अय्यूब 28:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

कूश देश के पद्मराग उसके तुल्य नहीं ठहर सकते; और न उससे शुद्ध कुन्दन की बराबरी हो सकती है। (नीति. 8:19)

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अय्यूब 28:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

पाठ: अय्यूब 28:19

पाठ-परिचय: अय्यूब अध्याय 28 खुफिया ज्ञान और संसार की चीजों के मूल्य को दिखाने वाले एक दुर्लभ गीत-सा भाग है। प्रमुख संदेश यह है कि ईश्वर की बुद्धिमत्ता और सत्य सामग्री धन-धन्य से ऊँची है, और वाह्य सम्पत्ति-भरोसा अस्थिर है। शास्त्रीय टिप्पणीकारों के अनुरूप इस व verse में यह सिखाया गया है कि मनुष्य मानव-सामर्थ्य से भी अधिक दुर्लभ और कीमती 有 है—यानी ईश्वर की कृपा और विवेक। यह वचन कूश देश के पद्मराग और कुन्दन जैसे अमूल्य पदार्थों की तुलना करता है, किन्तु बताता है कि वास्तविक मूल्य केवल परमेश्वर के ज्ञान और विवेक में है।

पद का अध्याय-प्रसंग और मुख्य विचार

अय्यूब 28 में कवकें और गूढ़ताओं का उल्लेख है—क्योंकि मनुष्य अपरिमित गहराइयों तक पहुँच कर भी सत्य का अंतिम स्रोत नहीं खोज पाता। फिर यह verse कहता है कि कूश देश के पद्मराग के बराबर भी ज्ञान नहीं ठहर सकता और न शुद्ध कुन्दन। यहाँ ज्ञान, विवेक और निष्कलंक आध्यात्मिक मूल्य חומר-धन से अधिक की बात है। यह एक दार्शनिक और नैतिक मूल्य-संकेत है जो बताता है कि सांसारिक समृद्धि और ताम्र-धन से वास्तविक प्रज्ञा जुड़ी नहीं होती, बल्कि परमेश्वर की ईमानदार खोज से मिलती है।

एक नज़र में मुख्य धारा

  • दृढ़ विधान: संसार की सबसे विलासपूर्ण वस्तुएँ भी परम ज्ञान के सामने कुछ नहीं।
  • विश्वास बनाम मूल्य: ज्ञान और विवेक का आस्तित्व ईश्वर के भय और भय से जुड़ा है—नीति-8:19 के समान पवित्रता-रूप आवश्यक।

कथा-प्रेरणा और अन्य पाठों से तुलना

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों में एक सामान्य धारा है: संसारिक संपदा और बहुमूल्यता से परे एक गहरी, पवित्र समझ है जो ईश्वर के भय में उतरती है। Henry कहता हैं कि वास्तविक मूल्य शुद्ध विवेक और परमेश्वर-भय में है; Barnes बताते हैं कि ज्ञान का खजाना वह है जो आत्मा को ऊपर उठाए, न कि बाहरी वस्तुओं को। Clarke इसे एक शिक्षात्मक अलंकार के रूप में देखते हैं: संसार के आभूषण—पद्मराग, कुन्दन—और भी बहुमूल्य, परन्तु वे केवल संकेत हैं; सच्चा मूल्य परम ज्ञान है। इन विचारों का संकलन यह है कि ज्ञान वही है जो ईश्वर के मार्ग और नैतिक जीवन को प्रकाशित करे।

उद्धरण-नोट: अगर संक्षेप में प्रस्तुत उद्धरण चाहिए, तो Matthew Henry से "the essence of wisdom consists in the fear of the Lord" जैसे सार को आधार माना गया है; Barnes और Clarke के सार भी इसी राह के खोजी हैं।

बहुवचन अनुदेश: व्यावहारिक अनुप्रयोग

1) परम ज्ञान की खोज सक्रिय रखें: दुनियावी संपदा पर तो हम ताला लगा लेते हैं, परन्तु आत्मा को सत्य की रोशनी चाहिए। प्रार्थना, ज्ञान-कथा, और धार्मिक अध्ययन में निरंतरता रखें।

2) मूल्यांकन की दृष्टि: अपनी उपलब्धियों या वस्तुओं के मूल्य को केवल बाहरी चकाचौंध से नहीं नापें; आंतरिक नैतिक सिद्धांत और परमेश्वर के भय को भी जोड़े रखें।

3) आत्म-उत्साह बनाम प्रभु-उत्साह: आत्म-गौरव का नहीं, बल्कि ईश्वर की महिमा का उद्देश्य बनाएं।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके अर्थ

- नीति31:19-20 के साथ विचार: धन पर निर्भरता धार्मिक विवेक को प्रभावित कर सकती है; परन्तु विवेक और न्याय के मार्ग में धन एक साधन भर है।

- महा–नीति 8:17: बुद्धिमत्ता ईश्वर-पहचान और भय से उपजी है; यह ज्ञान संसार के भौतिक तत्वों से अधिक स्थिर है।

- नीतिशास्त्र 3:13-18: किरण-ज्ञान, अर्थात परमज्ञान, जीवन के मार्ग को प्रकाशित करता है, धन-सम्पत्ति से परे एक स्थिर धरोहर है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

अय्यूब 28:19 में संसार के सबसे पवित्र पदार्थ भी परम ज्ञान के सामने जैसे सूक्ष्म तिनके हैं—यही संदेश है। वास्तविक मूल्य वह है जो ईश्वर के भय, विवेक और सत्य के प्रकाश में पाया जाता है। यह निश्चय हमें बताता है कि ज्ञान का मोल पारंपरिक भौतिकताओं से नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ नज़दीकी और सही नैतिक मार्ग से तै होता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 28:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और उन्होंने उसमें चार पंक्तियों में मणि जड़े। पहली पंक्ति में माणिक्य, पद्मराग, और लालड़ी जड़े गए;

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और उसमें चार पंक्ति मणि जड़ाना। पहली पंक्ति में तो माणिक्य, पद्मराग और लालड़ी हों;

यहेजकेल 28:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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तू परमेश्‍वर की अदन नामक बारी में था; तेरे पास आभूषण, माणिक्य, पुखराज, हीरा, फीरोजा, सुलैमानी मणि, यशब, नीलमणि, मरकत, और लाल सब भाँति के मणि* और सोने के पहरावे थे; तेरे डफ और बाँसुलियाँ तुझी में बनाई गई थीं; जिस दिन तू सिरजा गया था; उस दिन वे भी तैयार की गई थीं। (प्रका. 2:7)

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