Old Testament
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होशे 4:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहाँ श्राप देने, झूठ बोलने, वध करने, चुराने, और व्यभिचार करने को छोड़ कुछ नहीं होता; वे व्यवस्था की सीमा को लाँघकर कुकर्म करते हैं और खून ही खून होता रहता है।*
होशे 4:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 4:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 6:9 (HINIRV) »
जैसे डाकुओं के दल किसी की घात में बैठते हैं, वैसे ही याजकों का दल शेकेम के मार्ग में वध करता है, वरन् उन्होंने महापाप भी किया है।

यिर्मयाह 6:7 (HINIRV) »
जैसा कुएँ में से नित्य नया जल निकला करता है, वैसा ही इस नगर में से नित्य नई बुराई निकलती है; इसमें उत्पात और उपद्रव का कोलाहल मचा रहता है; चोट और मार पीट मेरे देखने में* निरन्तर आती है।

यिर्मयाह 7:6 (HINIRV) »
परदेशी और अनाथ और विधवा पर अंधेर न करो; इस स्थान में निर्दोष की हत्या न करो, और दूसरे देवताओं के पीछे न चलो जिससे तुम्हारी हानि होती है,
होशे 4:2 पर टिप्पणी — इसका सार और संदर्भ
सीधे शब्दों में कहा जाए तो होशे 4:2 बताता है कि उस समय के लोगों की सामाजिक-धार्मिक नैतिकता पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी थी: निरंतर झूठ बोलना, खून-खूनी अपराध, और व्यभिचार जैसे कर्म आम हो चुके थे। वे व्यवस्था की सीमा को पार कर रहें थे और कुकर्म हर दिशा में हावी थे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे की किताब इस्राइल के उत्तराधिकारियों के पतन के समय लिखी गई है जब जनजातियाँ आत्मिक भ्रष्टाचार, अधर्म और पाखंड का अनुभव कर रही थीं। खुदाई भाषा में कहें तो उद्धारक का मानक कमज़ोर पड़ गया था; भगवान के साक्षात्कार के लिए नहीं, बल्कि अपने अंधे किनारों के लिए लोग कर्म कर रहे थे। यहाँ “लाँघना” का अर्थ यह है कि लोग परमेश्वर की व्यवस्था के बाहर जाकर भय, दासता और अनैतिकता की राह अपनाते थे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मूल संदेश के कुछ दृष्टीगत संकेत
1) व्यक्ति के भीतर का आचरण ईश्वर के साथ उसके रिश्ते का स्पष्ट संकेतक है; जब आंतरिक सच नहीं रहता, बाहरी धर्म केवल दिखावा बन जाता है।
2) पाप का जन्म अकेले नहीं होता; यह सामाजिक परिप्रेक्ष्य में पनपता है और समुदाय की नज़र से न्याय का प्रश्न बन जाता है।
संलग्न क्रॉस-रेफरेंसे
आइए ऐसे संदर्भ देखें जो इस verse से जुड़े नैतिक और आंतरिक परिवर्तन के विचार को संजोते हैं:
इन संदर्भों में संकल्प, समर्पण और नई दिशा के साथ ईश्वर के साथ फिर से जुड़ने का महत्व स्पष्ट है।
थीमैटिक सूची
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
व्यक्ति और समाज दोनों के लिए यह संदेश है कि वास्तविक परिवर्तन भीतर से शुरू होता है। यदि हमारे दिल सत्य, ईमानदार व्यवहार और प्रेम के आधार पर बदले, तो बाहरी जीवन भी शुद्ध होगा। अल्प में, नियम-पथ के बाहर की राह से बचकर, परमेश्वर के मार्ग में लौटना ही जीवन की दिशा है।
तत्वगत टिप्पणीर्स: होशे के प्रकाशन के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कुछ विचार अनुदेश की तरह उद्धृत नहीं बल्कि प्रेरणा के रूप में समाहित हैं। उनके भीतर के संकेत यह हैं कि पाप का स्थायी प्रभाव समाज पर पड़ता है और ईश्वर की वचन-निष्ठा के अनुसार पुनर्स्थापना आवश्यक है।