Old Testament
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होशे 4:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे जब दाखमधु पी चुकते हैं तब वेश्यागमन करने में लग जाते हैं; उनके प्रधान लोग निरादर होने से अधिक प्रीति रखते हैं।
होशे 4:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 4:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मीका 3:11 (HINIRV) »
उसके प्रधान घूस ले लेकर विचार करते, और याजक दाम ले लेकर व्यवस्था देते हैं, और भविष्यद्वक्ता रुपये के लिये भावी कहते हैं; तो भी वे यह कहकर यहोवा पर भरोसा रखते हैं, “यहोवा हमारे बीच में है, इसलिए कोई विपत्ति हम पर न आएगी।”

निर्गमन 23:8 (HINIRV) »
घूस न लेना, क्योंकि घूस देखनेवालों को भी अंधेर कर देता, और धर्मियों की बातें पलट देता है।

व्यवस्थाविवरण 32:32 (HINIRV) »
क्योंकि उनकी दाखलता सदोम की दाखलता से निकली, और गमोरा की दाख की बारियों में की है; उनकी दाख विषभरी और उनके गुच्छे कड़वे हैं;
होशे 4:18 परिप्रेक्ष्य में एक नजर
होशे ग्रंथ के इस भाग में परमेश्वर ने इस्राएल के अपलवन और पथभ्रष्ट सामाजिक-आचरण को उजागर किया है। योना-नबियों के संकेतों के बीच होशे यह दर्शाते हैं कि वफादारी के स्थान पर मादक पदार्थों के सेवन, अवैध आचरण और असंयमित जीवन कैसे आत्मिक भ्रष्टाचार को गहराते हैं। इस वाक्य में एक साझा प्रवृत्ति स्पष्ट होती है: व्यक्ति अपनी स्वच्छ या पवित्र स्थिति के बजाय अपने व्यसन और गलत विकल्पों में रीढ़ की तरह फँस जाता है, और तब उनके नेता भी उसी ग़लती में लिप्त रहते हैं।
पल्ले के भीतर यह verse क्या है
4:18 में कहा गया है कि “वे जब दाखमधु पी चुकते हैं तब वेश्यागमन करने में लग जाते हैं; उनके प्रधान लोग निरादर होने से अधिक प्रीति रखते हैं।” यहाँ alkohol या मदिरापान के बाद धरिक चलन और सामाजिक-व्यवहार की गिरावट चित्रित है। यह संकेत देता है कि सामाजिक व्यवस्था में नैतिक नियंत्रण ढीला पड़ता है और नेतृत्व भी उसी दिशा में आचरण करता है। यह एक स्पष्ट Warning है कि व्यक्ति-समूह की ग़लत आदतें समाज के नैतिक ढांचे को तहस-नहस कर देती हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse से हम दो शीर्ष शिक्षा ग्रहण करते हैं: पहले, नशे और अप्राकृतिक आचरण का दबाव इतना प्रबल हो सकता है कि यह पवित्र जीवन के मार्ग से भटका दे। दूसरा, नेतृत्व का प्रभाव दुष्क्रमित हो जाने पर समाज में न्याय की जगह अन्याय और अपमान शासन करने लगते हैं। परमेश्वर द्वारा प्रकट किया गया न्याय तब स्पष्ट होता है जब मादकता और पाप का सामूहिक संस्कार उभर कर सामने आता है।
अन्य पवित्रशास्त्री दृष्टिकोण (Cross-reference)
इन संदर्भों में दिखता है कि पाप की बढ़ोत्तरी सामाजिक व्यवस्था को नष्ट कर देती है और नेतृत्व में नैतिक ज़िम्मेदारी का गायब होना परिणामस्वरूप आता है।
सावधानियाँ और व्यवहारिक अनुप्रयोग
- अपने जीवन में नशे या अपवित्र आचरण के जोखिम पर सतर्क रहें; आत्म-नियंत्रण परमेश्वर की कृपा से ही संभव है।
- नेतृत्व में ईमानदारी और नैतिकता की मांग करें; अगर पंक्ति के भीतर भ्रष्टाचार बढ़ रहा हो, तो नम्रता से सत्य को निर्धारित करना चाहिए।
- समाज की सुरक्षा के लिए परमेश्वर के न्याय और दया की संतुलित समझ बनाए रखें; पवित्र जीवन के मार्ग को छोड़कर नहीं चलना चाहिए।
संक्षेप सार
होशे 4:18 में दिखाया गया है कि मदिरा-आचरण के बाद भीतरी और बाहरी व्यवहार कैसे गिर जाते हैं, और नेतृत्व की अवहेलना से सामाजिक नैतिकता ठूँठ हो जाती है। यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर की निगरानी में नैतिक जीवन ही समाज की सुरक्षा की कुंजी है।
कॉलमर्स के उद्धरण (संक्षेप)
यहाँ 3 कुंद टिप्पणियाँ शामिल हैं जो सार्वजनिक-डायरेक्ट commentary tradition से मिलती-जुलती हैं, परन्तु मूल टेक्स्ट से परामर्श के अनुरूप संक्षेपित रूप में प्रस्तुत हैं:
Matthew Henry के अनुसार यह verse हर प्रकार के आत्म-नशे और अव्यवस्थित जीवन के नतीजे हैं, जो समाज को तिरोहित कर देते हैं।
Albert Barnes ने नेतृत्व के प्रभाव को प्रमुख माना है; समुदाय में गलत आचरण फैलना नेताओं के आकांक्षात्मक भ्रष्टाचार को दर्शाता है।
Adam Clarke ने सामाजिक-आचरण के गिरावट के व्यापक सामाजिक परिणामों पर प्रकाश डाला है, जिसमें नैतिक पतन का चक्र स्वयं को और समूह को नुकसान पहुँचाता है।
नोट: नीचे के उद्धरण केवल संक्षेप में संदर्भ के लिए हैं और क्रमशः Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों के अनुरूप रखे गए हैं।
Cross-references को ध्यान में रखते हुए पाठ के साथ संकल्पना यह है कि जीवन में रुचि-भंग और नैतिक-अवहेलना समाज की संरचना को हिलाती है, और इसी से परमेश्वर न्याय की चर्चा करते हैं।