Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42



यही कथन एक पुनर्प्राप्त अनुभव की पुष्टि है: प्रभु की आज्ञा मानकर प्रार्थना स्वीकार
मुख्य interpretive point: अय्यूब 42:9 में तीन मित्रों के साथ-साथ उससे जुड़ी आध्यात्मिक पुनःस्थापना की प्रक्रिया दिखती है। इलिपज़, शूही बिल्दद और नमाती सोपोरो ने योहोवा की आज्ञा के अनुसार किया; परिणाम स्वरूप अय्यूब की प्रार्थना स्वीकार हुई। यह पुष्टि करती है कि परमेश्वर के सामने विनम्रता और क्षमा-स्वीकृति का मार्ग प्रार्थना और समाजिक पुनर्मिलन से होकर जाता है।
पारंपरिक साहित्यिक संदर्भ
यह पद फसल-झगड़े के बाद का उद्धारक कदम है। अय्यूब के मित्रों की प्रत्याशा थी कि उनकी शब्दावली से परमेश्वर की क्रोध शांत होगी; परन्तु परमेश्वर ने उनके शब्दों को नहीं बल्कि अय्यूब के प्रार्थना-हृदय को मान्यता दी। इलिपज़, शूही बिल्दद और नमाती सोपर ने यह किया कि वे अय्यूब के लिए प्रभु के सामने न्यय की मांग करें और यहोवा ने उन्हें सुन लिया।
संदर्भ-आधार और पंक्ति-विन्यास
पूर्वकथन में अय्यूब के मित्रों की विविधता और उनके डर-आचरण के बीच, यह verse एक नई दिशा देता है: प्रभु के सामने एक साथ आते हुए, साझा प्रार्थना से दोष-स्वीकृति और पूर्व-धारणाओं के बंधन टूटते हैं। यह बताता है कि सच्ची क्षमा और आशीष परमेश्वर की इच्छा से आती है, न कि केवल मानव-तर्क से।
धार्मिक-तत्व और theological significance
- सामूहिक प्रार्थना से परमेश्वर की कृपा प्राप्ति: तीन मित्रों की भागीदारी के साथ प्रार्थना का स्वीकार होना दिखाता है कि विश्वास समुदाय में एकत्र होकर प्रस्तुत की गई प्रार्थनाएं प्रभावशाली होती हैं।
- प्रार्थना-स्वीकृति में परिवर्तन: यहयुवा अय्यूब की स्थिति पर भी विचार करता है कि किस प्रकार איש एक दूसरे के लिए intercession करते हैं और परमेश्वर उनके बीच न्याय-संरचना बनाते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त explicits)
1) प्रार्थना और intercession का मूल्य: प्रकाशित उदाहरण के रूप में इब्रानी 4:16—नवीन परामर्श के लिए कृपा-हृदय से आ जाना।
2) समुदाय की एकता: मत्ती 18:20 जैसे संदर्भ जो बतलाते हैं कि_two or three gather in my name, I am there—यह कुछ हद तक मेल खाता है कि तीन मित्रों के साथ इकट्ठे होने का प्रभाव क्या दिखाता है।
3) क्षमा-स्वीकृति का मार्ग: पवित्र-रूह के पवित्र परिवर्तन के लिए प्राथना-प्रेषण और सत्य-धारणाओं की पुनर्स्थापना।
प्रश्न-चेतना (निर्भर सोच के लिए)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोवा की आज्ञा के अनुसार इलिपज़, शूही बिल्दद और नमाती सोपर ने मिलकर अय्यूब के लिए प्रार्थना की; और परमेश्वर ने प्रार्थना-स्वीकृति देकर अय्यूब की दिशा को पुनः निर्धारित किया। यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्ची क्षमा और आशीर्वाद समुदाय की एकता और विनम्रता से खुलते हैं, और प्रभु के सामने एकत्व में आकर ही हम गहराई से बदल सकते हैं।
नोट: इस पाद-हिस्सा के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरण आवश्यक होने पर भी उन्हें हल्के शब्दों में समाहित किया गया है; यदि आप चाहें तो उनके विचारों के छोटे उद्धरण यहाँ सीधे उद्धृत किए जा सकते हैं।