हाथ रहते हुए नरक के बीच उस आग में डाला जाए जो कभी बुझने की नहीं।

यहेजकेल 20:47 (HINIRV) »
और दक्षिण देश के वन से कह, यहोवा का यह वचन सुन, प्रभु यहोवा यह कहता है, मैं तुझमें आग लगाऊँगा, और तुझमें क्या हरे, क्या सूखे, जितने पेड़ हैं, सब को वह भस्म करेगी; उसकी धधकती ज्वाला न बुझेगी, और उसके कारण दक्षिण से उत्तर तक सबके मुख झुलस जाएँगे।
आमोस 5:6 पर विचार: खोज करो यहोवा, तभी जीवित रहो
मुख्य interpretive point: Amos 5:6 में ईश्वरीय खोज और उद्धार का निमंत्रण एक जाना-मानना चेतावनी बनकर प्रस्तुत है। जब लोग असमानताओं और अन्याय के बीच নিজ-स्वार्थ में खो जाते हैं, तब Yahweh का अनुभवजनित सचेतन संपर्क ही जीवन संरक्षित कर सकता है। यह पंक्ति दोहरे ताने-बाने को दिखाती है: सक्रिय खोज ईश्वर की कृपा की कदर है; अवहेलना उसे अनजाने विनाश की ओर ले जा सकता है।
साहित्यिक संदर्भ (Literary Context)
तत्काल संदर्भ: Amos के प्रेरित उपदेशों में न्याय और सत्य का न्यायालयीय उद्घोष है। इस chapter में ईश्वर की मांग है कि लोग वास्तव में न्याय और धार्मिक उद्घोषणा के साथ जीवन बिताएं; वरना अवहेलना से आग-सी भड़केगी। पद 6 विशेष रूप सेérêt यह बताता है कि निवेदन-पूर्ण खोज थीईश्वर से जीवित रहने का मार्ग है, अन्यथा घर-परिवार, खासकर बेतेल, असुरक्षित रह जाएगा।
शास्त्रीय महत्व (Theological significance)
खोज का सिद्धांत—यहोवा की खोज—तहित जीवन के लिए आवश्यक है: धार्मिक क्रिया-कलापों के बाहरी आडंबर से ऊपर उठकर आंतरिक निष्ठा और सामाजिक न्याय चाहिए। यह प्रत्यक्षContrast करता है कि 'यूसुफ के घराने पर आग' जैसी प्रतीकात्मक भाषा से विनाश का खतरा स्पष्ट हो जाता है जब लोग ईश्वर-तुलसी से दूर रहते हैं। यहाँ दया और न्याय का संयुक्त आह्वान है: परमेश्वर को खोजें ताकि जीवित रहें, अन्यथा विनाश का सामना करना पड़ेगा।
अतीत-सम्बद्ध पाठों के साथ संबंध (Cross-references)
इन संदर्भों में समान ध्वनि यह है कि परमेश्वर के पास लौटना, उसकी इच्छा के अनुसार जीवन बिताना ही उद्धार का मार्ग है।
आत्म-चिंतन के प्रश्न (Questions for Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोवा की खोज सचमुच जीवित रहने का मार्ग है। बाहरी धार्मिकता नहीं, बल्कि हृदय की समर्पण और सामाजिक निष्पक्षता पर आधारित जीवन ही परम उद्धार को जन्म देता है। यदि लोग Yahweh को खोजते हैं, तो वह उनकी जीवन-यात्रा को दिशाहीन नहीं रहने देता; वरना आग जैसी तबाही आ सकती है, और उसे रोकने वाला भी नहीं होता।
नोट्स: पूरक उद्धरण (public-domain commentators)
इस प्रविष्टि में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से संगति बिठाने के लिए मूल विचारों के आलोक में संकलन किया गया है। यदि आप चाहेंगे, तो इनमें से कुछ छोटे-छोटे वाक्य सत्य के रूप में उद्धृत किए जा सकते हैं; परन्तु पूर्ण पाठ की उद्धरण संरचना यहाँ संक्षेप में रखी गई है।