Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 4:14 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 4:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब तुम्हारी बेटियाँ छिनाला और तुम्हारी बहुएँ व्यभिचार करें, तब मैं उनको दण्ड न दूँगा; क्योंकि मनुष्य आप ही वेश्याओं के साथ एकान्त में जाते, और देवदासियों के साथी होकर यज्ञ करते हैं; और जो लोग समझ नहीं रखते, वे नाश हो जाएँगे।
होशे 4:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 4:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

होशे 4:1 (HINIRV) »
हे इस्राएलियों, यहोवा का वचन सुनो; इस देश के निवासियों के साथ यहोवा का मुकद्दमा है। इस देश में न तो कुछ सच्चाई है, न कुछ करुणा और न कुछ परमेश्वर का ज्ञान ही है। (प्रका. 6:10)

व्यवस्थाविवरण 23:17 (HINIRV) »
“इस्राएली स्त्रियों में से कोई देवदासी न हो*, और न इस्राएलियों में से कोई पुरुष ऐसा बुरा काम करनेवाला हो।

1 राजाओं 15:12 (HINIRV) »
उसने तो पुरुषगामियों को देश से निकाल दिया, और जितनी मूरतें उसके पुरखाओं ने बनाई थीं उन सभी को उसने दूर कर दिया।
होशे 4:14 पर टिप्पणी (HINIRV)
मतलब स्पष्ट है: प्रभु कह रहे हैं कि पाप की गिरफ्त में आने पर बेटियों के नुकसान और बहुओं के व्यभिचार के लिए वे खुद न्याय से बच नहीं पाएँगे; दण्ड की वेदना उनके भीतर के अविश्वास और बहाव के कारण है। परमेश्वर का ध्यान सीधे-सीधे धार्मिक उपासना के उन्माद और नैतिक पतन पर है, जहाँ सामान्य जीवन की निष्ठा भंग हो जाती है।
प्रसंग और पृष्ठभूमि
होशे का संदर्भ इस बड़े प्रायश्चित्त नाटक का है जिसमें उत्तरावदीय राज्य के कर्मों का ढोल बचाव में नहीं बजता; गिरावट दैनंदिन जीवन तक पहुँच चुकी थी—तब लोग उपासना के नाम पर देवदासियों और वैश्याचार के साथ साथ चलते थे। ईश्वर यह बताना चाहते हैं कि यह सामाजिक और धार्मिक मिस मिलकर राष्ट्रीय पतन का कारण बनते हैं और दंड भी इसी संयुक्त अपराध के अनुसार होगा।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संकेतित तात्पर्य
1) नैतिकता और धार्मिकता के बीच अनुशासनात्मक समन्वय अवश्य है; केवल उपासना के बाहरी कर्म पर्याप्त नहीं हैं।
2) सामाजिक मार्गदर्शक तत्त्वों—बेटियाँ, बहुएँ और परिवार—के लिए समुदाय की संस्कृति को पवित्र रखना परमेश्वर की इच्छा है।
3) सचेतन विवेक और दयालु दायित्व के बिना चेतना में कमी रहती है, जिससे समाज पतन की राह पर चलता है।
क्रॉस-रेफ़रेंस (संक्षेप में समझाने योग्य)
- होशे 6:6: आंतरिक करुणा और निष्ठा की आवश्यकता, बाहरी बलिदान से अधिक।
- मत्ती 5:8: निर्मल हृदय के लिए आह्वान; भीतर की पवित्रता से ही ईश्वर के पास आना संभव है।
- यिर्मयाह 3:6-10: सामाजिक पाप की निरंतरता और परमेश्वर की करुणा के साथ इसका अतीत-भविष्य संबंध।
पठन-योग्य निष्कर्ष
यह वाक्य दिखाता है कि परमेश्वर नैतिकता को केवल निजी जीवन तक नहीं सीमित करते, बल्कि सामाजिक व्यवहार, धार्मिक पूजा और पारिवारिक संरचना के हर क्षेत्र में आदर-नीति चाहते हैं। आत्म-नियंत्रण, सम्मानपूर्वक संबंध और समुदाय के लिए ईमानदारी एक साथ चाहिए।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
पूर्व के टिप्पणीकारों के संकेत (संक्षेप में)
मथ्यू हेनरी, अ্যালबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क ने इस प्रकार के पाठों में कर्म और उन्माद के बीच संतुलन, आंतरिक परिवर्तन, और सामाजिक-परोपकारी नैतिकता पर बल दिया है। उनके संकेतित विचारों से यह स्पष्ट होता है कि पूजा-आचरण और दैनिक व्यवहार एक दूसरे से कटे नहीं रहने चाहिए।