Old Testament
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होशे 4:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे इस्राएल, यद्यपि तू छिनाला करता है, तो भी यहूदा दोषी न बने। गिलगाल को न आओ; और न बेतावेन को चढ़ जाओ; और यहोवा के जीवन की सौगन्ध कहकर शपथ न खाओ।
होशे 4:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 4:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 12:11 (HINIRV) »
क्या गिलाद कुकर्मी नहीं? वे पूरे छली हो गए हैं। गिलगाल में बैल बलि किए जाते हैं, वरन् उनकी वेदियाँ उन ढेरों के समान हैं जो खेत की रेघारियों के पास हों।

होशे 9:15 (HINIRV) »
उनकी सारी बुराई गिलगाल में है; वहीं मैंने उनसे घृणा की। उनके बुरे कामों के कारण मैं उनको अपने घर से निकाल दूँगा। और उनसे फिर प्रीति न रखूँगा, क्योंकि उनके सब हाकिम बलवा करनेवाले हैं।

आमोस 4:4 (HINIRV) »
“बेतेल में आकर अपराध करो, और गिलगाल में आकर बहुत से अपराध करो; अपने चढ़ावे भोर को, और अपने दशमांश हर तीसरे दिन ले आया करो;
होशे 4:15 का संदर्भ और पाठ का आशय
वचन तत्काल यह बताता है कि इस्राएल के पाप गहराते जा रहे हैं, परन्तु भगवान अपने चुने हुए लोगों के बीच की मर्यादा और पवित्रता की मांग से चूक नहीं जाता। यहाँ कहा गया है: “हे इस्राएल, यद्यपि तू छिनाला करता है, तो भी यहूदा दोषी न बने। गिलगाल को न आओ; और न बेतावेन को चढ़ जाओ; और यहोवा के जीवन की सौगन्ध कहकर शपथ न खाओ।” यह ध्यान देता है कि भले ही इस्राएल का व्यवहार गिरावट में हो, यहूदा पर आरोप लागू होते हैं यदि वे पवित्रता के बंधन से दूर जाते हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ का उभार
यह पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ नैतिक और धार्मिक मानकों पर स्थिर है। यहूदा के साथ तुलना कर यह बताता है कि भौगोलिक/राजनीतिक विभाजन से नहीं, बल्कि हृदय की वफादारी से संबंध बनते या टूटते हैं। पवित्रता और सत्य के प्रति अडिगता ही ईश्वर की मयूर-छवि के अनुरूप जीवन का आधार है।
IMPORTANT शब्दों/छवियों का स्पष्टीकरण
संबद्ध पद और कसौटियाँ
यह पाठ अन्य अग्रिम उदाहरण देता है कि कैसे धर्म-संस्थाओं के भीतर भी सत्य और आस्थावान जीवन का दबाव बना रहना चाहिए। नीचे कुछ समकक्ष विचार बताए जाते हैं:
आज के समय में लागू बात
1) वैधानिक-धार्मिक आचरण केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हृदय-निष्ठा पर टिका होना चाहिए।
2) समुदाय के भीतर पवित्रता के मानक बनाए रखें—धर्मनिष्ठता और ईमानदारी से जुड़ा जीवन।
3) अस्थिर सामाजिक-आस्था के समय भी परमेश्वर के सत्य के प्रति दृढ़ निष्ठा बनाए रखें, ताकि गलतिपथों से बचा जा सके।
कथनात्मक सार
होशे 4:15 हमें याद दिलाता है कि भले ही समाज के कई हिस्से भटकाव में हों, एक समुदाय के रूप में ईश्वर की पवित्रता और सच्चे विश्वास की कसौटी पर टिके रहना कितना आवश्यक है।=इस वचन से प्रेरणा मिलता है कि भटकाव के बीच भी आस्था और नैतिकता के मूल-स्तंभों को मजबूत करें—गिलगाल-प्रथा, शपथ-व्यवहार और त्याग की ओर न मुड़ें।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसे
यह पाठ होशे 6:6 के अनुरूप है, जिसमें ईश्वर स्पष्ट कर देते हैं कि प्रेम और ईमानदारी से भरा आचरण धर्म-संस्थाओं के लिए प्राथमिक है। साथ ही यशाय 1:11–17 के संदेश से प्रेरणा मिलती है कि धार्मिक कर्मों की बाहरीता से नहीं, आंतरिक सुधार और न्याय-निष्ठा से परमेश्वर प्रसन्न होते हैं.