होशे 11:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब इस्राएल बालक था, तब मैंने उससे प्रेम किया, और अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया। (मत्ती 2:15)

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होशे 11:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

हेशे 11:1 पर टिप्पणी —-contextual परिचय

यह पद्त यहूदी-ईश्वरीय प्रेम की गहराई को पेश करता है। होशे के समय इस्राएल ने परमेश्वर के साथ असंतुलित सम्बन्ध बनाए, पर परमेश्वर का प्रेम एक अविचल आकर्षण की तरह बना रहा। पंक्ति “जब इस्राएल बालक था, तब मैंने उससे प्रेम किया, और अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया” में पैगंबर होशे के माध्यम से परमेश्वर अपने लोग—जिन्हें वह “बालक” के रूप में देखता है—की दयालुता, चयन और उद्धार की स्मृति को पुनः उजागर करते हैं। मिस्र से बुलाए जाने का संदर्भ पुराने जन्म के समय से जुड़ा है, जब ईश्वर ने इस्राएल को दासताओं से बाहर निकालकर वाचा-उद्धार की राह दिखायी।

मुख्य अर्थ — सार

इस वाक्य की केंद्रीय बात यह है कि परमेश्वर का प्रेम चयनात्मक और उद्धारक है, वह अपने लोगों को स्मरण करके उनके लिए क्रिया-कलाप करता है। यह केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि सब प्रकार के विश्वासियों के लिए एक प्रेरणा है कि ईश्वर की क्रिया और करुणा पहले उनके उद्देश्य में थी—प्रेम से सोचे गये विकल्प और उद्धार का वचन।

मुख्य थीं थीं—तीन प्रमुख विषय

  • चयन और प्रेम: परमेश्वर का प्रेम बिना कारण नहीं, बल्कि अपने सद्गुणों के अनुरूप है; वह अपने बच्चों को पहले से जानकर और उन्हें उद्धार के लिए बुलाकर प्रेम दिखाते हैं।
  • मिस्र से उद्धार: दासता से छुटकारा दिलाने का इतिहास बुनियादी है; यह घटनात्मक उद्धार भी इस्राएल के विश्वास-यात्रा के आरम्भ को दर्शाता है और भविष्य के उद्धार-आह्वान की प्रतीक है।
  • कसी-कैनन और समय: परमेश्वर का कार्य समय और sourced क्रम में है—बालक की स्थिति से शुरुआत कर पुत्रत्व तक पहुँचना।

संबद्ध अंश और प्रासंगिक विचार

यह पद अन्य उद्धार-यात्राओं के साथ जुड़ता है, जैसे कि मत्ती 2:15 में यीशु की मिस्र से बुलाहट का संदर्भ, जहां शास्त्री-सूत्र से दिखता है कि उद्धार का क्रम पुरानी प्रतिज्ञाओं के अनुसार है।

अन्य प्रमुख टिप्पणीकारों के संक्षिप्त संकेत इस प्रकार हैं:

मैथ्यू हेनरी कहते हैं कि परमेश्वर का प्रेम इस्राएल के साथ एक सक्रिय और मूर्त कार्रवाई का रूप लेता है—यही कारण है कि वह उन्हें समय-समय पर कृपा दिखाते हैं, भले ही वे असफल हों।

आल्बर्ट बार्न्स निर्देश देते हैं कि यहाँ उद्धार का आरम्भ दासता से मुक्ति है, जो परमेश्वर के पिता-चरण की तरह है।

आडम क्लार्क के अनुसार, यह स्मरण कराता है कि धर्म-यात्रा में ईश्वर का प्रेम पहले है और वह अपने लोगों को उनके समय के अनुसार मार्गचित्र देता है।

व्यावहारिक विचार

हम कैसे इस प्रेम को अपने जीवन में अनुभव करते हैं? स्वयं के अतीत की दासी-गिरहों से बाहर आकर, हमें विश्वास है कि परमेश्वर का बुलावा और उद्धार कार्य हमेशा वर्तमान में है। जब हम कठिन समय से गुजरते हैं, तब भी उनके प्रेम की यह मिसाल हमें आशा देती है—क्योंकि उद्धार शुरू हो चुका है और उसके प्रेम के पथ पर हमें सहभागिता दी गई है।

संक्षिप्त समापन

होशे 11:1 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर का प्रेम सक्रिय, स्मरणीय और उद्धार-स्वरूप है—आरम्भ से ही वह अपने लोग बनाते और बुलाते हैं। यह उद्धार-यात्रा इस्राएल के इतिहास से आगे बढ़कर हमारे लिए भी आशा का स्रोत बनती है, क्योंकि भगवान अपने पुत्रों के साथ प्रेम करते हैं और उन्हें बुलाते हैं।

क्रॉस-रेफरंस (संक्षिप्त टिप्पणी)

यूहन्ना 1:12-13 के संदर्भ में प्रभु के पुत्रत्व का विचार मिलाजुलकर दिखता है, क्योंकि परमेश्वर का बुलावा व्यक्ति को ईश्वर के परिवार का सदस्य बनाता है। और मत्ती 2:15 में यीशु के मिस्र से आने का उल्लेख इस बात की पुष्टि करता है कि उद्धार के क्रम पुराने प्रतिज्ञाओं के साथ संगत है। अतः उद्धार की योजना एक सतत कथा है—पहचान, बुलावा और उद्धार।

उद्धरण के लिए: मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की संक्षिप्त मान्य टिप्पणियाँ नीचे के सार में समाहित हैं:

हेनरी: “परमेश्वर का प्रेम सक्रिय और मूर्त क्रिया है।”

बार्न्स: “उद्धार का आरम्भ दासता से मुक्ति है।”

क्लार्क: “ईश्वर का प्रेम पहले है और वह मार्गदर्शक है।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

होशे 11:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और हेरोदेस के मरने तक वहीं रहा। इसलिए कि वह वचन जो प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था पूरा हो “मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया।” (होशे 11:1)

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और तू फ़िरौन से कहना, 'यहोवा यह कहता है, कि इस्राएल मेरा पुत्र वरन् मेरा पहलौठा है,

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वहीं मैं उसको दाख की बारियाँ दूँगा, और आकोर की तराई को आशा का द्वार कर दूँगा और वहाँ वह मुझसे ऐसी बातें कहेगी जैसी अपनी जवानी के दिनों में अर्थात् मिस्र देश से चले आने के समय कहती थी।

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