Old Testament
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होशे 6:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
आओ, हम ज्ञान ढूँढ़े, वरन् यहोवा का ज्ञान प्राप्त करने के लिये यत्न भी करें; क्योंकि यहोवा का प्रगट होना भोर का सा निश्चित है; वह वर्षा के समान हमारे ऊपर आएगा, वरन् बरसात के अन्त की वर्षा के समान जिससे भूमि सींचती है।”
होशे 6:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 6:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 72:6 (HINIRV) »
वह घास की खूँटी पर बरसने वाले मेंह, और भूमि सींचने वाली झड़ियों के समान होगा।

होशे 14:5 (HINIRV) »
मैं इस्राएल के लिये ओस के समान हूँगा; वह सोसन के समान फूले-फलेगा, और लबानोन के समान जड़ फैलाएगा।

फिलिप्पियों 3:13 (HINIRV) »
हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूँ; परन्तु केवल यह एक काम करता हूँ, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ,
होशे 6:3 का स्पष्ट अर्थ
इस वचन में परमेश्वर की खोज तथा तात्कालिक क्रियात्मक संदेश एक साथ उठते हैं: हमें ज्ञान तलाशना चाहिए और Yahweh के ज्ञान को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करना चाहिए, क्योंकि उसका प्रगट होना निश्चित है और वह हमारे ऊपर नई सुबह की रोशनी जैसेबरसात की तरह आना है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर का परिचय और आशीर्वाद समय पर और नियमित रूप से हमारे जीवन में आता है यदि हम उसे पाने के लिए सचेत रहते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे की पुस्तिका में राष्ट्र इज़राइल के असमान जीवन के दौरान ईश्वर की करुणा और न्याय दोनों उजागर होते हैं। प्रजापति, यहूदा और अन्य पड़ोसी शक्तियों के साथ संबंधों में असंतुलन के कारण वे कभी-कभी परमेश्वर की इच्छा से विचलित होते हैं। इस वाक्य में होशे चेतावनी के साथ साथ आशा भी देते हैं कि परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करना, उसका आशीर्वाद प्राप्त करना संभव है—पर यह एक सतत खोज है, न कि अचानक मिलता हुआ लाभ।
interpretive observations
संकेतक विचार (Short thematic list)
अन्य संदर्भ और उनके अर्थ
– रोम 8:28 के पथ पर विश्वास और परमेश्वर की योजना के प्रति धैर्य से जुड़ाव बताता है कि सारी परिस्थिति मिलकर अच्छी के लिए काम करती है।
– यसु 4:6 में ज्ञान और चेष्टा के साथ परमेश्वर की कृपा की ओर संकेत है कि बिना गुरु-निर्देश के ज्ञान वास्तविक नहीं बनता।
– याकूब 1:5 दिखाता है कि यदि किसी को ज्ञान की कमी हो तो वह परमेश्वर से मांगे, जो उदारता के साथ देता है।
पूर्व-प्रेरणा से सीख
हमें यह समझना चाहिए कि ज्ञान एक एकांत खोज नहीं है; यह समुदाय और आदर्श जीवन के साथ जुड़ा है। परमेश्वर के वक्त के विरुद्ध ओढ़ने से ज्ञान अधूरा रहता है। इस लिए दैनिक प्रार्थना, पवित्रशास्त्र के अध्ययन और व्यवहार में उसकी इच्छा को मानना एक साथ चलना चाहिए।
कंठसार-निष्कर्ष
होशे 6:3 हमें बताता है कि परमेश्वर का ज्ञान पाने के लिए निरंतर और सक्रिय खोज आवश्यक है, और उसका आशीर्वाद समय पर आता है। एक विकसित आध्यात्मिक जीवन के लिए हमें अपने मन और कर्म को उसकी रोशनी के अनुरूप ढालना चाहिए, ताकि उसे हमारा भोर हो और हमारी भूमि बरसात से सींचे।
क्रॉस-रेफरेंसे (संक्षेप)
1) रोम 11:33-36 — ईश्वर की गहराई और ज्ञान की अमिति; उसकी योजना सीमाओं से परे है। व्यावहारिक निष्कर्ष: ज्ञान की खोज में विनम्रता जरूरी है।
2) योशुआ 1:8 — निर्देश: प्रतिदिन उसका कानून मन में लाओ ताकि सफलता तुम्हारा हिस्सा बने। निष्कर्ष: नियमित मनन से परमेश्वर का ज्ञान उभरता है।
3) याकूब 1:5 — ज्ञान के लिए परमेश्वर से माँगना उचित मार्ग है। निष्कर्ष: ज्ञान स्थिर और उदार रूप से मिलता है।
इस पाठ की प्रमुख ध्वनि यही है: ज्ञान और आशीर्वाद दोनों के लिए सक्रिय खोज आवश्यक है; ईश्वर का प्रगट होना हमारी आशा है और वह निश्चित समय पर आता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ उपलब्ध): हेनरी, Barnes, Clarke के संगत टिप्पणी से संक्षेप में निम्न विचार स्थापित होते हैं — यह ज्ञान की खोज को कर्मशील विश्वास के साथ जोड़ता है और परमेश्वर के समय-परिप्रेक्ष्य को मान्यता देता है (उद्धृत सारांश).