Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीआमोस 5:24 बाइबल पद की व्याख्या
आमोस 5:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु न्याय को नदी के समान, और धर्म को महानद के समान बहने दो।
आमोस 5:24 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 5:24 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मीका 6:8 (HINIRV) »
हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले? (मत्ती 23:23, यशा. 1:17)

होशे 6:6 (HINIRV) »
क्योंकि मैं बलिदान से नहीं, स्थिर प्रेम ही से प्रसन्न होता हूँ*, और होमबलियों से अधिक यह चाहता हूँ कि लोग परमेश्वर का ज्ञान रखें। (मत्ती 9:13, मत्ती12:7, मर. 12:33)

आमोस 5:24 का अभिप्राय और संदर्भ
इस पद का प्रकाश आमोस के संदेश के केंद्र से जुड़ता है—यहोवा के साथ सच्चे न्याय और धर्म का सजीव, जीवंत व्यवहार। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में इजरायल के लोगों को सामाजिक अन्याय, धार्मिक औपचारिकता और ईश्वर-भक्ति के दर्दपूर्ण भेदभाव के बीच सच-न्याय को अपनाने हेतु बुलाया गया है। आमोस यह स्पष्ट कर रहे हैं कि धर्मशास्त्र की ध्वनि और पर्व-त्योहार तब तक प्रभावी नहीं जब जीवन के व्यवहार में न्याय, करुणा और सत्य नहीं बहते।
केंद्रीय अर्थ
पद कहता है: "परन्तु न्याय को नदी के समान, और धर्म को महानद के समान बहने दो।" यहाँ न्याय से आशय सामाजिक-समानता, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और साझा कल्याण है; धर्म का अर्थ है ईश्वर से वास्तविक संलग्नता, निष्ठा और धार्मिक आचरण जो समाजिक व्यवहार से मेल खाता हो। लेखक कहता है कि ईश्वर के साथ निष्ठा का वास्तविक परीक्षण यह है कि न्यायिक नीतियाँ और धर्मिक आचरण कैसे विचरण करते हैं—क्या वे एक ओर से प्रवाह में बहते हैं या धार्मिक कर्मों के बावजूद अन्याय की नदियाँ बन जाते हैं?
मुख्य thèmes
संबंधित पद और विचार
अपुष्टपूर्ण संदर्भ में ईमानदारी बनाम दिखावटी धर्म से जुड़े अन्य कथन: यह संदेश अमूमन न्याय और धर्म के वास्तविक समन्वय पर जोर देता है। नीचे के संदर्भ देखने योग्य हैं:
ärtव्य: व्यवहारिक चिंतन
जीवन में न्याय का प्रवाह और धर्म का सच्चा अनुपात स्थापित करने के लिए संस्थागत अनुकम्पा और व्यक्तिगत करुणा की आवश्यकता है। अपने समुदाय के लिए आप क्या कर सकते हैं—न्याय के रास्ते साफ़ करना, गरीबों के साथ व्यवहार सुधरना, और प्रचलित अन्याय के विरुद्ध खड़े होना—ये सभी इस पाठ के परिचायक हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और संकेत
1) निर्गमन 23:6–9 के समान विचार: समाज में निष्पक्षता और दायित्व के लिए कानून की व्याख्या, भ्रष्टाचार के खिलाफ दृढ़ता।
2) मत्ती 5:7 के संबंध में करुणा-न्याय: दयालु रहकर भी सत्य और निष्पक्षता को बनाए रखना।
3) यशायाह 1:17 के संदर्भ में आध्यात्मिक धर्म की वास्तविकता: सीख और कर्म का मिलन।
छोटा विचार-आत्म-चिंतन
क्या मेरा जीवन न्याय और धर्म को एक साथ बहाने देता है? क्या मैं सामाजिक-आयिकताओं में ईश्वर के मानदंडों के अनुसार चल रहा हूँ, न कि धार्मिक दिखावे में?
संक्षेप
आमोस 5:24 न केवल नैतिक निर्देश देता है, बल्कि ईश्वर के लिए एक जीवंत आह्वान है कि हमारी धार्मिकता और हमारा न्याय एक ही धारा से प्रवाहित हों। ताकि हमारा समाज और हमारा समुदाय सचमुच ईश्वर के नाम पर उन्नत और प्रभु से संबद्ध बना रहे।
नोट: नीचे उद्धृत दो-तीन पुराने पंक्तिबद्ध विचारधाराएं केवल संदर्भ हेतु हैं; पूर्ण पाठ के उद्धरण नहीं दिए गए हैं—उद्धरण संकेतक पाठ के प्रवाह में समाहित हैं।