अय्यूब 42:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब अय्यूब ने अपने मित्रों के लिये प्रार्थना की, तब यहोवा ने उसका सारा दुःख दूर किया, और जितना अय्यूब का पहले था, उसका दुगना यहोवा ने उसे दे दिया।

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अय्यूब 42:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 42:10 पर टिप्पणी — अर्थ का प्रत्यक्ष संकेत

इस वचन का सीधा मर्म है: ईश्वर ने अय्यूब की प्रार्थनाओं के पीछे उसका दुःख दूर किया और अधिक आशीषों के साथ उसकी स्थिति को पूर्ववत् से बढ़ाकर दे दिया। यह मूल विचार यह दर्शाता है कि ईश्वर की कृपा समय-समय पर परिवर्तन ला सकती है, और पीड़ा के बीच भी भलाई के लिए मार्ग खुलते हैं जब व्यक्ति ईमान के साथ परमेश्वर के साथ सम्बद्ध रहता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

अय्यूब की कथा अन्तस की पीड़ा, अनुचित आरोपों, और मित्रों की गूंजती तकरार के बीच unfolding होती है। अंत में परमेश्वर का दर्शन, अय्यूब का पश्चात्ताप, और उद्धार-प्राप्ति का पुनरावर्तन होता है। 42:10 वह मोड़ है जहाँ परमेश्वर ने अय्यूब के दुख को खत्म कर दिया और पूर्ववत् प्रदान किये गए धन-सम्पत्ति से उसकी स्थिति दुगनी कर दी। यह दर्शाता है कि परमेश्वर इतने कठोर रहन-सहन के बावजूद भी दयालुता और पुनःस्थापना की क्षमता रखता है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • प्रार्थना प्रभावी बनी: मित्रों के कारण उत्पन्न हुए प्रश्नों के बीच अय्यूब ने प्रार्थना की, जिससे दिव्य दृष्टि और कृपा-संवेदना पुनः लायी गई।
  • कठिन समय के बाद पुनर्स्थापना:apataं के बाद दुगुना उत्तर, यह दर्शाता है कि परमेश्वर न केवल दुःख दूर करते हैं बल्कि उनके द्वारा नई बुलाहट भी देते हैं।
  • आश्वस्तिकरण का सिद्धांत: पालनहार के हाथ में समय और स्थितियाँ होती हैं, जिनमें हमारा भाग्य परिवर्तनशील हो सकता है, पर ईश्वर की कृपा स्थिर रहती है।

कुछ प्रमुख क्रॉस-रेफरंस (संक्षेप व्याख्या)

  1. 2 कुरिन्थ 4:17-18 — पीड़ा अस्थायी है और ईश्वर की महिमा के लिए छोटे-से पल हैं; यह अय्यूब की कहानी के तात्पर्य के अनुरूप है कि दुःख केवल समय-सीमा में है।
  2. यहेजकेल 34:26 — ईश्वर अपने लोगों के लिए आशीषों के वर्ष लाते हैं और उनकी बुझती सामाजिक-आर्थिक स्थिति को पुनः उठाते हैं।
  3. मीका 7:7-8 — न्याय और विश्राम के समय में विश्वस्त रहना चाहिए, परीक्षणों के बावजूद भी ईश्वर के समाधान का भरोसा बना रहता है।

इन संदर्भों में संकेत मिलता है कि दुख के समय में भी ईश्वर के उद्धार और पुनर्स्थापना की योजना चलती है, भले ही रास्ते स्पष्ट न दिख रहे हों।

पूर्ववर्ती और परस्पर संबंधी विचार

मत्ती-हेनरी, अलेक्टर बार्न्स, और एडम क्लार्क जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सोच-विचार इस पंक्ति में यह स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर की कृपा परिस्थितियों से परे है और भरोसे पर आधारित है। उनके अनुसार, अय्यूब की कहानी में यह दर्शाया गया है कि समय के साथ ईश्वर की आस्था की परीक्षा में धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि वह अंततः उद्धार और पुनःस्थापना का अवसर देता है।

संक्षेपित थीमैटिक बिंदु

  • प्रार्थना से परमेश्वर की ओर नया ध्यान आता है।
  • पीड़ा के बाद पुनर्स्थापना संभव है, और वह दुगनी हो सकती है।
  • आस्तित्त्व-विश्वास में स्थिर रहना ईश्वर की कृपा को खोलता है।

व्यावहारिक takeaway

यदि आप भी कठिन समय से गुजर रहे हों, तो ईश्वर पर विश्वास बनाए रखें और समुदाय-प्रार्थना में भाग लें। परिश्रम, नम्रता और प्रार्थना से भीतर की आशा जागती है, और समय के साथ नई आशाओं के द्वार खुलते हैं।

नोट: नीचे उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं; पूर्ण पाठ अक्सर शब्द-शब्द अनुवाद में भिन्न हो सकता है।

मथ्यू हैनरी (Matthew Henry) से: “...प्रार्थना, जो दुःख के समय किया गया, इसे धारण करती है और उद्धार के मार्ग खोलती है।”

ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) से: “यहोवा का दुगुना देना यह सिद्ध करता है कि वह विश्वासयोग्य है, अपने वचनों के अनुरूप।”

एडम क्लार्क (Adam Clarke) से: “दुःख के बाद आशीष का आना, ईश्वर के अधिकारीय कार्यक्रम का एक भाग है।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 42:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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