Old Testament
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होशे 6:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे यहूदा, जब मैं अपनी प्रजा को बँधुआई से लौटा ले आऊँगा, उस समय के लिये तेरे निमित्त भी बदला ठहराया हुआ है।
होशे 6:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 6:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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योएल 3:13 (HINIRV) »
हँसुआ लगाओ, क्योंकि खेत पक गया है। आओ, दाख रौंदो, क्योंकि हौज़ भर गया है। रसकुण्ड उमण्डने लगे, क्योंकि उनकी बुराई बहुत बड़ी है। (मर. 4:29, प्रका. 14:15-18)

यिर्मयाह 51:33 (HINIRV) »
क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यह कहता है: बाबेल की बेटी दाँवते समय के खलिहान के समान है, थोड़े ही दिनों में उसकी कटनी का समय आएगा।”

अय्यूब 42:10 (HINIRV) »
जब अय्यूब ने अपने मित्रों के लिये प्रार्थना की, तब यहोवा ने उसका सारा दुःख दूर किया, और जितना अय्यूब का पहले था, उसका दुगना यहोवा ने उसे दे दिया।
होशे 6:11 का पाठ और संदर्भ
होशे के पुस्तक में परमेश्वर का प्रेम-निर्णय और देश-प्रगत का संदेश बार‑बार मिलती है। इस verse में यह कहा गया है कि जब यहूदा अपनी बनवास से लौटाई जाएगी, उस समय के लिए तेरे लिए भी बदला ठहराया गया है। यह शावक-कथन नहीं बल्कि उद्धार-युग के लिए एक संकेत है कि परमेश्वर का करुणा और न्याय दोनों एक साथ चलते हैं: वह दंड देता है, परन्तु उद्धार की योजना से चूकता नहीं। होशे की बातें समय-समय पर इस बात को उजागर करती हैं कि लौटने और पुनःस्थापना के अवसर परमेश्वर की अनुग्रहपूर्ण योजनाओं से जुड़े हैं।
मध्य विषय
मुख्य बात यह है कि पूर्ववत् दण्ड के साथ भविष्य के उद्धार-कार्य का संकेत दर्शाया गया है। यहूदा के बंधन-वास के समय ही नहीं, बल्कि उसकी स्थिति की पुनःस्थापना के समय भी परमेश्वर के अन्याय पर करुणा की छाया है। मार्गदर्शक रूप से यह बताता है कि परमेश्वर अपनी प्रजा के लिए बंधन से मुक्ति और शांति की व्यवस्था तैयार रखता है, ताकि उनका धार्मिक और सामाजिक जीवन ठिकाने मिले।
तीन प्रमुख विषय
अन्य संदर्भ और उनके अर्थ
• यहोशा 1–3 जैसे पाठों में उद्धार की आशा बारम्बार उठती है; यह दिखाता है कि परमेश्वर ने अपने लोगों के साथ विशिष्ट वादे जोड़े रखे हैं।
• यिर्मयाह 30:10 और यशायाह 11:1‑10 जैसी प्रतिज्ञाएँ भी लौटने और शांति के भविष्य के बारे में संकेत देती हैं।
• पद 7–11 के आस‑पास के बेरुखी और दंड के बोध को समझते हुए, उद्धार का आश्वासन देखने को मिलता है।
व्यावहारिक प्रतिबिंबत
यदि आप अपने जीवन में कठिनाइयों और नाकामी का सामना कर रहे हों, तो यहायित करें कि परमेश्वर की योजना में संदिग्धता नहीं बल्कि उन्नति और पुनःस्थापना का मार्ग है। भरोसा रखें कि कठिन समय के बीच भी परमेश्वर का स्नेह और उद्धार‑कार्य विश्राम के लिए तैयार है। खासकर अंतःकरण की स्थिति ठीक करने, नैतिकता और समुदाय‑जीवन को उजागर करने के लिए यह प्रेरणा देता है कि भावनात्मक और सामाजिक बाधाओं के बावजूद आप परमेश्वर के साथ लौटने की आशा बनाए रखें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 6:11 एक ऐसी अभिज्ञता देता है कि जब यहूदा लौटेगा, तब भी परमेश्वर के लिए बदला ठहराया गया है—यानी उद्धार का समय पास है। यह संदेश करुणा के साथ न्याय, पुनःस्थापन की आशा, और परमेश्वर की वफादारी की पुष्टि है जो हर पीड़ा के बीच भी प्रजा को पुनर्जीवित करने के लिए है।
क्रॉस‑रेफरेंसेस (संक्षिप्त उल्लेख)
यहोशे 1–3 से उद्धार की पुनरावृत्ति, यिर्मयाह 30:10 और यशायाह 11:1‑10 उद्धार की भविष्यवाणियाँ—ये सभी इस verse के साथ मिलकर यह दर्शाते हैं कि लौटना और उद्धार परमेश्वर की स्थिर वफा-योजना का भाग हैं।
अनुवादित उद्धरण संकेत (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से यदि उपलब्ध उद्धरण हों तो):
एतिहासिक टिप्पणीकारों के शब्दों से यह स्पष्ट किया गया है कि दंड के साथ उद्धार‑आशा एक साथ चलती है, और परमेश्वर अपने लोगों के लिए नयी स्थिति बनाते हैं।