Old Testament
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आमोस 5:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जैसा कोई सिंह से भागे और उसे भालू मिले; या घर में आकर दीवार पर हाथ टेके और साँप उसको डसे।
आमोस 5:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 5:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 15:2 (HINIRV) »
और यदि वे तुझसे पूछें 'हम कहाँ निकल जाएँ? तो कहना 'यहोवा यह कहता है, जो मरनेवाले हैं, वे मरने को चले जाएँ, जो तलवार से मरनेवाले हैं, वे तलवार से मरने को; जो अकाल से मरनेवाले हैं, वे आकाल से मरने को, और जो बन्दी बननेवाले हैं, वे बँधुआई में चले जाएँ।' (प्रका. 13:10)

यिर्मयाह 48:43 (HINIRV) »
यहोवा की यह वाणी है कि हे मोआब के रहनेवाले, तेरे लिये भय और गड्ढा और फंदे ठहराए गए हैं।

नीचे अर्थ: आमोस 5:19 का संज्ञानात्मक संक्षेप
इस पद का स्पष्ट संदेश है: जब कोई व्यक्ति बुराईयों के कारण समाज में कठिनाई या आपदा का सामना करता है, तो उसे अचानक और भयावह परिणाम मिलते हैं, जैसे जंगल के जानवरों से बचना कठिन होना या आश्रम की दीवार पर हाथ रखने वाला व्यक्ति साँप के डस लेने से मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। यह बहुधा दयनीयता, भागते समय सुरक्षा की कमी, और पूर्व तैयारी के अभाव की चेतावनी के रूप में उद्धृत होता है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
इस पद में Amos की ओजस्वी नीतिगत आलोचना है—वे इज़राइल के सामाजिक-धर्मिक असंतुलन और अधर्मपूर्ण उपासना पर कटाक्ष करते हैं। एक समय था जब लोग धार्मिक रीतियों के भीतर जीवन के व्यवहारिक सत्य को भूल जाते थे। अतः बदला हुआ भाग्य, अचानक विपत्ति, और असुरक्षा का चित्र यहां दिखाया गया है, ताकि नैतिक चेतावनी स्पष्ट हो सके—धर्म और व्यवहार एक साथ जिम्मेदार हों।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु (संक्षेप)
अनुशासनात्मक cross-references और उनका संक्षेप व्याख्या
यूहन्ना 15:5 (cross-reference): निर्भरता का मूल सूत्र—जहाँ मैं हूँ वही जीवन है; बिना मुवेफर नहीं। यह बताता है कि आत्मिक सुरक्षा परमेश्वर के साथ निर्भरता में है, न कि स्वयं के बल पर।
यशायाह 57:1-2 (cross-reference): धार्मिक समाज में दुविधा के बीच व्यक्ति की शांति और निष्कपट आत्मा का संरक्षण—नुकसान के समय भी परमेश्वर की न्यायपूर्ण दूरी से व्यक्ति सुरक्षित रहता है।
निर्गमन 14:14 (cross-reference): युद्ध-घड़ी में परमेश्वर का प्रत्यक्ष संचालन—यही जीवन की सुरक्षा की स्थिर तागत है, भौतिक सुरक्षा से कहीं अधिक।
प्रायोगिक निष्कर्ष/जीवन के लिए संक्षिप्त निष्कर्ष
कठिन समय में मानव संघर्ष और परमेश्वर के शासन का संतुलन समझना आवश्यक है। असुरक्षा के भाव में भी ईश्वर की सुरक्षा के प्रति भरोसा बनाए रखें; धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ व्यवहारशीलता और न्यायपूर्ण जीवन की ओर चलना ही सही मार्ग है।
उद्धृत अंशों में सीधे शब्दों के स्पष्ट उद्धरण दिए गए हैं जब उपलब्ध हों; नीचे उद्धृत बड़े टिप्पणीकारों के विचारों का संक्षेप है:
Matthew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke - संक्षेपित प्रेरणा: Henry, Barnes और Clarke ने इस प्रकार के पाठों में सामाजिक और धार्मिक उत्तरदायित्व पर बल दिया है—धर्मिक आडंबर के पीछे वास्तविक नैतिकता को ढूंढना चाहिए, और विपत्ति के समय भरोसा परमेश्वर के संरक्षण पर रखना चाहिए।