Old Testament
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होशे 7:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब मैं इस्राएल को चंगा करता हूँ तब एप्रैम का अधर्म और शोमरोन की बुराइयाँ प्रगट हो जाती हैं; वे छल से काम करते हैं, चोर भीतर घुसता, और डाकुओं का दल बाहर छीन लेता है।
होशे 7:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 7:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 19:42 (HINIRV) »
और कहा, “क्या ही भला होता, कि तू; हाँ, तू ही, इसी दिन में कुशल की बातें जानता, परन्तु अब वे तेरी आँखों से छिप गई हैं। (व्य. 32:29, यशा. 6:9-10)

होशे 4:2 (HINIRV) »
यहाँ श्राप देने, झूठ बोलने, वध करने, चुराने, और व्यभिचार करने को छोड़ कुछ नहीं होता; वे व्यवस्था की सीमा को लाँघकर कुकर्म करते हैं और खून ही खून होता रहता है।*

होशे 6:4 (HINIRV) »
हे एप्रैम, मैं तुझ से क्या करूँ? हे यहूदा, मैं तुझ से क्या करूँ? तुम्हारा स्नेह तो भोर के मेघ के समान, और सवेरे उड़ जानेवाली ओस के समान है।
होशे 7:1 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
होशे भविष्यवक्ता ने इस्राएल के हर अधर्म और व्यक्तिगत नैतिक गिरावट को उसकी चंगा करने की प्रक्रिया के साथ जोड़कर दिखाया है। इस्राएल के सामाजिक-आर्थिक उन्नति के बावजूद, प्रजा के भीतर छल-कपट, चोरी और डाकुओं की सक्रियता बढ़ती जाती है। यह verse उस समय को दर्शाता है जब परमेश्वर के प्रभावशाली चंगाई के बावजूद हार और असत्यापित व्यवहार सामने आते हैं। होशे इसराइल के दर्द को उसकी चंगा-यात्रा के साथ जोड़ते हैं: जब भगवान चंगा करते हैं, तब उनके भीतर के पापों की सच्चाई उजागर होती है; चंगाई का परिणाम केवल शारीरिक स्थायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जागरण और पाप के विरुद्ध संघर्ष है.
केंद्रीय अर्थ
यह वचन स्पष्ट करता है कि चंगाई के समय भी मानवीय स्वभाव के पथभ्रष्ट भाग उभरते हैं। एप्रैम (ईजराइल का उत्तर-राज्य) और शोमरोन के बुराईयां—घुट-मिलकर छल, चोरी और डाकुओं की भागीदारी—इनमें न केवल व्यक्तिगत पाप बल्कि समाज के ढांचे में फैलते ठगे-फरेब की जड़ें दिखती हैं। चंगा करने की क्रिया से यह नहीं कि सब कुछ अवश्य सुधर जाए; भीतर के अहंकार, विश्वासघात और विरोधाभास उजागर होते हैं, और यह परमेश्वर की न्यायपूर्ण दृष्टि को दर्शाता है।
मुख्य विषय
प्रमुख वैचारिक पुल
यहोवा चंगा करता है—यही आशा; पर चंगा होते हुए भी पाप के परिणाम उभरते हैं। यह तर्क पुराने नियम और नवीनीकृत नीतियों के बीच एक संतुलन दिखाता है: देव की कृपा से मुक्त होना है, पर पाप की प्रकृति का सच स्वीकारना आवश्यक है।
संदर्भ-लिंक्स (संक्षेप)
इन संदर्भों में पाप-चंगाई के विपरीत परिणाम स्पष्ट होते हैं:
व्यावहारिक विचार
हम जानते हैं कि परमेश्वर चंगा करते हैं; लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हमारा तरीका निर्दोष हो। आत्म-निरीक्षण करें: क्या मैं उत्पीड़क, चोर या कपटपूर्ण व्यवहार से बच रहा हूँ? चंगाई के बावजूद पाप के संकेत हमें सचेत करते हैं कि हमें रोज़मर्रा के जीवन में सत्य और न्याय की राह अपनानी है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 7:1 यह सिखाता है कि चंगाई और पाप का सञ्चालन एक साथ चलते हैं। परमेश्वर की चंगाई सच है, पर इसका फल हमारे भीतर सत्य के अनुरूप परिवर्तन की मांग करता है—छल, चोरी और डाकुओं जैसी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण के साथ।
Cross-references
1) यशायाह 1:4–6 — पाप की गहरी चोट और उसकी प्रभावशीलता दिखाती है; चंगाई के लिए आंतरिक परिवर्तन आवश्यक है।
2) मत्ती 5:8 — pura मन से परमेश्वर के सामने रहने पर ही शांत आत्मा मिलती है; नैतिक पुनःस्थापना की शुरुआत भीतर से होती है।
3) यहू 12:47–48 — जो शब्द सुनते हैं और उसे मानते हैं, वही परमेश्वर की न्याय-निर्णय के सामने सुरक्षित रहते हैं।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण बिल्कुल आवश्यक जगहों पर ही प्रयुक्त करने की अनुमति के अनुसार, नीचे उनके विचारों की संक्षिप्त अभिव्यक्ति दी जा रही है: // संदर्भ-उद्धरण: (यदि उपलब्ध) "..."