Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 28:1 अय्यूब 28:2 अय्यूब 28:3 अय्यूब 28:4 अय्यूब 28:5 अय्यूब 28:6 अय्यूब 28:7 अय्यूब 28:8 अय्यूब 28:9 अय्यूब 28:10 अय्यूब 28:11 अय्यूब 28:12 अय्यूब 28:13 अय्यूब 28:14 अय्यूब 28:15 अय्यूब 28:16 अय्यूब 28:17 अय्यूब 28:18 अय्यूब 28:19 अय्यूब 28:20 अय्यूब 28:21 अय्यूब 28:22 अय्यूब 28:23 अय्यूब 28:24 अय्यूब 28:25 अय्यूब 28:26 अय्यूब 28:27 अय्यूब 28:28


अय्यूब 28:27 पर विवेचनात्मक टिप्पणी
पद का संदर्भ है कोयला-खोज की एक गहरी सच्चाई: मनुष्य नेतृत्व, बुद्धि और समझ को बार-बार ढूंढ़ा, परन्तु यह बुद्धि परमेश्वर की दृष्टि से सिद्ध होती है। अय्यूब 28 अध्याय में महाकाय खनिज-खोज की चर्चा के बीच यह विचार उभरता है कि पृथ्वी की गहराइयों में भी बुद्धि का वास्तविक स्थान कौन सा है। इस पद में परमेश्वर ने बुद्धि की परख, उसकी पूर्ण पहचान और उसका भेद बूझ लेने की बात स्पष्ट रूप से कही है।
केंद्रीय भावार्थ
इस आयत में परमेश्वर ने बुद्धि को उसकी महान चुनौतियों और गूढ़ रहस्यों के भीतर परखा और उसकी सच्ची प्रकृति को पहचानते हुए उसका भेद、その पूरे भेद को बूझ लिया। यह हमें याद दिलाता है कि मानव की ताक़त और विज्ञान चाहे कितना भी उन्नत क्यों न हो, वास्तविक बुद्धि और समझ परमेश्वर के पास है; वही हमें मार्गदर्शन और समाधान देता है।
मुख्य विषय
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस
1) उत्पत्ति 3:5-6 — मनुष्य के ज्ञान-लिप्सा के बावजूद ईश्वर के ज्ञान की महत्ता स्पष्ट होती है; हमारी बुद्धि उसके प्रकाश से प्रेरित होनी चाहिए। यह संदर्भ damal के भीतर बुद्धि बनाम स्वार्थी ज्ञान के भेद को रेखांकित करता है।
2) भजन 111:10 — भय परमेश्वर से बुद्धि की शुरुआत; भक्ति-वृत्ति से बुद्धि बढ़ती है। यह बताता है कि वास्तविक समझ परमेश्वर की भक्ति से उत्पन्न होती है।
3) कुरिन्थियों पहला पत्र 1:25 — परमेश्वर की दुर्बलताओं में भी ताकत है; मानव की गिनती में बुद्धि सीमित हो सकती है, पर परमेश्वर की समझ अतुलनीय है।
व्यावहारिक चिंतन
संक्षिप्त निष्कर्ष
अय्यूब 28:27 यह स्मरण दिलाता है कि बुद्धि की असली पहचान परमेश्वर के परखने और सिद्ध करने से होती है। मानव की खोज चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो, सच्ची समझ वही है जो परमेश्वर के प्रकाश से आती है और जीवन के मार्गों को स्पष्ट करती है।
पूर्व-तुलनात्मक टिप्पणी
यह विचार मर्थ्य के महज विज्ञान या तर्क से ऊपर उठ कर ईश्वर के ज्ञान की महत्ता को बताता है—एक ऐसी भूमिका जिसमें अनुभव, विवेक और भक्तिपूर्ण आस्था एक साथ काम करती है।