अय्यूब 28:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“चाँदी की खानि तो होती है, और सोने के लिये भी स्थान होता है जहाँ लोग जाते हैं।

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अय्यूब 28:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

यौवन के भीतर अय्यूब 28:1 का संदर्भ

कथा-पाठ में इस पद पर यह दिखता है कि ऊर्जा, खोज और ज्ञान के लिए मनुष्य कितनी मेहनत करता है। शास्त्र कहता है कि गहरे गढ़े ores और खानों की खोज परिश्रम का परिणाम है—चाँदी, सोना, और अनमोल रत्नों के छानबीन। यह हुआ-हुआ विश्वस्तरीय विज्ञान की तरह नहीं, बल्कि परमेश्वर के साक्षात्कार और बुद्धिमत्ता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत है: जहां मानव श्रम से नयी चीजें निकलती हैं, वहीं परमेश्वर की योजना और दिशा भी स्पष्ट होती है।

केंद्रीय विचार

इस पद में भूगर्भीय खनिजों की खोज का जीवंत चित्र है जो मानव उत्साह, ज्ञान-काशी और परिश्रम को दर्शाता है। परन्तु यह भी संकेत है कि इन खोजों के पीछे एक उच्च उद्देश्य है—भरी परम सत्ता की योजना और वह ज्ञान जो इंसान तक पहुँचता है, उसे सही ढंग से प्रयोग करना।

मुख्य थीम्स

  • परिश्रम और खोज: खानों की गहराइयों में उतरना—चाँदी और सोने के लिए स्थान बनना, यह मानव उत्साह की प्रतीक है।
  • ज्ञान की सीमा: जहां तक मानव मंथन पहुँचे, वहाँ भी एक सीमा है और उन पदार्थों के पीछे एक उद्देश्य है जो परमेश्वर ने ठहराया है।
  • परमेश्वर की योजना के साथ मानवता की भूमिका: खोज एक मार्ग है, ना कि अंतिम उद्देश्य; वास्तविक ज्ञान परमेश्वर के धर्मी निर्णयों से मिलता है।

संबंधित पदोत्तर संदर्भ

1) यूहन्ना 14:6 जैसे मार्गदर्शक वाक्यों के साथ, जहाँ यीशु कहते हैं कि अस्तित्व का असली ज्ञान और जीवन वे हैं। यह बताता है कि खोजმსार से आगे एक वहत मजबूत सत्य है—येसु ही मार्ग है।

2)ீழन प्रेरितों के कर्म 28:27-28 की तरह यह विचार कि वास्तविक ज्ञान और खुलासा परमेश्वर के कारण मिलता है; मानवीय खोजें उनकी सीमा समझाती हैं।

3) नीतिमत 2:4-6 की तरह, जहाँ बुद्धिमत्ता और समझदारी उन चीजों के पीछे होती है जिन्हें परमेश्वर देता है—यही ज्ञान का उच्चतम स्रोत है।

व्यावहारिक विचार

हम सभी कुछ नया जानने के लिए मेहनत करते हैं, चाहे शिक्षा हो या व्यवसाय। लेकिन इस वाक्य का संदेश यह है कि हमारी खोज में नैतिक और आध्यात्मिक दिशा जरूरी है। सही उद्देश्य और ईमानदार कार्य-नीति के साथ खोज निष्कर्ष देती है, बिना चरमराहट के।

संक्षिप्त निष्कर्ष

अय्यूब 28:1 भूगर्भीय खनिजों के प्रति मानवीय परिश्रम को मान्यता देता है, परन्तु यह भी याद दिलाता है कि ज्ञान का पूर्णतम स्रोत परमेश्वर की योजना और उसको समझने की सामर्थ्य है। खोज एक मार्ग है जिसमें नैतिकता और प्रार्थना की भूमिका अनिवार्य रहती है।

प्रासंगिक उद्धरण (पंक्तियों के संक्षेप)

मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियाँ समेकित रूप से इस विषय के साथ मेल खाते हैं—परिष्कृत मेहनत से प्राप्त ज्ञान एक नैतिक उपयोग से जुड़ना चाहिए और परमेश्वर के उद्देश्य से प्रेरित होना चाहिए। उल्लेखित उद्धरण यदि उद्धृत हों तो सिर्फ वही छोटे वाक्य होंगे जो पाठ के साथ सीधे सम्बन्ध रखते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 28:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यह इसलिए है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशवान सोने से भी कहीं अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, महिमा, और आदर का कारण ठहरे। (अय्यू. 23:10, भज. 66:10, यशा. 48:10, याकू. 1:12)

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परन्तु उसके आने के दिन को कौन सह सकेगा? और जब वह दिखाई दे, तब कौन खड़ा रह सकेगा? “क्योंकि वह सुनार की आग और धोबी के साबुन के समान है। (प्रका. 6:17)

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जब ऊँट पी चुके, तब उस पुरुष ने आधा तोला सोने का एक नत्थ निकालकर उसको दिया, और दस तोले सोने के कंगन उसके हाथों में पहना दिए;

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