Old Testament
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होशे 11:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह मिस्र देश में लौटने न पाएगा; अश्शूर ही उसका राजा होगा, क्योंकि उसने मेरी ओर फिरने से इन्कार कर दिया है।
होशे 11:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 11:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 7:16 (HINIRV) »
वे फिरते तो हैं, परन्तु परमप्रधान की ओर नहीं; वे धोखा देनेवाले धनुष के समान हैं; इसलिए उनके हाकिम अपनी क्रोधभरी बातों के कारण तलवार से मारे जाएँगे। मिस्र देश में उनको उपहास में उड़ाए जाने का यही कारण होगा।

होशे 8:13 (HINIRV) »
वे मेरे लिये बलिदान तो करते हैं, और पशु बलि भी करते हैं, परन्तु उसका फल माँस ही है; वे आप ही उसे खाते हैं; परन्तु यहोवा उनसे प्रसन्न नहीं होता। अब वह उनके अधर्म की सुधि लेकर उनके पाप का दण्ड देगा; वे मिस्र में लौट जाएँगे।

होशे 10:6 (HINIRV) »
वह यारेब राजा की भेंट ठहरने के लिये अश्शूर देश में पहुँचाया जाएगा। एप्रैम लज्जित होगा, और इस्राएल भी अपनी युक्ति से लजाएगा।
होशे 11:5 का सेटिंग और मूल संदेश
पद यह बताता है कि ईश्वर के आशीर्वाद और दया के विरुद्ध कुछ भी स्थाई नहीं है, यदि मनुष्य उसका इन्कार कर देता है। यह घोषणा इस बात की पुष्टि करती है कि यहॉं मिस्र की नहीं, अश्शूर ही उसी राजा के रूप में उभरेंगे जो दया नहीं पाएगा—यानी ईश्रायल के लिए एक सतर्क चेतावनी जो यह कहती है कि आत्म-स्मरण और ईश्वर की दिशा से डिग जाना परिणामस्वरुप विनाश का कारण बन सकता है।
ईश्वर और विश्वास का दृश्य
इस पद में ईश्वर की सत्ता और न्याय स्पष्ट रूप से प्रकट है। यह कहता है कि जो लोग मेरी ओर पलटते नहीं, उनके लिए पृथ्वी की सीमाएँ और शक्तियाँ निर्णायक भूमिका निभाती हैं। अश्शूर को राजा के रूप में दिखाना, एक ਤोफरे की तरह है—एक शक्तिशाली दंडदाता जिन्हें उन्होंने अपने ख्वाबों के अनुसार काम करने दिया है, जबकि अपने अभिमान में वे ईश्वर के साथ अपने रिश्ते को त्याग देते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबंधित पवित्र पाठ
1) औरोस 11:11-12 — ईश्वर की पकड़ फिर से लौटती है जब लोग उनकी तरफ पलटते नहीं।
2) योएल 2:13 — दिल से पलटने का आह्वान; केवल औपचारिकता नहीं, आंतरिक बदलाव आवश्यक है।
3) पतरस 2:9 — परमेश्वर की पंक्तियों के अनुसार शासन और दया का संतुलन, जब लोग उनकी राह छोड़ते हैं।
आज के लिए अनुप्रयोग
हममें से प्रत्येक को यह स्मरण रहना चाहिए कि ईश्वर के साथ संबंध केवल बाहरी धर्म नहीं है, बल्कि दिल की fide में गहराई है। यदि हम अपने विश्वास को केवल उन्नत योजनाओं, राजनीति, या सुरक्षा के स्रोतों पर टिकाते हैं, तो हमें सचेत रहना चाहिए कि हमारे जीवन की दिशा अक्सर बदलती प्रतिज्ञाओं के कारण चिह्नित होती है। ईश्वर की ओर पलटना और उनकी राह पर चलना, हमें स्थिरता और आशीर्वाद देता है—चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।
उद्धृत विचार (एतिहासिक टिप्पणीकारों से संकलित):
मैथ्यू हेन्री का संकेतक ध्यान देता है कि ईश्वर की प्रतीक्षा में असंतोष या अविश्वास सामाजिक-राजनीतिक परिघटनाओं को भी निर्णायक बना सकता है, परन्तु वह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर विश्वासयोग्य है और उसका सन्मुख रक्षण बना रहता है।
एल्बर्ट बार्न्स का संदेश है कि न केवल बाहरी आचरण, बल्कि आंतरिकता और मन की सच्ची बदलाहट ही परमेश्वर के साथ के रिश्ते को मजबूत बनाती है।
एडम क्लार्क कहते हैं कि दंडस्वरूप सत्ता के माध्यम से ईश्वर अपने चूने हुए लोगों पर अपने मार्ग दिखाते हैं; वे अश्शूर जैसी शक्तियों को भी किनारे कर सकते हैं यदि लोग पलटते हैं और ईश्वर के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखें।
संक्षेपतः: यह वाक्यांश हमें स्मरण कराता है कि ईश्वर की ओर पलटना ही आशा है; अन्यथा असुरक्षा और विनाश के रास्ते खुलते हैं, चाहे वे सत्ता कितनी भी मजबूत क्यों न हो।